Class 10 Hindi Chapter 10 Budhi Kaki Question Answer Maharashtra Board

Std 10 Hindi Chapter 10 Budhi Kaki Question Answer Maharashtra Board

Balbharti Maharashtra State Board Class 10 Hindi Solutions Chapter 10 बूढ़ी काकी Notes, Textbook Exercise Important Questions, and Answers.

Hindi Lokbharti 10th Digest Chapter 10 बूढ़ी काकी Questions And Answers

Hindi Lokbharti 10th Std Digest Chapter 10 बूढ़ी काकी Textbook Questions and Answers

कृति

(कृतिपत्रिका के प्रश्न 3 (अ) के लिए

* सूचना के अनुसार कृतियाँ कीजिए :

प्रश्न 1.

 स्वभाव के आधार पर पात्र का नाम
१. क्रोधी ………………….
२. लालची ………………….
३. शरारती ………………….
४. स्नेहिल ………………….

उत्तर:

 स्वभाव के आधार पर पात्र का नाम
१. क्रोधीरूपा
२. लालचीबुद्धिराम
३. शरारतीदोनों लड़के
४. स्नेहिललाड़ली

प्रश्न 2.
कृति पूर्ण कीजिए:
Maharashtra Board Class 10 Hindi Solutions Chapter 10 बूढ़ी काकी 1
उत्तर:
Maharashtra Board Class 10 Hindi Solutions Chapter 10 बूढ़ी काकी 17

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प्रश्न 3.
बुद्धिराम का काकी के प्रति दुर्व्यवहार दर्शाने वाली चार बातें :
१) ………………….
४) ………………….
२) ………………….
४) ………………….
उत्तर :
(i) बूढ़ी काकी की संपत्ति अपने नाम लिखाते समय किए गए लंबे-चौड़े वादों को बुद्धिराम द्वारा न निभाना।
(i) बूढ़ी काकी को भरपेट भोजन न देना।
(iii) भोजन कर रहे मेहमानों के बीच रेंगती हुई बूढ़ी काकी के पहुँच जाने पर बुद्धिराम द्वारा निर्दयतापूर्वक पकड़कर उनकी कोठरी में ले जाकर पटक देना।
(iv) बूढ़ी काकी के व्यवहार से रुष्ट होने के कारण तिलक उत्सव में सभी मेहमानों और घरवालों के भोजन कर लेने के बाद भी बुद्धिराम द्वारा उन्हें खाने के लिए न पूछना।

प्रश्न 4.
कारण लिखिए :
a. बूढ़ी काकी ने भतीजे के नाम सारी संपत्ति लिख दी _____________________
b. लाड़ली ने पूड़ियाँ छिपाकर रखीं _____________________
c. बुद्धिराम ने काकी को अँधेरी कोठरी में धम से पटक दिया _____________________
d. अंग्रेजी पढ़े नवयुवक उदासीन थे _____________________
उत्तर:
a. बूढ़ी काकी के परिवार में अब एक भतीजे के सिवाय और कोई नहीं था, इसलिए उन्होंने भतीजे के नाम सारी संपत्ति लिख दी।
b. बुद्धिराम और रूपा दोनों ने ही बूढ़ी काकी को उनकी निर्लज्जता के लिए दंड देने का निश्चय कर लिया था। इसलिए बूढ़ी काकी को किसी ने नहीं पूछा।
c. बूढ़ी काकी रेंगती हुई भोजन कर रहे मेहमान मंडली के बीच पहुँच गई थी। इससे कई लोग चौंककर उठ खड़े हुए थे। बुद्धिराम को इससे गुस्सा आया और उसने काकी को वहाँ से उठाकर कोठरी में ले जाकर धम से पटक दिया।
d. अंग्रेजी पढ़े नवयुवक उदासीन थे, क्योंकि वे गँवार मंडली में बोलना अथवा सम्मिलित होना अपनी प्रतिष्ठा के प्रतिकूल समझते थे।

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प्रश्न 5.
सूचना के अनुसार शब्द में परिवर्तन कीजिए :
Maharashtra Board Class 10 Hindi Solutions Chapter 10 बूढ़ी काकी 2
उत्तर :
Maharashtra Board Class 10 Hindi Solutions Chapter 10 बूढ़ी काकी 30

अभिव्यक्ति

‘बुजुर्ग आदर-सम्मान के पात्र होते हैं, दया के नहीं इस सुवचन पर अपने विचार लिखिए।
उत्तर :
हमें यह बात याद रखनी चाहिए कि आज जो व्यक्ति बुजुर्ग है वह हमेशा बूढ़ा और असहाय नहीं था। वह भी पहले युवा था। उसने अपने परिवार का पालन-पोषण और उसकी देखरेख की थी। उसने तरह-तरह की समस्याओं का सामना किया था और उन्हें अपने तरीके से हल किया था। उसे जीवन जीने का अनुभव है। लेकिन वृद्ध हो जाने पर किसी-किसी परिवार में बुजुर्गों को किनारे कर दिया जाता है। उनकी सलाह या सुझाव को कोई महत्त्व नहीं दिया जाता। इस तरह के व्यवहार से बुजुर्गों को अपने सम्मान पर ठेस लगती महसूस होती है।

किसी-किसी परिवार में तो बुजुर्गों के खाने-पीने की भी किसी को चिंता नहीं रहती। घर के लोग अपने में मगन रहते हैं और बुजुर्गों का कोई ख्याल नहीं रखता। बुजुर्गों को खाने-पीने के लिए उनका मुँह ताकना पड़ता है। हमें यह बात नहीं भूलनी चाहिए कि हम इन बुजुर्गों की संतान हैं। उनको पर्याप्त सम्मान देना और उनकी हर प्रकार से देखरेख करना हमारा फर्ज है। बुजुर्गों की प्रसन्नता और उनके आशीर्वाद से ही परिवार फूलता-फलता और खुशहाल रहता है। इसलिए बुजुर्गों को हमें सदा आदर-सम्मान देना चाहिए और उनकी देखरेख करनी चाहिए।

भाषा बिंदु

प्रश्न 1.
निम्नलिखित क्रियाओं के प्रथम तथा द्वितीय प्रेरणार्थक रूप लिखिए :

मूल क्रिया प्रथम प्रेरणार्थक रूप द्वितीय प्रेरणार्थक रूप
भूलना ………………………. ……………………….
पीसना ………………………. ……………………….
माँगना ………………………. ……………………….
तोड़ना ………………………. ……………………….
बेचना ………………………. ……………………….
कहना ………………………. ……………………….
नहाना ………………………. ……………………….
खेलना ………………………. ……………………….
खाना ………………………. ……………………….
फैलना ………………………. ……………………….
बैठना ………………………. ……………………….
लिखना ………………………. ……………………….
जुटना ………………………. ……………………….
दौड़ना ………………………. ……………………….
देखना ………………………. ……………………….
जीना ………………………. ……………………….

उत्तर :
Maharashtra Board Class 10 Hindi Solutions Chapter 10 बूढ़ी काकी 31

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प्रश्न 2.
पठित पाठों से किन्हीं दस मूल क्रियाओं का चयन करके उनके प्रथम तथा द्वितीय प्रेरणार्थक रूप निम्न तालिका में लिखिए :

मूल क्रिया प्रथम प्रेरणार्थक रूप द्वितीय प्रेरणार्थक रूप
………………………. ………………………. ……………………….
………………………. ………………………. ……………………….
………………………. ………………………. ……………………….
………………………. ………………………. ……………………….
………………………. ………………………. ……………………….
………………………. ………………………. ……………………….
………………………. ………………………. ……………………….
………………………. ………………………. ……………………….
………………………. ………………………. ……………………….
………………………. ………………………. ……………………….
………………………. ………………………. ……………………….
………………………. ………………………. ……………………….
………………………. ………………………. ……………………….
………………………. ………………………. ……………………….
………………………. ………………………. ……………………….
………………………. ………………………. ……………………….

उत्तर :
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Maharashtra Board Class 10 Hindi Solutions Chapter 10 बूढ़ी काकी 33

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उपयोजित लेखन

मेरा प्रिय वैज्ञानिक’ विषय पर निबंध लेखन कीजिए।
उत्तर :
यों तो दुनिया में एक-से-एक बड़े वैज्ञानिक हैं, पर मेरे प्रिय वैज्ञानिक तो सर जगदीशचंद्र बोस ही हैं। सर जगदीशचंद्र बोस की बात ही निराली है। उन्होंने यह सिद्ध करके बता दिया कि पेड़-पौधे भी हमारी तरह साँस लेते हैं और उन्हें पानी और भोजन की आवश्यकता होती है। उनमें भी जान होती है। यदि पेड़-पौधों को सताया या कष्ट दिया जाए, तो वे बीमार हो जाते हैं और उनकी प्रकृति के विरुद्ध उन्हें भोजन दिया जाए अथवा जहरीला रसायन दिया जाए, तो वे मर जाते हैं। वैसे पेड़-पौधों के संपर्क में रहने वाले प्रत्येक व्यक्ति को मालूम होता है कि पेड़-पौधों को नुकसान पहुँचाने या विषैले पदार्थों के संपर्क में आने से वे क्षतिग्रस्त या मृत हो सकते हैं, पर इस बात को सिद्ध किया था सर जगदीशचंद्र बोस ने।

अपने शोध को सिद्ध करने के लिए उन्होंने खुद चुंबकीय क्रेश्कोग्राफ नामक यंत्र तैयार किया। उन्होंने इस यंत्र की सहायता से सब के सामने अपने प्रयोग से यह सिद्ध कर दिया कि पेड़-पौधों में जीवन होता है और प्राणियों की तरह उनमें भी विभिन्न क्रियाएँ होती हैं। इस प्रकार के सूक्ष्म रहस्य का उद्घाटन करने वाले वे पहले वैज्ञानिक थे। वे सच्चे अर्थों में एक महान वैज्ञानिक थे। ऐसे महान वैज्ञानिक पर हमें गर्व है।

Hindi Lokbharti 10th Textbook Solutions Chapter 10 बूढ़ी काकी Additional Important Questions and Answers

गद्यांश क्र.1
प्रश्न. निम्नलिखित पठित गद्यांश पढ़कर दी गई सूचनाओं के अनुसार कृतियाँ कीजिए :

कृति 1 : (आकलन)

प्रश्न 1.
आकृति पूर्ण कीजिए :
Maharashtra Board Class 10 Hindi Solutions Chapter 10 बूढ़ी काकी 3
Maharashtra Board Class 10 Hindi Solutions Chapter 10 बूढ़ी काकी 4
उत्तर:
Maharashtra Board Class 10 Hindi Solutions Chapter 10 बूढ़ी काकी 6
Maharashtra Board Class 10 Hindi Solutions Chapter 10 बूढ़ी काकी 7

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प्रश्न 2.
उत्तर लिखिए :
(i) बूढ़ी काकी का शारीरिक स्वास्थ्य –
(ii) बूढ़ी काकी के परिवार में अब बचा एकमात्र सदस्य –
(iii) बुद्धिराम ने इस तरह लिखाई बूढ़ी काकी की संपत्ति –
(iv) बूढ़ी काकी के रोने का ढंग –
उत्तर:
(i) बूढ़ी काकी के नेत्र, हाथ, पैर आदि सभी अंग जवाब दे चुके थे।
(ii) उनका भतीजा बुद्धिराम।
(iii) खूब लंबे-चौड़े वादे करके।
(iv) बूढ़ी काकी गला-फाड़कर रोती थीं।

प्रश्न 3.
आकृति में दिए गए रिक्त स्थानों में उत्तर लिखकर आकृति पूर्ण कीजिए :
Maharashtra Board Class 10 Hindi Solutions Chapter 10 बूढ़ी काकी 5
उत्तर:
Maharashtra Board Class 10 Hindi Solutions Chapter 10 बूढ़ी काकी 8

कृति 2 : (स्वमत अभिव्यक्ति)

प्रश्न.
बुढ़ापा बहुधा बचपन का पुनरागमन होता है’ इस विषय पर अपने विचार 25 से 30 शब्दों में व्यक्त कीजिए।
उत्तर :
कहते हैं, बुढ़ापा बचपन का ही एक रूप है। वृद्धावस्था : में मनुष्य की हरकतें बच्चों जैसी हो जाती हैं। इस अवस्था में मनुष्य के अंग-प्रत्यंग कमजोर हो जाते हैं और उन्हें बच्चों की तरह दूसरों का सहारा लेना पड़ता है। दिमाग कमजोर हो जाता है। दाँत गिर जाते हैं और मनुष्य का मुँह बच्चों की तरह पोपला हो जाता है। इतना ही नहीं, बच्चों की तरह ही वृद्धों को भी मान-अपमान की परवाह नहीं होती। जिस तरह लोग बच्चों की बातों पर ध्यान नहीं देते, उसी तरह वृद्धों की बातों पर भी कोई ध्यान नहीं देता। उनकी इच्छा-अनिच्छा का भी कोई महत्त्व नहीं होता। इस तरह वृद्धावस्था और बचपन की अधिकांश बातों में समानता होती है। इसलिए कहा जा सकता है कि बुढ़ापा बहुधा बचपन का पुनरागमन होता है।

गद्यांश क्र.2
प्रश्न. निम्नलिखित पठित गद्यांश पढ़कर दी गई सूचनाओं के अनुसार कृतियाँ कीजिए :

कृति 1 : (आकलन)

प्रश्न 1.
संजाल पूर्ण कीजिए :
Maharashtra Board Class 10 Hindi Solutions Chapter 10 बूढ़ी काकी 9
उत्तर:
Maharashtra Board Class 10 Hindi Solutions Chapter 10 बूढ़ी काकी 11
Maharashtra Board Class 10 Hindi Solutions Chapter 10 बूढ़ी काकी 12

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प्रश्न 2.
आकृति पूर्ण कीजिए :
Maharashtra Board Class 10 Hindi Solutions Chapter 10 बूढ़ी काकी 10
उत्तर:
Maharashtra Board Class 10 Hindi Solutions Chapter 10 बूढ़ी काकी 13

प्रश्न 3.
कारण लिखिए :
(i) उत्सव के दिन बूढ़ी काकी को अपनी स्थिति पर रोना आया, पर वे रो नहीं सकीं।
उत्तर:
(i) उत्सव के दिन बूढ़ी काकी को अपनी स्थिति पर रोना आया, पर वे रो नहीं सकीं, क्योंकि उन्हें रूपा का डर था।

प्रश्न 4.
त्तर लिखिए :
मुखराम के तिलक उत्सव की तैयारियाँ :
उत्तर:
मुखराम के तिलक उत्सव की तैयारियाँ :
(i) पूड़ियाँ-कचौड़ियाँ निकल रही थीं।
(ii) एक बड़े हंडे में मसालेदार तरकारी पक रही थी।

कृति 2 : (स्वमत अभिव्यक्ति)

प्रश्न.
‘बुढ़ापा तृष्णा रोग का अंतिम समय है’ इस विषय पर अपने विचार 25 से 30 शब्दों में लिखिए।
उत्तर :
मनुष्य के जीवन की चार अवस्थाएँ होती हैं – बचपन, किशोरावस्था, युवावस्था और बुढ़ापा। अपने जीवन में मनुष्य की तरह-तरह की कामनाएँ होती हैं और उनकी पूर्ति करने का वह भरसक प्रयास करता है। बचपन से लेकर युवावस्था तक मनुष्य को अपनी कामनाओं की जल्द से जल्द पूरी होने की उतनी चिंता नहीं रहती, जितनी बुढ़ापे में। वृद्धावस्था में मनुष्य के जीवन के गिने-चुने वर्ष ही बचे होते हैं। इसलिए उसका प्रयास यह होता है कि अपने बचे-खुचे दिनों में वह अपनी सारी कामनाएं पूरी कर ले। ऐसे में उसे किसी भी तरह अपने उद्देश्य को पूरा कर लेना उचित जान पड़ता है। उसके लिए उसे बुरे-भले, मान-अपमान की परवाह नहीं होती। उसका लक्ष्य येनकेन प्रकारेण अपनी इच्छा पूरी करना होता है। इस प्रकार बुढ़ापा तृष्णा रोग का अंतिम समय है।

गद्यांश क्र.3
प्रश्न. निम्नलिखित पठित गद्यांश पढ़कर दी गई सूचनाओं के अनुसार कृतियाँ कीजिए:

कृति 1 : (आकलन)

प्रश्न 1.
उत्तर लिखिए :
Maharashtra Board Class 10 Hindi Solutions Chapter 10 बूढ़ी काकी 15
उत्तर :
Maharashtra Board Class 10 Hindi Solutions Chapter 10 बूढ़ी काकी 18
Maharashtra Board Class 10 Hindi Solutions Chapter 10 बूढ़ी काकी 19

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प्रश्न 2.
आकृति पूर्ण कीजिए :
Maharashtra Board Class 10 Hindi Solutions Chapter 10 बूढ़ी काकी 16
उत्तर :
Maharashtra Board Class 10 Hindi Solutions Chapter 10 बूढ़ी काकी 20

कृति 2 : (स्वमत अभिव्यक्ति)

प्रश्न.
‘लड़कों का बूढों से स्वाभाविक विवेष होता ही है’ इस विषय पर अपने विचार 25 से 30 शब्दों में लिखिए।
उत्तर :
लड़कों और बूढ़ों के बीच पीढ़ियों का अंतर होता है। लड़कों और बूढ़ों में हर बात को लेकर अंतर होना स्वाभाविक है। अधिकांश बूढ़ों की आदत होती है कि वे हर बात को अपने ढंग से सोचते हैं। वे उसमें अपने जमाने की विचारधारा थोपने की कोशिश करते हैं। इसका कारण यह है कि किसी चीज के बारे में उनकी एक धारणा बनी होती हैं। हर बात को वे अपने पैमाने पर कसने की कोशिश करते हैं। जब कि नई पीढ़ी के लड़कों की सोच अलग ढंग की होती हैं। उन्हें पुराने दकियानूसी विचार पसंद नहीं आते। इसलिए बात-बात पर दोनों के विचारों में टकराव होता है। इस तरह लड़कों और बूढ़ों में स्वाभाविक विद्वेष होता है।

गद्यांश क्र. 4
प्रश्न. निम्नलिखित पठित गद्यांश पढ़कर दी गई । सूचनाओं के अनुसार कृतियाँ कीजिए :

कृति 1 : (आकलन)

प्रश्न 1.
संजाल पूर्ण कीजिए :
Maharashtra Board Class 10 Hindi Solutions Chapter 10 बूढ़ी काकी 21
उत्तर:
Maharashtra Board Class 10 Hindi Solutions Chapter 10 बूढ़ी काकी 23

Maharashtra Board Class 10 Hindi Solutions Chapter 10 बूढ़ी काकी

प्रश्न 2.
उत्तर लिखिए :
Maharashtra Board Class 10 Hindi Solutions Chapter 10 बूढ़ी काकी 22
उत्तर:
Maharashtra Board Class 10 Hindi Solutions Chapter 10 बूढ़ी काकी 24

प्रश्न 3.
कारण लिखिए :
(i) घरवालों ने भोजन किया, परंतु बूढ़ी काकी को किसी ने नहीं पूछा –
(ii) रात के ग्यारह बज गए थे। लाड़ली की आँखों में नींद न थी –
उत्तर:
(i) लाड़ली उन पूड़ियों को बूढ़ी काकी के पास ले जाना चाहती थी, ताकि वे उन्हें खा सके।
(ii) बूढ़ी काकी को पूड़ियाँ खिलाने की खुशी लाड़ली को सोने न देती थी।

गद्यांश क्र.5
प्रश्न. निम्नलिखित पठित गद्यांश पढ़कर दी गई सूचनाओं के अनुसार कृतियाँ कीजिए :

कृति 1 : (आकलन)

प्रश्न 1.
आकृति पूर्ण कीजिए :
Maharashtra Board Class 10 Hindi Solutions Chapter 10 बूढ़ी काकी 25
Maharashtra Board Class 10 Hindi Solutions Chapter 10 बूढ़ी काकी 26
उत्तर :
Maharashtra Board Class 10 Hindi Solutions Chapter 10 बूढ़ी काकी 27
Maharashtra Board Class 10 Hindi Solutions Chapter 10 बूढ़ी काकी 28

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प्रश्न 2.
कारण लिखिए :
(i) रूपा का हृदय सन्न हो गया –
(ii) रूपा बैठी स्वर्गीय दृश्य का आनंद लेने में निमग्न थी –
उत्तर:
(i) रूपा का हृदय सन्न हो गया, क्योंकि उसने देखा कि बूढ़ी काकी पत्तलों पर से पूड़ियों के टुकड़े उठा-उठाकर खा रही हैं।
(ii) रूपा बैठी स्वर्गीय दृश्य का आनंद लेने में निमग्न थी, क्योंकि बूढ़ी काकी भोले बच्चों की तरह सब कुछ भूलकर बैठी हुई खाना खा रही थीं और उनके एक-एक रोएँ से सच्ची सदिच्छाएँ निकल रही थीं।

प्रश्न 3.
रिश्ता पहचानिए :
(i) बूढ़ी काकी, रूपा की लगती हैं –
(ii) रूपा, बूढ़ी काकी की लगती हैं –
उत्तर:
(i) बूढ़ी काकी, रूपा की लगती हैं – चचेरी सास।
(ii) रूपा, बूढ़ी काकी की लगती है – बहू।

कृति 2 : (स्वमत अभिव्यक्ति)

प्रश्न.
शादी-ब्याह अथवा पारिवारिक समारोहों में प्रीतिभोज में अनाप-शनाप खर्च करना कितना उचित’ विषय पर अपने विचार 25 से 30 शब्दों में लिखिए।
उत्तर :
हमारे देश में शादी-ब्याह तथा छोटे-मोटे पारिवारिक समारोहों में प्रीतिभोज में लोगों को खिलाने-पिलाने की पुरानी परंपरा चली आ रही है। समर्थ व्यक्तियों को इस तरह का खर्च करना ज्यादा नहीं अखरता, पर आर्थिक दृष्टि से कमजोर लोगों के लिए इस तरह के ३ खर्च का भार उठाना मुश्किल होता है। पर सामाजिक बंधनों तथा अपने ३ नाम के लिए ऐसे समारोह आयोजित करना आज एक फैशन हो गया । हैं। यह फैशन दिनोदिन बढ़ता ही जा रहा है। कुछ लोग तो अपनी प्रतिष्ठा बढ़ाने के लिए कर्ज लेकर लोगों को बुलाकर खिलाते-पिलाते ३ हैं। बाद में यह कर्ज चुकाना उनके लिए समस्या बन जाता है और उन्हें अपनी जायदाद बक बेचनी पड़ जाती है। लोगों को इस तरह के उत्सवों में अनावश्यक रूप से पैसे उड़ाने से बाज आना चाहिए। इस तरह के उत्सवों-समारोहों में अनाप-शनाप खर्च करना अपने ऊपर एक तरह का आर्थिक बोझ लादना है, जिससे कोई लाभ नहीं होता।

उपक्रम/कृति/परियोजना

श्रवणीय
बड़ों से कोई ऐसी कहानी सुनिए जिसके आखिरी हिस्से में कठिन परिस्थितियों से जीतने का संदेश मिल रहा हो।

संभाषणीय
वृद्धाश्रम’ के बारे में जानकारी इकट्ठा करके चर्चा कीजिए।

लेखनीय
‘भारतीय कुटुंब व्यवस्था’ पर भाषण के मुद्दे लिखिए।
उत्तर:
भारतीय कुटुंब व्यवस्था के मुद्दे :

  • कुटुंब किसे कहते हैं?
  • प्राचीन भारतीय कुटुंब।
  • आधुनिक कुटुंब।
  • कुटुंब व्यवस्था में बदलाव के कारण।
  • कुटुंब व्यवस्था के आधार।
  • कुटुंब बनने-टूटने के कारण।
  • कुटुंब की आवश्यकता।
  • संयुक्त कुटुंब एवं एकल कुटुंब से लाभ-हानि।
  • वसुधैव कुटुंबकम्।

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पठनीय
‘चलती-फिरती पाठशाला’ उपक्रम के बारे में जानकारी इकट्ठी करके पढ़िए और सुनाइए।

बूढ़ी काकी Summary in Hindi

विषय – प्रवेश : ‘बूढ़ी काकी’ कथा उन दयनीय व्यक्तियों की व्यथा है, जिन्हें परिस्थितिवश मजबूरी में अपनी पूरी संपत्ति किसी अन्य व्यक्ति को सौंपनी पड़ती है और खुद उसकी दया पर जीना पड़ता है। बूढ़ी काकी अपने पति और जवान बेटों की मृत्यु के पश्चात अपने एकमात्र भतीजे बुद्धिराम के वादों पर विश्वास करके अपनी सारी संपत्ति उसके नाम लिख देती हैं। लेकिन थोड़े दिनों के बाद ही ऐसी स्थिति हो जाती है कि उसे पेट भर भोजन मिलना भी मुश्किल हो जाता है। एक बार तो बूढ़ी काकी के जीवन में ऐसी घटना घटती है, जिसके बारे में जानकर दिल दहल उठता है।

बुद्धिराम के बेटे के तिलक समारोह में सभी मेहमान और घर के सभी लोग भोजन कर सोने चले जाते हैं, पर बूढ़ी काकी को खाने के लिए कोई नहीं पूछता। भूख से व्याकुल बूढ़ी काकी रात के अंधेरे में कूड़े में फेंकी गई पत्तलों पर छूटे जूठन को बीन–बीनकर खाकर अपना पेट भरती हैं। बुद्धिराम की पत्नी रूपा यह दृश्य देखती है, तो उसकी रूह काँप उठती है और वह इस अधर्म के लिए ईश्वर से क्षमा करने की प्रार्थना करती है और बूढ़ी काकी को परोसकर भरपेट भोजन कराती है और उससे अपनी भूल के लिए बुरा न मानने के लिए कहती है।

बूढ़ी काकी मुहावरे – अर्थ

  • सब्जबाग दिखाना – बड़े–बड़े झूठे वादे करना।
  • गला फाड़ना – शोर करना, चिल्लाना।
  • लाले पड़ना – किसी चीज के लिए तरसना।
  • उबल पड़ना – क्रोधित होना।
  • पानी उतर जाना – बेइज्जत होना।
  • होंठ चाटना – कोई स्वादिष्ट पदार्थ अधिक खाने की इच्छा रखना।
  • कलेजे में हूक सी उठना – मन में दुख होना।
  • कलेजा पसीजना – दया आना।
  • हृदय सन्न रह जाना – घोर आश्चर्य में डूब जाना।
  • छाती पर सवार होना – सामने अड़े रहना।
  • दम घुटना – हवा की कमी के कारण या गर्मी की अधिकता से साँस रुकना।

Class 10 Hindi Lokbharti Textbook Solutions

Don Divas Class 10 Marathi Chapter 5 Question Answer Maharashtra Board

Class 10th Marathi Aksharbharati Chapter 5 दोन दिवस Question Answer Maharashtra Board

Balbharti Maharashtra State Board Class 10 Marathi Solutions Aksharbharati Chapter 5 दोन दिवस Notes, Textbook Exercise Important Questions and Answers.

Std 10 Marathi Chapter 5 Question Answer

Marathi Aksharbharati Std 10 Digest Chapter 5 दोन दिवस Textbook Questions and Answers

प्रश्न 1.
कृती पूर्ण करा.
(अ) ‘रोजची भूक भागवण्यासाठी कराव्या लागणाऱ्या कष्टांमुळे आयुष्याचे दिवस वाया गेलेत’ या आशयाची कवितेतील ओळ शोधा.
उत्तर:
‘भाकरीचा चंद्र शोधण्यातच जिंदगी बरबाद झाली’.

(आ) कवीचा प्रयत्नवाद आणि आशावाद दाखवणारी ओळ लिहा.
उत्तर:
‘दुःख पेलावे कसे, पुन्हा जगावे कसे, याच शाळेत शिकलो’

प्रश्न 2.
एका शब्दांत उत्तर लिहा.
(अ) कवीचे सर्वस्व असलेली गोष्ट – [             ]
(आ) कवीचा जवळचा मित्र – [             ]
उत्तर:
(अ) हात
(आ) अश्रु

प्रश्न 3.
खालील शब्दसमूहांचा तुम्हांला कळलेला अर्थ लिहा.
(अ) माना उंचावलेले हात ……………………….
(आ) कलम केलेले हात ……………………….
(इ) दारिद्र्याकडे गहाण पडलेले हात ……………………….
उत्तर:
(i) माना उंचावलेले हात – आशावादाने उभारलेले हात.
(i) कलम केलेले हात – निराशेने खाली झुकलेले हात.
(iii) दारिद्र्याकडे गहाण पडलेले हात – हतबल झालेले हात.

Maharashtra Board Class 10 Marathi Aksharbharati Solutions Chapter 5 दोन दिवस

प्रश्न 4.
काव्यसौंदर्य.

(अ) खालील ओळींचे रसग्रहण करा.
‘दोन दिवस वाट पाहण्यात गेले; दोन दुःखात गेले
हिशोब करतो आहे किती राहिलेत डोईवर उन्हाळे’
उत्तरः
नारायण सुर्वे यांच्या ‘दोन दिवस’ या कवितेच्या वरील दोन ओळीतून आपल्या जीवनाचा आलेख अगदी साध्या सोप्या भाषेत मांडला आहे. जीवन जगण्याच्या संघर्षात अडकलेल्या प्रत्येक साधारण माणसाच्या मनोव्यवस्थेचे प्रतिनिधीत्व ते आपल्या कवितेतून करतात.

रोज तेच दु:ख, रोज नवी समस्या, रोजची तीच निराशा, रोजचा तोच संघर्ष पण जीवन जगण्याचा कविचा आशावाद प्रचंड आहे. दोन चांगल्या दिवसाची ते वाट पाहतात. आयुष्याचे दिवस किती शिल्लक राहिलेत याचा हिशोब करतात.

(आ) ‘दु:ख पेलावे आणि पुन्हा जगावे’, या वाक्यामागील तुम्हांला जाणवलेला विचार तुमच्या शब्दांत स्पष्ट करा.
उत्तरः
कवी नारायण सुर्वे यांच्या जीवनसंघर्षाचे वर्णन दोन दिवस या कवितेतून केले आहे. कवी म्हणतो की जीवनातल्या दुःखाला न घाबरता न डगमगता सामोरे जावे. कारण दुःख माणसाला खूप काही शिकवून जाते. दु:खावर मात करत असतांना आपल्यातल्या अनेक क्षमतांची अनुभुती येऊन परिस्थितीवर मात करणे, समायोजन करणे, नवीन पर्याय शोधणे या अनेक बाबीतून दु:ख पेलण्याची ताकद माणसात निर्माण होते. म्हणून कवी म्हणतो. जीवनातल्या दुःखाने निराश, हताश न होता सामर्थ्याने विपरित परिस्थितीला सामोरे जावे आणि जीवनात पुन्हा ताकदीने उभे रहावे. हेच जिवनचे खरे सत्य आहे.

Maharashtra Board Class 10 Marathi Aksharbharati Solutions Chapter 5 दोन दिवस

(इ) कवितेत व्यक्त झालेल्या कष्टकऱ्यांच्या जीवनाविषयी तुमच्या भावना लिहा.
उत्तरः
‘दोन दिवस’ या नारायण सुर्वे यांच्या कवितेवरून विविध सेवा क्षेत्रात काम करणाऱ्या अनेक कष्टकऱ्यांचे जीवनचित्र समोर उभे राहते. अनेक ठिकाणी, अनेक प्रकारचे कष्ट आणि अत्यंत श्रमाचे काम करणारे कष्टकरी आपण पाहतो. ऊन, वारा, पाऊस अशा सगळ्या गोष्टी अंगावर झेलून ते सदैव श्रम करत असतात, जीवनासाठी लागणाऱ्या आवश्यक गोष्टी त्यांना उपलब्ध करून दिलेल्या नसतात. जीवनाची हमी नसते. अत्यंत कमी वेतनावर ते प्रचंड मेहनतीचे काम करत असतात. त्यांना जीवन जगणे खूप कठीण जाते. रोज काम मिळण्याची शाश्वती नसते. अशाप्रकारे आपल्या देशात कष्टकऱ्यांचे जीवन अत्यंत कठीण आहे.

(ई) ‘कवितेत व्यक्त झालेले जीवनसत्य’, याबाबत तुमचे विचार स्पष्ट करा.
उत्तरः
माणसाच्या जीवनात सुख आणि दुःख या दोन गोष्टी सदैव असतात. कधी सुखाचे दिवस असतात, तर कधी दुःखाचे, असे असले तरी कोणताही काळ हा कायम राहत नाही. दुःखातून माणूस अनेक गोष्टी शिकतो व उदयाच्या चांगल्या दिवसाची अपेक्षा करत जगत राहतो. माणसाने कवी सारखं आशावादी राहिलं पाहिजे. दुःखातही सुख येईल अशी आशा बाळगली पाहिजे, म्हणजे जगणं सोपं होतं.

Marathi Akshar Bharati Class 10 Textbook Solutions Chapter 5 दोन दिवस Additional Important Questions and Answers

प्रश्न १. पुढील पक्ष्याच्या आधारे दिलेल्या सूचनेनुसार कृती करा:
कृती १ : आकलन कृती

प्रश्न 1.
आकृती पूर्ण करा.
Maharashtra Board Class 10 Marathi Aksharbharati Solutions Chapter 5 दोन दिवस 1

Maharashtra Board Class 10 Marathi Aksharbharati Solutions Chapter 5 दोन दिवस

प्रश्न 2.
उत्तरे लिहा.
(i) भाकरीचा चंद्र शोधण्यात बरबाद झालेली – कवीची जिंदगी
(ii) कवीचे सर्वस्व – कवीचे हात
(iii) कवीच्या मदतीसाठी धावून आलेला मित्र – अश्रु
(iv) झोतभट्टीत शेकावे पोलाद तसे शेकले – कवीचे आयुष्य

प्रश्न 3.
योग्य पर्याय निवडून विधान पूर्ण करा.
(i) कवीने याचा विचार हरघडी केला……
(अ) भाकरीचा
(आ) दुःखाचा
(इ) जीवनाचा
(ई) दुनियेचा
उत्तर:
दुनियेचा

कृती २: आकलन कृती

प्रश्न 1.
खालील प्रश्नांची एका वाक्यात उत्तरे लिहा.
(i) साहाय्यास धावून येणारे कवीचे मित्र कोण?
उत्तर :
साहाय्यास धावून येणारे कवीचे मित्र म्हणजे कवीचे अश्रू होय.

(i) कवीने चंद्राला कोणाची उपमा दिली आहे?
उत्तर :
कवीने चंद्राला ‘भाकरीची’ उपमा दिली आहे.

प्रश्न 2.
योग्य जोड्या जुळवा.
‘अ’ गट – ‘ब’ गट
(i) कवी मोजत असलेले – (अ) पोलाद
(ii) कवीची शाळा – (ब) जीवनाचे दिवस
(iii) कवीचे सर्वस्व – (क) संपूर्ण जग
(iv) झोतभट्टी – (ड) कवीचे हात
उत्तर:
(i – ब),
(ii – क),
(iii – ड),
(iv – अ)

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प्रश्न 3.
आकृतिबंध पूर्ण करा,
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प्रश्न 4.
‘दुनियेचा’ असे उत्तर येईल असा प्रश्न तयार करा.
उत्तर:
कवीने हरघडी कोणाचा विचार केला?

प्रश्न 5.
कंसातील योग्य शब्द वापरून रिकाम्या जागा भरा.
(i) ………………… करतो आहे किती राहिलेत डोईवर उन्हाळे. (हिशोब, गणित, मोजत, जमा)
(ii) झोतभट्टीत शेकावे ………………… तसे आयुष्य छान शेकले. (सोने, चांदी, पोलाद, लोखंड)
उत्तर:
(i) हिशोब
(ii) पोलाद

कृती ३: कवितेतील शब्दांचा अर्थ

प्रश्न 1.
खालील कवितेतील शब्दांचा अर्थ लिहा.
(i) दिवस
(ii) हिशोब
(iii) डोईवर
(iv) चंद्र
उत्तर:
(i) दिन
(ii) गणना
(iii) डोक्यावर
(iv) शशी, सुधाकर

कृती ४ : काव्यसौंदर्य

प्रश्न 1.
‘झोतभट्टीत शेकावे पोलाद तसे आयुष्य छान शेकले’ वरील ओळीतून कवी नारायण सुर्वे यांना काय सांगायचे आहे ते तुमच्या शब्दांत लिहा.
उत्तरः
गरिबीत जीवन जगत असलेले नारायण सुर्वे जगाच्या प्रचंड मोठ्या शाळेत शिकत होते. रोजचे नव-नवे दाहक अनुभव, अपमान, उपेक्षा, भूकेचा संघर्ष, कधी प्रेमाचा ओलावा तर कधी तिरस्काराचा फटकारा सहन करत होते. या रोजच्या अनुभवातून ते खूप काही शिकत होते. धडपडत होते, निराश होत होते, पण जगणं निरंतर सुरू होतं. त्यांच्या भोवतीच जग म्हणजे त्यांच्यासाठी एखादया मोठ्या प्रचंड तप्त भट्टीसारखं होतं. जसं भट्टीत पोलाद तप्त होत आणि मजबूत होऊन बाहेर पडतं. अगदी त्याचप्रमाणे कवी नारायण सुर्वे दुःख, दारिद्र्याशी सामना करत जीवन जगण्यासाठी नव्या उमेदीने तयार होत.

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प्रश्न २. दिलेल्या मुद्यांच्या आधारे कवितेसंबंधी पुढील कृती सोडवाः

(१) प्रस्तुत कवितेचे कवी/कवयित्री:
नारायण सुर्वे

(२) प्रस्तुत कवितेचा विषयः
कष्टकरी, गरीब जनतेचा जगण्यासाठीचा संघर्ष दाखवून दिला आहे.

(४) प्रस्तुत कवितेतून मिळणारा संदेश:
माणसाच्या जीवनात सुख आणि दुःख सतत येत असतात. कधी सुखाचे दिवस असतात तर कधी दुःखाचे दिवस येतात. असे असले तरी कोणताही काळ हा कायम राहत नाही. दुःखातून माणूस अनेक गोष्टी शिकतो व उदयाच्या चांगल्या दिवसाची अपेक्षा करत जगत राहतो. माणसाने कवीसारखे आशावादी राहिले पाहिजे. दुःखातही सुख येईल अशी आशा बाळगली पाहिजे म्हणजे आपले जगणे सोपे होते, असाच संदेश या कवितेतून मिळतो…

(५) प्रस्तुत कविता आवडण्याचे वा न आवडण्याचे कारणः
कवी नारायण सुर्वे यांची ‘दोन दिवस’ ही कविता मला खूप आवडली आहे. त्याचे मुख्य कारण म्हणजे भाकरीचा चंद्र शोधण्यात ज्यांची जिंदगी बरबाद होते त्या सगळ्या कष्टकरी, कामगार,श्रमिक, गरीब लोकांचा सोशिकपणा, त्यांचा संयम, त्यांचे दु:ख कवीने सहजपणे वाचकांसमोर मांडले आहे. कवीने वेदनेचा भाव कोणत्याही प्रकारची चीड, संताप किंवा आक्रस्ताळेपणाने न मांडता अत्यंत संयमी आणि सुयोग्य प्रतिकांचा वापर करून मांडले आहे. सर्वस्व असलेले हात, माना उंचावलेले हात, कलम झालेले हात यांसारखी प्रतिके मनाला अंतर्मुख करून जातात. त्यामुळेच ही कविता मनाला भिडते.

(६) प्रस्तुत कवितेतील शब्दांचे अर्थ:
(i) रात्र – रजनी, निशा
(ii) जिंदगी – आयुष्य, जीवन
(iii) बरबाद – नष्ट
(iv) हात – हस्त, कर

स्वाध्याय कृती

प्रश्न 1.
काव्यसौंदर्य

(i) दुःख पेलावे आणि पुन्हा जगावे, या वाक्यातील तुम्हाला जाणवलेला विचार तुमच्या शब्दांत स्पष्ट करा.
उत्तरः
कवी नारायण सुर्वे यांच्या जीवनसंघर्षाचे वर्णन दोन दिवस या कवितेतून केले आहे. कवी म्हणतो की जीवनातल्या दुःखाला न घाबरता न डगमगता सामोरे जावे. कारण दुःख माणसाला खूप काही शिकवून जाते. दु:खावर मात करत असतांना आपल्यातल्या अनेक क्षमतांची अनुभुती येऊन परिस्थितीवर मात करणे, समायोजन करणे, नवीन पर्याय शोधणे या अनेक बाबीतून दु:ख पेलण्याची ताकद माणसात निर्माण होते. म्हणून कवी म्हणतो. जीवनातल्या दुःखाने निराश, हताश न होता सामर्थ्याने विपरित परिस्थितीला सामोरे जावे आणि जीवनात पुन्हा ताकदीने उभे रहावे. हेच जिवनचे खरे सत्य आहे.

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(ii) कवितेत व्यक्त झालेल्या कष्टकऱ्यांच्या जीवनाविषयी तुमच्या भावना लिहा.
उत्तरः
‘दोन दिवस’ या नारायण सुर्वे यांच्या कवितेवरून विविध सेवा क्षेत्रात काम करणाऱ्या अनेक कष्टकऱ्यांचे जीवनचित्र समोर उभे राहते. अनेक ठिकाणी, अनेक प्रकारचे कष्ट आणि अत्यंत श्रमाचे काम करणारे कष्टकरी आपण पाहतो. ऊन, वारा, पाऊस अशा सगळ्या गोष्टी अंगावर झेलून ते सदैव श्रम करत असतात, जीवनासाठी लागणाऱ्या आवश्यक गोष्टी त्यांना उपलब्ध करून दिलेल्या नसतात. जीवनाची हमी नसते. अत्यंत कमी वेतनावर ते प्रचंड मेहनतीचे काम करत असतात. त्यांना जीवन जगणे खूप कठीण जाते. रोज काम मिळण्याची शाश्वती नसते. अशाप्रकारे आपल्या देशात कष्टकऱ्यांचे जीवन अत्यंत कठीण आहे.

(iii) ‘कवितेत व्यक्त झालेले जीवनसत्य’, याबाबत तुमचे विचार स्पष्ट करा.
उत्तरः
माणसाच्या जीवनात सुख आणि दुःख या दोन गोष्टी सदैव असतात. कधी सुखाचे दिवस असतात, तर कधी दुःखाचे, असे असले तरी कोणताही काळ हा कायम राहत नाही. दुःखातून माणूस अनेक गोष्टी शिकतो व उदयाच्या चांगल्या दिवसाची अपेक्षा करत जगत राहतो. माणसाने कवी सारखं आशावादी राहिलं पाहिजे. दुःखातही सुख येईल अशी आशा बाळगली पाहिजे, म्हणजे जगणं सोपं होतं.

दोन दिवस Summary in Marathi

दोन दिवस भावार्थ‌

दोन‌ ‌दिवस‌ ‌वाट‌ ‌पाहण्यात‌ ‌गेले;‌ ‌दोन‌ ‌दुःखात‌ ‌गेले.‌ ‌
हिशोब‌ ‌करतो‌ ‌आहे‌ ‌किती‌ ‌राहिलेत‌ ‌डोईवर‌ ‌उन्हाळे‌‌

कवी‌ ‌नारायण‌ ‌सुर्वे‌ ‌यांचा‌ ‌एकंदरीत‌ ‌जीवन‌ ‌प्रवासच‌ ‌अत्यंत‌ ‌संघर्षमय‌ ‌व‌ ‌खडतर‌ ‌होता.‌ ‌आलेला‌ ‌रोजचा‌ ‌दिवस‌ ‌ते‌ ‌उद्याच्या‌ ‌आशावादावर‌ ‌जगत,‌ ‌म्हणून‌ ‌कवी‌ ‌म्हणतात‌ ‌माझ्या‌ ‌जीवनाचे‌ ‌दोन‌ ‌दिवस‌ ‌उक्या‌ ‌येणाऱ्या‌ ‌चांगल्या‌ ‌दिवसाची‌ ‌वाट‌ ‌पाहण्यात‌ ‌गेले‌ ‌आणि‌ ‌दोन‌ ‌दिवस‌ ‌आहे‌ ‌त्या‌ ‌दुःखात‌ ‌व्यतीत‌ ‌झाले.‌ ‌माझ्या‌ ‌जीवनाचे‌ ‌किती‌ ‌दिवस‌ ‌अजून‌ ‌शिल्लक‌ ‌आहेत‌ ‌याचाच‌ ‌मी‌ ‌हिशोब‌ ‌करतो‌ ‌आहे.‌‌

शेकडो‌ ‌वेळा‌ ‌चंद्र‌ ‌आला;‌ ‌तारे‌ ‌फुलले,‌ ‌रात्र‌ ‌धुंद‌ ‌झाली;‌ ‌भाकरीचा‌ ‌चंद्र‌ ‌शोधण्यातच‌ ‌जिंदगी‌ ‌बरबाद‌ ‌झाली.‌‌

जीवन‌ ‌जगत‌ ‌असताना‌ ‌अवती-भोवती‌ ‌अशा‌ ‌अनेक‌ ‌गोष्टी‌ ‌होत्या‌ ‌की‌ ‌त्या‌ ‌हव्या‌ ‌हव्याशा‌ ‌वाटत‌ ‌होत्या,‌ ‌पण‌ ‌जीवनाचे‌ ‌वास्तव‌ ‌इतके‌ ‌दाहक‌ ‌होते‌ ‌की‌ ‌त्या‌ ‌कधीच‌ ‌मिळू‌ ‌शकत‌ ‌नव्हत्या.‌ ‌त्यांच्या‌ ‌भुकेच्या‌ ‌तीव्र‌ ‌भावनेत‌ ‌आकाशाचा‌ ‌सुंदर‌ ‌चंद्र‌ ‌देखील‌ ‌त्यांना‌ ‌भाकरीसारखा‌ ‌दिसत‌ ‌होता.‌ ‌म्हणूनच‌ ‌कवी‌ ‌म्हणतो‌ ‌की,‌ ‌मी‌ ‌चंद्राच्या‌ ‌सौंदर्याचा‌ ‌आस्वाद‌ ‌तर‌ ‌कधी‌ ‌घेऊ‌ ‌शकलो‌ ‌नाही;‌ ‌पण‌ ‌माझ्या‌ ‌पोटासाठी‌ ‌भाकरीचा‌ ‌चंद्र‌ ‌मिळवण्यातच‌ ‌माझे‌ ‌सगळे‌ ‌आयुष्य‌ ‌बरबाद‌ ‌(नष्ट)‌ ‌झाले.‌‌

हे‌ ‌हात‌ ‌माझे‌ ‌सर्वस्व;‌ ‌दारिद्र्याकडे‌ ‌गहाणच‌ ‌राहिले‌ ‌
कधी‌ ‌माना‌ ‌उंचावलेले,‌ ‌कधी‌ ‌कलम‌ ‌झालेले‌ ‌पाहिले‌‌

कवी‌ ‌म्हणतात,‌ ‌माझे‌ ‌हात‌ ‌माझे‌ ‌सर्वस्व‌ ‌आहेत.‌ ‌या‌ ‌हातांच्या‌ ‌साहाय्याने‌ ‌मी‌ ‌अनेक‌ ‌नवीन‌ ‌चांगल्या‌ ‌गोष्टी‌ ‌करू‌ ‌शकलो‌ ‌असतो;‌ ‌पण‌ ‌मी‌ ‌नेहमी‌ ‌या‌ ‌गरिबीतच‌ ‌अडकून‌ ‌राहिलो.‌ ‌रोजचे‌ ‌जीवन‌ ‌जगण्यासाठीच‌ ‌मी‌ ‌माझ्या‌ ‌हाताचा‌ ‌उपयोग‌ ‌केला.‌ ‌फक्त‌ ‌कष्टच‌ ‌करत‌ ‌राहिले.‌ ‌पण‌ ‌कधी-कधी‌ ‌दारिद्र्यात‌ ‌गुंतलेले‌ ‌हात‌ ‌मी‌ ‌मनात‌ ‌उंचावलेले‌ ‌पाहिले.‌ ‌म्हणजे‌ ‌नवीन‌ ‌काहीतरी‌ ‌करण्याची‌ ‌इच्छा‌ ‌माझ्या‌ ‌मनात‌ ‌निर्माण‌ ‌झाली;‌ ‌पण‌ ‌जसे‌ ‌सभोवतालची‌ ‌परिस्थिती‌ ‌किंवा‌ ‌वास्तवाची‌ ‌जाणीव‌ ‌झाली‌‌ की,‌ ‌असे‌ ‌वाटायचे‌ ‌की‌ ‌माझे‌ ‌हात‌ ‌जणू‌ ‌कोणीतरी‌ ‌छाटून‌ ‌टाकले‌ ‌आहेत.‌ ‌माझ्या‌ ‌सगळ्या‌ ‌आशा,‌ ‌उमेदी‌ ‌संपून‌ ‌जातात.‌‌

हरघडी‌ ‌अश्रू‌ ‌वाळविले‌ ‌नाहीत;‌ ‌पण‌ ‌असेही‌ ‌क्षण‌ ‌आले‌
‌तेव्हा‌ ‌अश्रूच‌ ‌मित्र‌ ‌होऊन‌ ‌साहाय्यास‌ ‌धावून‌ ‌आले.‌‌

कवी‌ ‌नारायण‌ ‌सुर्वे‌ ‌यांना‌ ‌आपल्या‌ ‌जीवनात‌ ‌सतत‌ ‌हालअपेष्टा,‌ ‌अपमान,‌ ‌उपेक्षा‌ ‌यांचा‌ ‌सामना‌ ‌करावा‌ ‌लागला.‌ ‌परिस्थितीशी‌ ‌सतत‌ ‌संघर्ष‌ ‌करावा‌ ‌लागला.‌ ‌अशा‌ ‌या‌ ‌जीवनसंघर्षातून‌ ‌जात‌ ‌असताना‌ ‌कधी‌ ‌कधी‌ ‌त्यांना‌ ‌खूप‌ ‌रडावेसे‌ ‌वाटले‌ ‌पण‌ ‌त्यांनी‌ ‌आपले‌ ‌मन‌ ‌घट्ट‌ ‌केले.‌ ‌डोळयांतून‌ ‌अश्रू‌ ‌वाहू‌ ‌दिले‌ ‌नाही;‌ ‌पण‌ ‌कधी‌ ‌कधी‌ ‌असेही‌ ‌प्रसंग‌ ‌आले‌ ‌की,‌ ‌मनात‌ ‌दडवलेले‌ ‌दुःख,‌ ‌वेदना‌ ‌यांना‌ ‌मोकळी‌ ‌वाट‌ ‌करून‌ ‌देण्यासाठी‌ ‌अश्रूच‌ ‌मित्रासारखे‌ ‌मदतीला‌ ‌धावून‌ ‌आले.‌ ‌म्हणजेच‌ ‌काही‌ ‌प्रसंगी‌ ‌आपल्या‌ ‌मनातले‌ ‌दुःख‌ ‌इतरांजवळ‌ ‌व्यक्त‌ ‌न‌ ‌करता‌ ‌ते‌ ‌फक्त‌ ‌मनसोक्त‌ ‌रडले.‌ ‌रडल्यामुळे‌ ‌त्यांचे‌ ‌दु:ख‌ ‌हलके‌ ‌झाले.‌ ‌त्यांच्या‌ ‌दुःखात‌ ‌त्यांना‌ ‌त्यांच्याच‌ ‌अणूंनी‌ ‌एखाद्या‌ ‌मित्राप्रमाणे‌ ‌साथ‌ ‌दिली.‌‌

दुनियेचा‌ ‌विचार‌ ‌हरघडी‌ ‌केला,‌ ‌अगा‌ ‌जगमय‌ ‌झालो‌ ‌
दुःख‌ ‌पेलावे‌ ‌कसे,‌ ‌पुन्हा‌ ‌जगावे‌ ‌कसे,‌ ‌याच‌ ‌शाळेत‌ ‌शिकलो‌‌

कवी‌ ‌नारायण‌ ‌सुर्वे‌ ‌जिथे‌ ‌राहत‌ ‌होते‌ ‌तिथे‌ ‌त्यांच्या‌ ‌आजुबाजूला‌ ‌सगळी‌ ‌गोरगरिबांचीच‌ ‌वस्ती‌ ‌होती.‌ ‌सगळ्यांचे‌ ‌जीवन‌ ‌हालअपेष्टांनी‌ ‌भरलेले‌ ‌होते.‌ ‌कवी‌ ‌नारायण‌ ‌सुर्वे‌ ‌यांना‌ ‌आजुबाजूच्या‌ ‌समाजबांधवांचे‌ ‌दुःख‌ ‌पाहवत‌ ‌नव्हते.‌ ‌स्वतः‌ ‌दुःखी-कष्टी‌ ‌असूनही‌ ‌त्यांनी‌ ‌नेहमी‌ ‌इतरांच्या‌ ‌दुःखाचा‌ ‌विचार‌ ‌केला.‌ ‌प्रत्येक‌ ‌क्षणी‌ ‌त्यांनी‌ ‌दुनियेचा‌ ‌विचार‌ ‌केला.‌ ‌मान-अपमान,‌ ‌बरे-वाईट,‌ ‌सुख-दुःख‌ ‌सगळं‌ ‌सगळं‌ ‌पचवून‌ ‌ते‌ ‌संपूर्ण‌ ‌जगाशी‌ ‌एकरूप‌ ‌झाले.‌ ‌जगातल्या‌ ‌अनेक‌ ‌बऱ्या-वाईट‌ ‌घटनांशी‌ ‌ते‌ ‌समरूप‌ ‌झाले.‌ ‌जगाच्या‌ ‌या‌ ‌शाळेत‌ ‌दु:ख‌ ‌कसे‌ ‌सहन‌ ‌करावे,‌ ‌दुःखावर‌ ‌मात‌ ‌करून‌ ‌पुन्हा‌ ‌नव्या‌ ‌उमेदीने‌ ‌जीवनाला‌ ‌कसे‌ ‌सामोरे‌ ‌जावे.‌ ‌हसत‌ ‌हसत‌ ‌कसे‌ ‌जगावे‌ ‌ते‌ ‌याच‌ ‌जगाच्या‌ ‌शाळेने‌ ‌त्यांना‌ ‌शिकवले.‌ ‌म्हणजेच‌ ‌या‌ ‌जगानेच‌ ‌त्यांना‌ ‌दु:खही‌ ‌दिले‌ ‌आणि‌ ‌या‌ ‌जगानेच‌ ‌दु:ख‌ ‌विसरून‌ ‌आनंदाने‌ ‌कसे‌ ‌जगावे‌ ‌हे‌ ‌देखील‌ ‌शिकवले.‌‌

झोतभट्टीत‌ ‌शेकावे‌ ‌पोलाद‌ ‌तसे‌ ‌आयुष्य‌ ‌छान‌ ‌शेकले‌
‌दोन‌ ‌दिवस‌ ‌वाट‌ ‌पाहण्यात‌ ‌गेले;‌ ‌दोन‌ ‌दुःखात‌ ‌गेले.‌‌

कवी‌ ‌परळच्या‌ ‌चाळीत‌ ‌वाढले.‌ ‌कमालीचे‌ ‌दारिद्र्य,‌ ‌अपरंपार‌ ‌काबाडकष्ट‌ ‌आणि‌ ‌जगण्यासाठी‌ ‌केलेला‌ ‌संघर्ष‌ ‌यातून‌ ‌त्यांचे‌ ‌आयुष्य‌ ‌चांगलेच‌ ‌शेकून‌ ‌निघाले.‌ ‌म्हणून,‌ ‌कवी‌ ‌म्हणतो‌ ‌एखादया‌ ‌भट्टीत‌ ‌पोलाद‌ ‌जसे‌ ‌तापून‌ ‌निघते‌ ‌त्या‌ ‌प्रमाणे‌ ‌दुनियेच्या‌ ‌दाहक‌ ‌अनुभवातून‌ ‌माझे‌ ‌आयुष्यदेखील‌ ‌दुःख‌ ‌झेलून‌ ‌जगण्यास‌ ‌सिद्ध‌ ‌व‌ ‌समर्थ‌ ‌झाले‌ ‌आहे.‌ ‌माझे‌ ‌दोन‌ ‌दिवस‌ ‌जगण्याच्या‌ ‌नव्या‌ ‌उमेदीची‌ ‌वाट‌ ‌पाहण्यात‌ ‌गेले‌ ‌आणि‌ ‌दोन‌ ‌दिवस‌ ‌आहे‌ ‌त्या‌ ‌दुःखात‌ ‌गेले,‌ ‌जणू‌ ‌दुःख‌ ‌दुःखात‌ ‌विरून‌ ‌गेले.‌‌

दोन दिवस शब्दार्थ‌ ‌

  • डोईवर‌ -‌ ‌डोक्यावर‌ ‌-‌ ‌(on‌ ‌the‌ ‌head)‌ ‌
  • जिंदगी‌ ‌-‌ ‌जीवन,‌ ‌आयुष्य‌ ‌-‌ ‌(life)‌ ‌
  • बरबाद‌ ‌-‌ ‌नष्ट‌‌ – (destroy)‌ ‌
  • हरघडी‌ ‌-‌ ‌प्रत्येक‌ ‌वेळी‌ ‌-‌ ‌(every‌ ‌time)‌ ‌
  • पेलावे‌ ‌-‌ ‌झेलावे,‌ ‌सहन‌ ‌करावे‌ ‌-‌ ‌(to‌ ‌bear)
  • आयुष्य‌ ‌-‌ ‌जीवन‌ ‌- (life)‌ ‌
  • साहाय्यास‌ ‌-‌ ‌मदतीस‌ ‌- (to‌ ‌help)‌ ‌
  • शेकडोवेळा-‌ ‌अनेक‌ ‌वेळा‌ ‌- (many‌ ‌times)‌ ‌
  • दारिद्र्य‌ ‌-‌ ‌गरिबी‌‌ – (poverty)

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Aukshan Class 10 Marathi Chapter 9 Question Answer Maharashtra Board

Class 10th Marathi Aksharbharati Chapter 9 औक्षण (कविता) Question Answer Maharashtra Board

Balbharti Maharashtra State Board Class 10 Marathi Solutions Aksharbharati Chapter 9 औक्षण (कविता) Notes, Textbook Exercise Important Questions and Answers.

Std 10 Marathi Chapter 9 Question Answer

Marathi Aksharbharati Std 10 Digest Chapter 9 औक्षण Textbook Questions and Answers

प्रश्न 1.
खालील प्रश्नांची प्रत्येकी एका वाक्यात उत्तर: लिहा.
(अ) कष्टाचे सामर्थ्य अपुरे केव्हा वाटते?
उत्तरः
जेव्हा मुठीमध्ये द्रव्य नसते तसेच जेव्हा शिरेमध्ये रक्त नसते, तेव्हा कष्टाचे सामर्थ्य अपुरे वाटते.

(आ) सैनिकाचे पाऊल जिद्दीचे का वाटते?
उत्तरः
धडाडत्या तोफांतून, धुरांच्या कल्लोळातून, घोंघावणाऱ्या बंबाऱ्याचा सामना करून सैनिक पुढे जातो म्हणून त्याचे पाऊल जिद्दीचे वाटते.

(इ) डोळे भरून पाहावे असे दृश्य कोणते?
उत्तरः
जवानाची विजयाची दौड हे डोळे भरून पहावे असे दृश्य आहे.

प्रश्न 2.
योग्य पर्याय निवडा.

(अ) सैनिकाचे औक्षण केले जाते ……………………………
(१) भरलेल्या डोळ्यांनी/भरलेल्या अंत:करणाने
(२) डोळ्यांतील आसवांच्या ज्योतींनी
(३) तबकातील निरांजनाने
(४) भाकरीच्या तुकड्याने
उत्तरः
सैनिकाचे औक्षण कसे केले जाते डोळ्यातील आसवांच्या ज्योतींनी.

(आ) कवितेतील ‘दीनदबळे’ म्हणजे ……………………………
(१) कष्टाचे, पैसे नसलेले.
(२) सैनिकाबरोबर लढणारे.
(३) शारीरिकदृष्ट्या सक्षम नसलेले.
(४) सैनिकांच्या कार्याचा अभिमान बाळगणारे देशवासीय.
उत्तर:
कवितेतील ‘दीन दुबळे’ म्हणजे सैनिकांच्या कार्याचा अभिमान बाळगणारे देशवासीय.

Maharashtra Board Class 10 Marathi Aksharbharati Solutions Chapter 9 औक्षण

प्रश्न 3.
काव्यसौंदर्य.
(अ) खालील ओळींचे रसग्रहण करा. ‘अशा असंख्य ज्योतींची तुझ्यामागून राखण; दीनदुबळ्यांचे असें तुला एकच औक्षण.’
उत्तरः
‘औक्षण’ या कवितेत दीनदुबळे याचा मार्मिक अर्थ कवयित्री इंदिरा संत यांनी सांगितला आहे. आम्हा भारतीयांचे आपल्या भारत देशावर अत्यंत प्रेम आहे. आमच्यापैकी काहीजण असेही आहेत की, ज्यांच्याकडे पैसा – अडका, संपत्ती कदाचित नसेलही, तसेच त्यांच्या शिरेमध्ये सळसळणारे रक्तही नसेल, पण तरीही सीमेवर लढाईसाठी जाणाऱ्या जवानांबद्दल त्यांच्या प्रत्येकाच्या मनात अभिमान आहे. लढाईसाठी जाणाऱ्या सैनिकांचे आपल्या डोळ्यांतील ज्योतींनी ते औक्षण करत आहेत. आम्ही सारे दीनदुबळे भारतीय लोक तुझे असे औक्षण करत आहोत. येथे दीनदुबळे म्हणजे कमजोर किंवा पैसे नसलेले गरीब असा अर्थ नसून ‘दीनदुबळे’ म्हणजे ज्यांच्यामध्ये सैनिकांसारखे सामर्थ्य नाही. रक्तामध्ये उमेद नाही पण ‘सैनिकांच्या कार्याचा अभिमान आहे, अशी जनता’ असा अर्थ कवयित्रीला अभिप्रेत आहे.

(आ) ‘सैनिक सीमेवर तैनात असतो, म्हणून आपण सुरक्षित राहतो’, या विधानातील भाव स्पष्ट करा.
उत्तरः
देशाच्या सीमेचे रक्षण करणारा सैनिक नेहमीच देशासाठी भूषणास्पद असतो. त्याच्या देशरक्षणाच्या कर्तव्यामुळे देशातील नागरिक सुखाची झोप घेऊ शकतात. अन्यथा परकीय आक्रमण, लढाई या संकटांमुळे आपली सुरक्षितता धोक्यात आली असती. ऊन, पाऊस, थंडी याला सामोरे जाऊन ‘देशरक्षण’ हेच त्यांचे ध्येय असते. जीवावर उदार होऊन ते सीमेवर न डगमगता उभे असतात. त्यांचे कुटुंब, मुले-बाळे यांना ते महिनोंमहिने भेटत नाहीत. देशरक्षणाच्या कर्तव्यासाठी आप्त स्वकीयांनाही त्यांना भेटता येत नाही. खाजगी आयुष्याचा, सुखांचा संपूर्ण त्याग करुन केवळ सीमेवर हे जवान देशरक्षणासाठी सज्ज असतात.

(इ) कवितेच्या संदर्भात ‘दीनदुबळे’ याचा कवयित्रीला अभिप्रेत असलेला अर्थ स्पष्ट करा.
उत्तरः
‘औक्षण’ या कवितेत दीनदुबळे याचा मार्मिक अर्थ कवयित्री इंदिरा संत यांनी सांगितला आहे. आम्हा भारतीयांचे आपल्या भारत देशावर अत्यंत प्रेम आहे. आमच्यापैकी काहीजण असेही आहेत की, ज्यांच्याकडे पैसा – अडका, संपत्ती कदाचित नसेलही, तसेच त्यांच्या शिरेमध्ये सळसळणारे रक्तही नसेल, पण तरीही सीमेवर लढाईसाठी जाणाऱ्या जवानांबद्दल त्यांच्या प्रत्येकाच्या मनात अभिमान आहे. लढाईसाठी जाणाऱ्या सैनिकांचे आपल्या डोळ्यांतील ज्योतींनी ते औक्षण करत आहेत. आम्ही सारे दीनदुबळे भारतीय लोक तुझे असे औक्षण करत आहोत. येथे दीनदुबळे म्हणजे कमजोर किंवा पैसे नसलेले गरीब असा अर्थ नसून ‘दीनदुबळे’ म्हणजे ज्यांच्यामध्ये सैनिकांसारखे सामर्थ्य नाही. रक्तामध्ये उमेद नाही पण ‘सैनिकांच्या कार्याचा अभिमान आहे, अशी जनता’ असा अर्थ कवयित्रीला अभिप्रेत आहे.

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(ई) ‘देशसेवा हीच ईश्वरसेवा’ असे समजून कार्य करणाऱ्या सैनिकांसाठी तुम्हाला काय करावेसे वाटते ते लिहा.
उत्तरः
देश हाच देव समजून सैनिक देशाची सेवा करीत असतात. त्यांचे हे काम अतुलनीय आहे. अनेक महिने ते आपले घरदार, कुटुंब सोडून सीमेवर लढत असतात. ऊन, थंडी, पावसाची तमा न बाळगता देशासाठी प्राण अर्पण करायला तयार होतात. अशा वेळेस आम्ही त्यांच्या या गुणांचे कौतुक भेटकार्ड देऊन करु शकतो. १५ ऑगस्ट या स्वातंत्र्यदिनी त्यांना शुभेच्छा कार्ड पाठवू शकतो. रक्षाबंधनच्या दिवशी त्यांना राखी पाठवू शकतो. मकर संक्रांतीला सीमेवरच्या जवानांसाठी तीळगुळ पाठवून स्नेह प्रदर्शित करू शकतो. त्यांच्या शहरातील वा गावातील कुटुंबाकडे स्थळभेट देऊन त्यांच्या कुटुंबाची ख्याली खुशाली विचारु शकतो, त्यांच्याशी प्रेमाचे अतुट नाते जोडू शकतो.

Marathi Akshar Bharati Class 10 Textbook Solutions Chapter 9 औक्षण Additional Important Questions and Answers

प्रश्न १. खालील कवितेच्या आधारे दिलेल्या सूचनेनुसार कृती करा.
कृती १ : आकलन कृती

प्रश्न 1.
आकृतिबंध पूर्ण करा.
Maharashtra Board Class 10 Marathi Aksharbharati Solutions Chapter 9 औक्षण 1

प्रश्न 2.
खालील प्रश्नांची उत्तर एका वाक्यात लिहा.

(i) कवयित्रीकडे कोणते सामर्थ्य नाही?
उत्तर:
कवयित्रीकडे कष्टाचे सामर्थ्य नाही.

(ii) कशापुढे जीवही लहान आहे?
उत्तर:
जवानाच्या शौर्यगाथेपुढे जीवही लहान आहे.

(iii) पुढे कशाचे कल्लोळ आहेत?
उत्तरः
पुढे धुराचे कल्लोळ आहेत.

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(iv) धडाडत्या तोफांतून काय पुढे पडत आहे?
उत्तरः
धडाडत्या तोफांतून जिद्दीचे पाऊल पुढे पडत आहे.

(v) जवानांचे रक्षण कसे होणार आहे?
उत्तर:
जवानांचे रक्षण असंख्य ज्योतींनी होणार आहे.

प्रश्न 3.
‘दीनदुबळयांचे’ उत्तर येईल असा प्रश्न तयार करा.
उत्तरः
जवानाला कोणाचे औक्षण’ आहे, असे कवयित्री सांगते?

कृती २ : आकलन कृती

प्रश्न 1.
समान अर्थाच्या काव्यपंक्ती शोधून लिहा.

(i) हातात द्रव्यसंपत्ती, रक्त वा बल नाही.
(ii) कष्टाचे सामर्थ्यही अंगी नाही, म्हणून काय करावे सुचत नाही.
उत्तर:
(i) नाही मुठीमध्ये द्रव्य, नाही शिरेमध्ये रक्त.
(ii) काय करावे कळेना, नाही कष्टाचे सामर्थ्य.

प्रश्न 2.
कंसातील योग्य शब्द वापरुन रिकाम्या जागा भरा.
(i) नाही कष्टाचे ………………………. (मोल, सामर्थ्य, द्रव्य)
(ii) तुझ्या शौर्यगाथेपुढे, त्याची केवढीशी ………………………. (मान, किंमत, शान)
(iii) ………………………. किती हा लहान. (जीव, मुठ, शान)
(iv) नाही ………………………. द्रव्य. (हातात, मुठीमध्ये, पेटीत)
उत्तर:
(i) सामर्थ्य
(ii) शान
(iii) जीव
(iv) मुठीमध्ये

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प्रश्न 3.
जोड्या जुळवा.
Maharashtra Board Class 10 Marathi Aksharbharati Solutions Chapter 9 औक्षण 2
उत्तर:
(i – ड),
(ii – क),
(iii – अ),
(iv – ब)

प्रश्न 4.
सहसंबंध लिहा.
(6) घोंघावे : बंबारा : : धडाडत्या : ……………………….
(ii) मुठीमधे : द्रव्य : : शिरेमध्ये : ……………………….
(iii) ज्योत : आसवांची : : दौड : ……………………….
उत्तर:
(i) तोफा
(ii) रक्त
(iii) विजयाची

प्रश्न 5.
विशेषण विशेष्य जोड्या जुळवा.
Maharashtra Board Class 10 Marathi Aksharbharati Solutions Chapter 9 औक्षण 3
उत्तर:
(i- ब),
(ii – अ),
(iii – ड),
(iv – क)

कृती ३: कवितेतील शब्दांचा अर्थ

प्रश्न 1.
खालील कवितेतील शब्दांचा अर्थ लिहा.
(i) द्रव्य
(ii) शिर
(iii) कष्ट
(iv) सामर्थ्य
उत्तर:
(i) पैसा, धन
(ii) नस
(iii) मेहनत
(iv) बळ, ताकद

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कृती ४ : काव्यसौंदर्य

खालील काव्यपंक्तीतील आशयसौंदर्य स्पष्ट करा.

प्रश्न 1.
जीव ओवाळावा तरी
जीव किती हा लहान;
तुझ्या शौर्यगाथेपुढे
त्याची केवढीशी शान;
उत्तरः
कवयित्रीला जवानाबद्दल नितांत आदर, प्रेम, जिव्हाळा आहे. त्याचे औक्षण करत असताना कवयित्री म्हणतात, या जवानांचे कार्य इतके मोठे आहे की, माझा जीव जरी ओवाळून टाकला तरी तो जवानांच्या शौर्यगाथेपुढे, त्यांच्या पराक्रमापुढे, त्यांच्या धैर्यापुढे, त्यांच्या कर्तव्यापुढे लहान आहे. तिचे आयुष्य त्याच्या शौर्यापुढे अगदी कवडीमोल (लहान) आहे. जवानाची शौर्यगाथा इतकी महान आहे की त्या शौर्यगाथेपुढे आपल्या सामान्य जीवाची काय शान असणार? असे कवयित्रीला वाटते.

प्रश्न 2.
वर घोंघावे बंबारा,
पुढे कल्लोळ धुराचे
धडाडत्या तोफांतून
तुझें पाऊल जिद्दीचे;
उत्तरः
सीमेवर लढायला जाण्यासाठी सुसज्ज झालेल्या जवानाला त्याच्या देशवासीयांकडून औक्षण केले जात आहे. याचे इंदिरा संत यांनी अत्यंत ह्रदयद्रावक वर्णन केले आहे.

युद्धभूमीत शस्त्रांचा, तोफांचा भडिमार आहे. अशा वेळेस जवानाच्या मागेपुढे,खाली-वर सर्वत्र बंदुकीच्या गोळ्या झाडल्या जात ओहत. तोफा डागल्या जात आहेत. त्याचे कर्कश आवाज आहेत. दारूगोळ्यांचा स्फोट व धुराचे कल्लोळ आकाशात दिसत आहेत. सर्वत्र भीतीचे, युद्धाचे, आक्रमकतेचे सावट आहे. डोक्यावर मृत्यूची तलवारच आहे. या परिस्थितीतही न डगमगता हा जवान धैर्याने पुढे जात आहे. देशासाठी लढण्याची त्याची जिद्द प्रशंसनीय आहे.

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प्रश्न 3.
तुझी विजयाची दौड
डोळेभरून पहावी;
डोळ्यांतील आसवांची
ज्योत ज्योत पाजळावी.
उत्तरः
प्रसिद्ध कवयित्री इंदिरा संत यांनी ‘औक्षण’ या कवितेत सीमेवर लढण्यासाठी सज्ज झालेल्या जवानास ‘औक्षण’ करण्याची वेगळीच पद्धत सुचवली आहे.

युद्धभूमीतील बंदूकांना, तोफांना धैर्याने सामोरा जाणारा जवान पराक्रमी व जिद्दीचे पाऊल टाकणारा आहे. प्राणपणाने लढून तो विजयी होणार यात शंका नाही. ती विजयाची दौड कवयित्रीला आपल्या डोळ्यांनी पहायची आहे. डोळ्यातील आसवांनी अनेक ज्योती लावाव्या व त्याचे औक्षण करावे असे कवयित्रिला वाटते.

प्रश्न २. दिलेल्या मुद्द्यांच्या आधारे कवितेसंबंधी पुढील कृतीसोडवा.

(१) प्रस्तुत कवितेचे कवी / कवयित्री:
इंदिरा संत

(२) प्रस्तुत कवितेचा विषयः
सीमेवर लढायला जाण्यासाठी सज्ज झालेल्या जवानाचे औक्षण करताना मनात येणाऱ्या भावनांचे वर्णन केले आहे.

(३) प्रस्तुत कवितेतील दिलेल्या दोन ओळींचा सरळ अर्थ:
नाही मुठीमध्ये द्रव्य
नाही शिरेमध्ये रक्त,
काय करावे कळेना
नाही कष्टाचे सामर्थ्य

कवयित्रिला खंत आहे की तिच्याकडे धनदौलत नाही. देशाला समर्पित करण्याचे बळ नाही. अंगात, शिरेत रक्त नाही. शारीरिक, आर्थिक सामर्थ्य नाही, पण हा जवान शारीरिक आणि मानसिक सामर्थ्यासह देशाच्या सेवेस जात आहे, याचा तिला सार्थ अभिमान आहे.

(४) प्रस्तुत कवितेतून मिळणारा संदेशः
देशाच्या सीमेचे रक्षण करणारे सैनिक नेहमीच देशासाठी भूषण असतात. जीवावर उदार होऊन ते सीमेवर न डगमगता उभे असतात. त्यांचे कुटुंब, मुले-बाळे यांना ते महिनोंमहिने भेटतही नाहीत. त्यांच्या देशरक्षणाच्या कर्तव्यामुळे देशातील नागरिक सुखाची झोप घेऊ शकतात. सण, उत्सव साजरे करू शकतात. अशा या सैनिकांच्या पाठिशी आपण भक्कपणे उभे राहिले पाहिजे. तसेच त्यांचा आदर, कौतुक करून त्यांच्या कार्याचा आपण नेहमीच अभिमान बाळगला पाहिजे, असा संदेश आपल्याला मिळतो.

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(५) प्रस्तुत कविता आवडण्याची वा न आवडण्याची कारणः
‘औक्षण’ ही ‘इंदिरा संत’ यांची कविता मला खूप आवडली आहे. त्याचे मुख्य कारण म्हणजे कवयित्रीचे चित्रदर्शी वर्णन. त्यांच्या शब्दांमधून युद्धभूमीवरचे चित्र हुबेहूब डोळ्यांसमोर उभे राहते. युद्धभूमीवर शत्रूशी लढायला जाण्यासाठी सज्ज झालेल्या आपल्या जवानाचे औक्षण करताना कवयित्रीच्या मनात आलेल्या भावना या केवळ तिच्या भावना नाहीत तर त्या प्रत्येक भारतीयाच्या भावना आहेत. ‘डोळ्यातील आसवे’, ‘असंख्य ज्योती’ अशा प्रतिमा वापरून अपेक्षीत परिणाम त्यांनी साधला आहे.

(६) प्रस्तुत कवितेतील शब्दांचे अर्थ:
(i) जीव – प्राण
(ii) विजय – जीत, यश
(iii) दौड – धाव
(iv) डोळे – नयन

स्वाध्याय कृती

काव्यसौंदर्य

(i) सैनिक सीमेवर तैनात असतो, म्हणून आपण सुरक्षित राहतो, या विधानातील भाव स्पष्ट करा.
उत्तरः
देशाच्या सीमेचे रक्षण करणारा सैनिक नेहमीच देशासाठी भूषणास्पद असतो. त्याच्या देशरक्षणाच्या कर्तव्यामुळे देशातील नागरिक सुखाची झोप घेऊ शकतात. अन्यथा परकीय आक्रमण, लढाई या संकटांमुळे आपली सुरक्षितता धोक्यात आली असती. ऊन, पाऊस, थंडी याला सामोरे जाऊन ‘देशरक्षण’ हेच त्यांचे ध्येय असते. जीवावर उदार होऊन ते सीमेवर न डगमगता उभे असतात. त्यांचे कुटुंब, मुले-बाळे यांना ते महिनोंमहिने भेटत नाहीत. देशरक्षणाच्या कर्तव्यासाठी आप्त स्वकीयांनाही त्यांना भेटता येत नाही. खाजगी आयुष्याचा, सुखांचा संपूर्ण त्याग करुन केवळ सीमेवर हे जवान देशरक्षणासाठी सज्ज असतात.

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(ii) कवितेच्या संदर्भात ‘दीनदुबळे’ याचा कवयित्रीला अभिप्रेत असलेला अर्थ स्पष्ट करा.
उत्तरः
‘औक्षण’ या कवितेत दीनदुबळे याचा मार्मिक अर्थ कवयित्री इंदिरा संत यांनी सांगितला आहे. आम्हा भारतीयांचे आपल्या भारत देशावर अत्यंत प्रेम आहे. आमच्यापैकी काहीजण असेही आहेत की, ज्यांच्याकडे पैसा – अडका, संपत्ती कदाचित नसेलही, तसेच त्यांच्या शिरेमध्ये सळसळणारे रक्तही नसेल, पण तरीही सीमेवर लढाईसाठी जाणाऱ्या जवानांबद्दल त्यांच्या प्रत्येकाच्या मनात अभिमान आहे. लढाईसाठी जाणाऱ्या सैनिकांचे आपल्या डोळ्यांतील ज्योतींनी ते औक्षण करत आहेत. आम्ही सारे दीनदुबळे भारतीय लोक तुझे असे औक्षण करत आहोत. येथे दीनदुबळे म्हणजे कमजोर किंवा पैसे नसलेले गरीब असा अर्थ नसून ‘दीनदुबळे’ म्हणजे ज्यांच्यामध्ये सैनिकांसारखे सामर्थ्य नाही. रक्तामध्ये उमेद नाही पण ‘सैनिकांच्या कार्याचा अभिमान आहे, अशी जनता’ असा अर्थ कवयित्रीला अभिप्रेत आहे.

(iii) देशसेवा हीच ईश्वरसेवा असे समजून कार्य करणाऱ्या सैनिकासाठी तुम्ही काय करू शकता ते लिहा.
उत्तरः
देश हाच देव समजून सैनिक देशाची सेवा करीत असतात. त्यांचे हे काम अतुलनीय आहे. अनेक महिने ते आपले घरदार, कुटुंब सोडून सीमेवर लढत असतात. ऊन, थंडी, पावसाची तमा न बाळगता देशासाठी प्राण अर्पण करायला तयार होतात. अशा वेळेस आम्ही त्यांच्या या गुणांचे कौतुक भेटकार्ड देऊन करु शकतो. १५ ऑगस्ट या स्वातंत्र्यदिनी त्यांना शुभेच्छा कार्ड पाठवू शकतो. रक्षाबंधनच्या दिवशी त्यांना राखी पाठवू शकतो. मकर संक्रांतीला सीमेवरच्या जवानांसाठी तीळगुळ पाठवून स्नेह प्रदर्शित करू शकतो. त्यांच्या शहरातील वा गावातील कुटुंबाकडे स्थळभेट देऊन त्यांच्या कुटुंबाची ख्याली खुशाली विचारु शकतो, त्यांच्याशी प्रेमाचे अतुट नाते जोडू शकतो.

औक्षण Summary in Marathi

औक्षण काव्यपरिचय‌‌
‘औक्षण’‌ ‌या‌ ‌कवितेत‌ ‌कवयित्री‌ ‌’इंदिरा‌ ‌संत’‌ ‌यांनी‌ ‌सीमेवर‌ ‌लढायला‌ ‌जाण्यासाठी‌ ‌सुसज्ज‌ ‌झालेल्या‌ ‌जवानाला‌ ‌औक्षण‌ ‌करताना‌ ‌मनात‌ ‌येणाऱ्या‌ ‌विविध‌ ‌भावनांचे‌ ‌वर्णन‌ ‌केले‌ ‌आहे.‌‌

औक्षण Summary in English

In‌ ‌this‌ ‌poem,‌ ‌the‌ ‌poetess‌ ‌wishes‌ ‌to‌ ‌bless‌ ‌a‌ ‌soldier‌ ‌who‌ ‌is‌ ‌ready‌ ‌for‌ ‌battle.‌ ‌In‌ ‌the‌ ‌act‌ ‌of‌ ‌blessing,‌ ‌she‌ ‌goes‌ ‌through‌ ‌a‌ ‌lot‌ ‌of‌ ‌emotions‌ ‌that‌ ‌are‌ ‌beautifully‌ ‌captured‌ ‌in‌ ‌this‌ ‌poem‌ ‌by‌ ‌Indira‌ ‌Sant.‌‌

औक्षण भावार्थ‌‌

नाही‌ ‌मुठीमध्ये‌ ‌द्रव्य‌‌
नाही‌ ‌शिरेमध्ये‌ ‌रक्त,‌
‌काय‌ ‌करावे‌ ‌कळेना‌‌
नाही‌ ‌कष्टाचे‌ ‌सामर्थ्य

‌देशाच्या‌ ‌रक्षणासाठी‌ ‌सीमेवर‌ ‌अहोरात्र‌ ‌आपले‌ ‌जवान‌ ‌शत्रूशी‌ ‌दोन‌ ‌हात‌ ‌करत‌ ‌असतात.‌ ‌आपल्या‌ ‌भारतमातेचे‌ ‌रक्षण‌ ‌करतात.‌ ‌त्यामुळेच‌ ‌आपण‌ ‌सर्व‌ ‌आनंदाने,‌ ‌सुखाने‌ ‌जगत‌ ‌असतो.‌ ‌सण,‌ ‌उत्सव‌ ‌साजरे‌ ‌करत‌ ‌असतो,‌ ‌आपणांस‌ ‌त्यांचा‌ ‌नेहमीच‌ ‌अभिमान‌ ‌वाटत‌ ‌असतो.‌ ‌त्याचप्रमाणे‌ ‌कवयित्री‌ ‌इंदिरा‌ ‌संत‌ ‌या‌ ‌सुद्धा‌ ‌जवानांवर‌ ‌खूप‌ ‌प्रेम‌ ‌करतात.‌ ‌जवानांप्रती‌ ‌त्यांच्या‌ ‌मनात‌ ‌जिव्हाळा,‌ ‌प्रेम,‌ ‌आदर‌ ‌आहे.‌ ‌घरातून‌ ‌सीमेवर‌ ‌लढण्यासाठी‌ ‌जायला‌ ‌निघालेल्या‌ ‌जवानाला‌ ‌त्या‌ ‌ओवाळत‌ ‌आहेत.‌ ‌त्याला‌ ‌ओवाळणी‌ ‌करत‌ ‌असताना‌ ‌कवयित्रिच्या‌ ‌मनात‌ ‌विविध‌ ‌भावना‌ ‌निर्माण‌ ‌होतात.‌ ‌त्या‌ ‌म्हणतात,‌ ‌मी‌ ‌ओवाळणी‌ ‌करत‌ ‌आहे;‌ ‌पण‌ ‌माझ्याकडे‌ ‌संपत्ती,‌ ‌पैसे‌ ‌नाहीत,‌ ‌मी‌ ‌श्रीमंत‌ ‌नाही.माझ्या‌ ‌शरीरात‌ ‌लढण्यासाठी‌ ‌शिरेमध्ये‌ ‌सळसळणारे‌ ‌रक्तही‌ ‌नाही.‌ ‌त्यामुळे‌ ‌ओवाळणी‌ ‌कशाप्रकारे‌ ‌करावी‌ ‌हे‌ ‌कवयित्रीला‌ ‌कळेनासे‌ ‌झाले‌ ‌आहे.‌

‌जीव‌ ‌ओवाळावा‌ ‌तरी‌‌
जीव‌ ‌किती‌ ‌हा‌ ‌लहान‌ ‌
तुझ्या‌ ‌शौर्यगाथेपुढे‌
त्याची‌ ‌केवढीशी‌ ‌शान;‌‌

कवयित्रीला‌ ‌जवानाबद्दल‌ ‌नितांत‌ ‌आदर,‌ ‌प्रेम,‌ ‌जिव्हाळा‌ ‌आहे.‌ ‌त्याचे‌ ‌औक्षण‌ ‌करत‌ ‌असताना‌ ‌कवयित्री‌ ‌म्हणतात,‌ ‌या‌ ‌जवानांचे‌ ‌कार्य‌ ‌इतके‌ ‌मोठे‌ ‌आहे‌ ‌की,‌ ‌माझा‌ ‌जीव‌ ‌जरी‌ ‌ओवाळून‌ ‌टाकला‌ ‌तरी‌ ‌तो‌ ‌जवानांच्या‌ ‌शौर्यगाथेपुढे,‌ ‌त्यांच्या‌ ‌पराक्रमापुढे‌ ‌त्यांच्या‌ ‌धैर्यापुढे,‌ ‌त्यांच्या‌ ‌कर्तृत्वापुढे‌ ‌लहान‌ ‌आहे.‌ ‌तिचे‌ ‌आयुष्य‌ ‌त्याच्या‌ ‌शौर्यापुढे‌ ‌अगदी‌ ‌कवडीमोल‌ ‌(लहान)‌ ‌आहे.‌ ‌त्या‌ ‌जवानाची‌ ‌शौर्यगाथा‌ ‌इतकी‌ ‌महान‌ ‌आहे‌ ‌की‌ ‌त्या‌ ‌शौर्यगाथेपुढे‌ ‌आपल्या‌ ‌सामान्य‌ ‌जीवाची‌ ‌काय‌ ‌शान‌ ‌असणार?‌ ‌असे‌ ‌कवयित्रीला‌ ‌वाटते.‌‌

वर‌ ‌घोंघावे‌ ‌बंबारा,‌‌
पुढे‌ ‌कल्लोळ‌ ‌धुराचे,‌ ‌
धडाडत्या‌ ‌तोफांतून‌‌
तुझें‌ ‌पाऊल‌ ‌जिद्दीचें;‌ ‌

सैनिक‌ ‌सीमेवर‌ ‌शत्रूशी‌ ‌लढत‌ ‌असतात,‌ ‌त्यावेळची‌ ‌परिस्थिती‌ ‌अतिशय‌ ‌हृदयद्रावक,‌ ‌हृदयाला‌ ‌हेलावून‌ ‌टाकणारी‌ ‌असते.‌ ‌युद्धभूमीवर‌ ‌शत्रू‌ ‌आक्रमण‌ ‌करत‌ ‌असतो.‌ ‌त्याचा‌ ‌परतवार‌ ‌करत‌ ‌असताना‌ ‌अनेक‌ ‌सैनिक‌ ‌घायाळ‌ ‌होतात.‌ ‌तोफांचा‌ ‌आवाज‌ ‌होत‌ ‌असतो,‌ ‌बंदुकीतून‌ ‌सुटणाऱ्या‌ ‌असंख्य‌ ‌गोळया‌ ‌अनेकांची‌ ‌छाताडे‌ ‌उडवत‌ ‌असतात.‌ ‌धुराचा‌ ‌लोळ‌ ‌उठत‌ ‌असतो.‌ ‌कवयित्री‌ ‌म्हणतात;‌ ‌हे‌ ‌सारे‌ ‌चालू‌ ‌असताना‌ ‌आपला‌ ‌हा‌ ‌जवान‌ ‌मागे‌ ‌हटत‌ ‌नाही‌ ‌तर‌ ‌दोन‌ ‌पावले‌ ‌नेहमी‌ ‌पुढेच‌ ‌टाकत‌ ‌असतो.‌ ‌न‌ ‌घाबरता,‌ ‌डगमगता,‌ ‌शत्रूशी‌ ‌दोन‌ ‌हात‌ ‌करून‌ ‌जिद्दीने‌ ‌लढत‌ ‌असतो.‌‌

तुझी‌ ‌विजयाची‌ ‌दौड‌
डोळे‌ ‌भरून‌ ‌पहावी;‌
‌डोळ्यांतील‌ ‌आसवांची‌‌
ज्योत‌ ‌ज्योत‌ ‌पाजळावी‌ ‌

सीमेवर‌ ‌चालू‌ ‌असलेल्या‌ ‌रणसंग्रामामध्ये‌ ‌आपल्या‌ ‌जवानाचा‌ ‌विजय‌ ‌निश्चित‌ ‌आहे.‌ ‌कवयित्री‌ ‌म्हणतात,‌ ‌या‌ ‌जवानांचा‌ ‌पराक्रम‌ ‌मला‌ ‌डोळे‌ ‌भरून‌ ‌पाहायचा‌ ‌आहे.‌ ‌तसेच‌ ‌आपल्या‌ ‌जवानाकडून‌ ‌भारतीयांची‌ ‌असलेली‌ ‌अपेक्षा‌ ‌व्यक्त‌ ‌करताना‌ ‌त्या‌ ‌म्हणतात,‌ ‌शत्रूला‌ ‌पराजित‌ ‌करून‌ ‌प्रत्येक‌ ‌युद्धात‌ ‌तुझाच‌ ‌विजय‌ ‌झाला‌ ‌पाहिजे.‌ ‌तुझ्या‌ ‌विजयाची‌ ‌दौड‌ ‌अशीच‌ ‌राहिली‌ ‌पाहिजे.‌ ‌तुझ्या‌ ‌विजयाने‌ ‌माझ्या‌ ‌डोळयांमध्ये‌ ‌आनंदाश्रू‌ ‌दाटून‌ ‌येतील.‌ ‌ज्याप्रमाणे‌ ‌दिव्याची‌ ‌ज्योत‌ ‌नेहमी‌ ‌तेवत‌ ‌असते‌ ‌तशीच‌ ‌माझ्या‌ ‌डोळ्यांतील‌ ‌अणूंची‌ ‌ज्योत‌ ‌नेहमीच‌ ‌पाजळत‌ ‌राहिली‌ ‌पाहिजे.‌ ‌

अशा‌ ‌असंख्य‌ ‌ज्योतींची‌‌
तुझ्यामागून‌ ‌राखण;‌
‌दीनदुबळ्यांचे‌ ‌असें‌‌
तुला‌ ‌एकच‌ ‌औक्षण.

कवयित्री‌ ‌सीमेवर‌ ‌लढण्यासाठी‌ ‌जाणाऱ्या‌ ‌जवानाला‌ ‌म्हणतात‌ ‌की,‌ ‌सर्व‌ ‌जनमानसांच्या‌ ‌असंख्य‌ ‌ज्योती‌ ‌तुझ्या‌ ‌रक्षणासाठी‌ ‌सदैव‌ ‌तुझ्याच‌ ‌पाठीशी‌ ‌आहेत.‌ ‌म्हणजेच‌ ‌असंख्य‌ ‌लोकांचा‌ ‌आशीर्वाद‌ ‌तुझ्या‌ ‌पाठीशी‌ ‌आहे.‌ ‌आम्ही‌ ‌सर्वजण‌ ‌दीनदुबळे‌ ‌आहोत.‌ ‌आमच्यामध्ये‌ ‌तुझ्यासारखे‌ ‌सामर्थ्य‌ ‌नाही.‌ ‌रक्तामध्ये‌ ‌ती‌ ‌उमेद‌ ‌नाही.‌ ‌तुझ्याकडे‌ ‌हे‌ ‌सर्व‌ ‌आहे.‌ ‌तुझ्यामध्ये‌ ‌आणखी‌ ‌उर्जा‌ ‌निर्माण‌ ‌होण्यासाठी‌ ‌आशीर्वाद‌ ‌स्वरूपात‌ ‌तुझे‌ ‌औक्षण‌ ‌आम्ही‌ ‌सर्व‌ ‌भारतीय‌ ‌करत‌ ‌आहोत.‌‌

औक्षण शब्दार्द्ध

  • मुठ‌ ‌–‌ ‌हाताची‌ ‌बोटे‌ ‌मिटून‌‌ होणारी‌ ‌हाताच्या‌ ‌पंजाची‌ ‌रचना‌‌ – (fist)
  • द्रव्य –‌ ‌पैसा,‌ ‌धन‌ ‌–‌ ‌(money,‌ ‌wealth)‌
  • शिर‌ ‌–‌ ‌नस‌ ‌‌–‌ ‌(vein)‌
  • रक्त‌ ‌– रुधिर‌ ‌‌–‌ ‌(blood)‌ ‌
  • कष्ट‌ ‌–‌ ‌परिश्रम‌ ‌–‌ ‌(hard‌ ‌work)‌ ‌
  • सामर्थ्य‌ ‌–‌ ‌क्षमता,‌ ‌कुवत‌ ‌–‌ ‌(capacity)‌ ‌
  • जीव‌ ‌–‌ ‌प्राण‌ ‌–‌ ‌(life,‌ ‌virility)‌ ‌
  • ओवाळणे‌ ‌–‌ ‌औक्षण,‌‌ आरती‌ ‌करणे‌‌ –‌ ‌(to‌ ‌move‌ ‌a‌ ‌lamp‌ ‌in‌ ‌a‌‌ circular‌ ‌motion‌ ‌before god‌ ‌or‌ ‌man)‌
  • शौर्यगाथा‌ ‌–‌ ‌पराक्रम‌‌ –‌ ‌(valour,‌ ‌heroism)‌ ‌
  • शान‌ ‌–‌ ‌थाट‌‌ –‌ ‌(great‌ ‌pomp)‌ ‌
  • बंबारा‌ ‌–‌ ‌गोळीबार‌ ‌–‌ ‌(firing)‌ ‌
  • धुराचा‌ ‌–‌ ‌धुराचा‌ ‌लोळ‌ ‌कल्लोळ‌ ‌–‌ ‌(rolling‌ ‌smoke‌ ‌of‌ ‌fire)‌ ‌
  • घोंघावणे‌ ‌–‌ ‌मोठा‌ ‌आवाज‌‌ –‌ ‌(to‌ ‌roar,‌ ‌to‌ ‌growl)‌ ‌
  • धडाडते‌ ‌–‌ ‌गडगडाट‌ ‌–‌ ‌(thunderous‌ ‌sound)‌ ‌
  • तोफ‌ ‌–‌ ‌तोफ,‌ ‌बंदुक‌‌ –‌ ‌(cannon)‌ ‌
  • जिद्द‌ ‌–‌ ‌निश्चय‌‌ –‌ ‌(determination)‌ ‌
  • विजय‌ ‌–‌ ‌जय‌‌ –‌ ‌(victory,‌ ‌triumph)‌ ‌
  • दौड‌ ‌–‌ ‌धाव‌‌ –‌ ‌(to‌ ‌run)‌ ‌
  • आसवे‌ ‌–‌ ‌अश्रू‌‌ –‌ ‌(tears)‌ ‌
  • ज्योत‌ ‌–‌ ‌दिव्याची‌ ‌ज्वाला‌ ‌–‌ ‌(flame,‌ ‌light)‌ ‌
  • पाजळणे‌ ‌–‌ ‌प्रकटवणे‌‌ –‌ ‌(to‌ ‌kindle)‌ ‌
  • असंख्य‌ ‌–‌ ‌अगणित‌‌ –‌ ‌(innumerable)‌ ‌
  • राखण‌ ‌–‌ ‌रक्षण‌‌ –‌ ‌(toguard)‌ ‌
  • दीनदुबळे‌ ‌–‌ ‌कमकुवत‌ ‌–‌ ‌(weak)

Marathi Akshar Bharati Class 10th Digest 

Class 10 Hindi Chapter 8 Apni Gandh Nahi Bechunga Question Answer Maharashtra Board

Std 10 Hindi Chapter 8 Apni Gandh Nahi Bechunga Question Answer Maharashtra Board

Balbharti Maharashtra State Board Class 10 Hindi Solutions Chapter 8 अपनी गंध नहीं बेचूँगान Notes, Textbook Exercise Important Questions, and Answers.

Hindi Lokbharti 10th Digest Chapter 8 अपनी गंध नहीं बेचूँगान Questions And Answers

Hindi Lokbharti 10th Std Digest Chapter 8 अपनी गंध नहीं बेचूँगा Textbook Questions and Answers

कृति

कृतिपत्रिका के प्रश्न 2 (अ) तथा प्रश्न 2 (आ) के लिए

सूचना के अनुसार कृतियाँ कीजिए :

प्रश्न 1.
कृति पूर्ण कीजिए:
Maharashtra Board Class 10 Hindi Solutions Chapter 8 अपनी गंध नहीं बेचूँगा 1
उत्तर:
Maharashtra Board Class 10 Hindi Solutions Chapter 8 अपनी गंध नहीं बेचूँगा 13

प्रश्न 2.
लिखिए :
(i) फूल को बिक जाने से भी बेहतर लगता
(ii) फूल के अनुसार उसे तोड़ने का पहला अधिकार
उत्तर:
(i) फूल को बिक जाने से भी बेहतर लगता है – मर जाना।
(ii) फूल के अनुसार उसे तोड़ने का पहला अधिकार डाली, कोंपल और काँटों को है।

प्रश्न 3.
कृति पूर्ण कीजिए:
Maharashtra Board Class 10 Hindi Solutions Chapter 8 अपनी गंध नहीं बेचूँगा 2
उत्तर:
Maharashtra Board Class 10 Hindi Solutions Chapter 8 अपनी गंध नहीं बेचूँगा 11

प्रश्न 4.
सूची बनाइए:
इनका फूल से संबंध है –
– – – – – – – – – – – – – – –
– – – – – – – – – – – – – – –
– – – – – – – – – – – – – – –
– – – – – – – – – – – – – – –
उत्तर:
(i) उपवन:
(ii) डाली
(iii) कोंपल
(iv) काँटे।

Maharashtra Board Class 10 Hindi Solutions Chapter 8 अपनी गंध नहीं बेचूँगा

प्रश्न 5.
कारण लिखिए :
(i) फूल अपनी सौगंध नहीं बेचेगा – – – – – – – – – – – – – – –
(ii) फूल को मौसम से कुछ लेना नहीं है – – – – – – – – – – – – – – –
उत्तर:
(i) अपनी गंध न बेचने की सौगंध फूल का संस्कार बन गई है, इसलिए फूल अपनी सौगंध नहीं बेचेगा।
(i) फूल को मौसम से कुछ लेना-देना नहीं है – उसे अपने अस्तित्व के लिए कुछ भी पाने की इच्छा नहीं है। इसलिए कैसा भी मौसम हो, उसे कोई फर्क नहीं पड़ता।

प्रश्न 6.
‘दाता होगा तो दे देगा, खाता होगा तो खाएगा’ इस पंक्ति से स्पष्ट होने वाला अर्थ लिखिए।
उत्तर:
फूल को केवल अपने स्वाभिमान से मतलब है। उसे किसी चीज को पाने अथवा खो जाने की चिंता नहीं है। जो मिलना होगा, मिलेगा और जो नुकसान होगा, होगा। उसे उसकी चिंता नहीं है।

प्रश्न 7.
निम्नलिखित मुद्दों के आधार पर पद्य विश्लेषण कीजिए :
1. रचनाकार का नाम
2. रचना का प्रकार
3. पसंदीदा पंक्ति
4. पसंदीदा होने का कारण
5. रचना से प्राप्त संदेश/प्रेरणा
उत्तर:
1. रचनाकार का नाम → बालकवि बैरागी।
2. रचना की विधा → गीत।

3. पसंद की पंक्ति → चाहे सभी सुमन बिक जाएँ,
चाहे ये उपवन बिक जाएँ
चाहे सौ फागुन बिक जाएँ
पर मैं गंध नहीं बेचूंगा।

4. पंक्तियाँ पसंद होने का कारण → इन पक्तियों में फूल हर हालत में जीवन में अपने स्वाभिमान को सर्वोपरि मानता है। इसके लिए उसे कोई भी त्याग करना पड़े, तो वह इसके लिए तैयार है, पर वह अपने स्वाभिमान को हर हालत में बनाए रखना चाहता है।

5. रचना से प्राप्त संदेश/प्रेरणा → प्रस्तुत रचना से यह संदेश मिलता है कि स्वाभिमान मनुष्य की सबसे बड़ी थाती है। हमें हर हालत में इसकी रक्षा करनी चाहिए। यदि स्वाभिमान की रक्षा के लिए हमें अपना सर्वस्व निछावर कर देना पड़े, तो भी हँसते-हँसते अपना सब कुछ त्याग देना चाहिए। प्रस्तुत पंक्तियों से हमें यही प्रेरणा मिलती है। (विद्यार्थी अपनी पसंदीदा पंक्ति लिखें।)

Maharashtra Board Class 10 Hindi Solutions Chapter 8 अपनी गंध नहीं बेचूँगा

Hindi Lokbharti 10th Textbook Solutions Chapter 8 अपनी गंध नहीं बेचूँगा Additional Important Questions and Answers

पद्यांश क्र. 1
प्रश्न. निम्नलिखित पठित पद्यांश पढ़कर दी गई सूचनाओं के अनुसार कृतियाँ कीजिए :

कृति 1 : (आकलन)

प्रश्न 1.
आकृति पूर्ण कीजिए :
Maharashtra Board Class 10 Hindi Solutions Chapter 8 अपनी गंध नहीं बेचूँगा 3
Maharashtra Board Class 10 Hindi Solutions Chapter 8 अपनी गंध नहीं बेचूँगा 4
उत्तर:
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प्रश्न 2.
जोड़ियाँ मिलाइए :
(i) सुमन – पँखुरी
(ii) काँटे – सौगंध
(iii) मालिन – उपवन
(iv) संस्कार – चौकी
उत्तर:
(i) सुमन – उपवन
(ii) काँटे – चौकी
(iii) मालिन – पँखुरी
(iv) संस्कार – सौगंध

प्रश्न 3.
उत्तर लिखिए :
(i) फूल ‘सौगंध’ न बेचने की बात इन्हें संबोधित करते हुए कहता है।
उत्तर:
(i) अपने ऊपर मँडराने वालों और अपना मोल लगाने वालों को फूल ‘सौगंध’ न बेचने की बात संबोधित करते हुए कहता है।

प्रश्न 4.
कारण लिखिए :
(i) फूल डाली, कोंपल और काँटों को स्वयं को नोचने-तोड़ने का अधिकार देता है –
उत्तर:
(i) फूल डाली, कोंपल और काँटों का कृतज्ञ है, इसलिए वह इन्हें अपने आप को नोचने-तोड़ने का अधिकार देता है।

प्रश्न 5.
उत्तर लिखिए : (पद्यांश में आया)
(i) एक भारतीय महीने का नाम – ………………………………..
(ii) एक प्रसिद्ध पौराणिक चरित्र, जिनके नाम के साथ रेखा’ शब्द जोड़कर उदाहरण दिया जाता है – ………………………………..
(iii) फूलों के बगीचे में फूलों के पौधे लगाने और उनकी सेवा करने वाले व्यक्ति की पत्नी – ………………………………..
(iv) फूलों की महक के अर्थ में प्रयुक्त शब्द – ………………………………..
उत्तर:
(i) एक भारतीय महीने का नाम – फागुन।
(ii) एक प्रसिद्ध पौराणिक चरित्र, जिनके नाम के साथ ‘रेखा शब्द जोड़कर उदाहरण दिया जाता है- लछमन (लक्ष्मण), लक्ष्मण रेखा।
(iii) फूलों के बगीचे में फूलों के पौधे लगाने और उनकी सेवा करने – वाले व्यक्ति की पत्नी – मालिन।
(iv) फूलों की महक के अर्थ में प्रयुक्त शब्द – गंध।

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कृति 2 : (शब्द संपदा)

प्रश्न 1.
निम्नलिखित शब्दों के अर्थ लिखिए :
(i) अरुणाई
(ii) चौकी
(iii) गंध
(iv) सौगंध
उत्तर:
(i) अरुणाई -लालिमा
(ii) चौकी – पहरा
(iii) गंध -सुगंध
(iv) सौगंध – कसम।

प्रश्न 2.
निम्नलिखित शब्द समूहों के लिए एक-एक शब्द लिखिए :
(i) वृक्ष की नई और कोमल पत्तियाँ =
(ii) किसी वस्तु के ऊपर चारों ओर घूमते हुए उड़ना =
उत्तर :
(i) वृक्ष की नई और कोमल पत्तियाँ – कोंपल
(ii) किसी वस्तु के ऊपर चारों ओर घूमते हुए उड़ना – मँडराना।

कृति 3 : (सरल अर्थ)

प्रश्न.
उपर्युक्त पद्यांश की ‘जिस डाली ने ——— रिश्ते जोड़े’ पंक्तियों का सरल अर्थ 25 से 30 शब्दों में लिखिए।
उत्तर:
फूल कहता है कि पौधे की जिस डाल ने उसे अपनी गोद में खिलाया था, जिन कोंपलों ने उसे लालिमा प्रदान की थी और जिन काँटों ने लक्ष्मणजी की तरह पहरा देकर उसे तोड़े जाने से बचाया था, उन्हें वह कभी भूल नहीं सकता। उनका वह ऋणी है और उस पर पहला अधिकार इन्हीं का है। वे चाहे उसे नोचें या तोड़ें, वह उफ तक नहीं करेगा। वह कहता है कि वे चाहे मुझे तोड़कर किसी मालिन को दे दें, तो भी मुझे कोई आपत्ति नहीं है।

पद्यांश क्र. 2
प्रश्न. निम्नलिखित पठित पद्यांश पढ़कर दी गई सूचनाओं के अनुसार कृतियाँ कीजिए :

कृति 1: (आकलन)

प्रश्न 1.
आकृति पूर्ण कीजिए :
Maharashtra Board Class 10 Hindi Solutions Chapter 8 अपनी गंध नहीं बेचूँगा 6
उत्तर:

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प्रश्न 2.
कारण लिखिए :
(i) पिचकारी का जादू-टोना फूल पर कोई अंतर नहीं लाएगा –
उत्तर:
(i) पिचकारी का जादू-टोना फूल पर कोई अंतर नहीं लाएगा – फूल को कृत्रिम फुहारों की कामना नहीं है। इसलिए पिचकारी का जादू-टोना फूल पर कोई अंतर नहीं लाएगा।

प्रश्न 3.
आकृति पूर्ण कीजिए:
Maharashtra Board Class 10 Hindi Solutions Chapter 8 अपनी गंध नहीं बेचूँगा 7
उत्तर:

कृति 2 : (शब्द संपदा)

प्रश्न 1.
पद्यांश में प्रयुक्त शब्द-युग्म ढूँढकर लिखिए :
(i) ………………………………
(ii) ………………………………
(iii) ………………………………
(iv) ………………………………
उत्तर:
(i) आएगा-जाएगा
(ii) रोना-धोना
(iii) जादू-टोना
(iv) पल-पल।

प्रश्न 2.
निम्नलिखित शब्दों के समानार्थी शब्द लिखिए :
(i) भौंरा = ………………………………
(ii) सुर = ………………………………
(iii) दाम = ………………………………
(iv) कोमल = ………………………………
उत्तर:
(i) भौंरा = भ्रमर
(ii) सुर = स्वर
(iii) दाम = मूल्य
(iv) कोमल = मुलायम।

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कृति 3 : (सरल अर्थ)

प्रश्न.
प्रस्तुत पद्यांश की अंतिम चार पंक्तियों का सरल अर्थ 25 से 30 शब्दों में लिखिए।
उत्तर:
चाहे फूल की कोमल-कोमल पंखुड़ियों पर भौंरों के गुंजन का सरगम सुनाई देता हो अथवा पतझड़ का मौसम हो, और वह मुरझाई हुई दशा में हो या उस पर कृत्रिम फुहारें डालकर उसे सांत्वना दी जाए, उस पर कोई फर्क नहीं पड़ता। फूल अपनी बोली लगाने वालों और पल-पल अपनी कीमतें आँकने वालों को संबोधित करते हुए कहता है कि मैंने अपने आप से अपने स्वाभिमान का अनुबंध कर लिया है और यह ठान लिया है कि मैं अपने स्वाभिमान पर कभी आँच नहीं आने दूंगा। मैं उस अनुबंध को किसी भी हालत में दाँव पर नहीं लगा सकता अर्थात मैं उसका कभी सौदा नहीं कर सकता। फूल कहता है कि वह अपनी सुगंध कभी नहीं बेच सकता।

पयांश क्र. 3
प्रश्न. निम्नलिखित पठित पद्यांश पढ़कर दी गई। सूचनाओं के अनुसार कृतियाँ कीजिए :

कृति 1 : (आकलन)

प्रश्न 1.
दो ऐसे प्रश्न बनाकर लिखिए, जिनके उत्तर निम्नलिखित शब्द हों :
(i) मन ने
(ii) पवन के।
उत्तर:
(i) तन पर किसने प्रतिबंध लगा दिया?
(ii) फूल एक-एक के घर किसके साथ जाएगा?

प्रश्न 2.
लिखिए :
(i) फूल झर जाना चाहता है ……………………………|
उत्तर:
(i) फूल झर जाना चाहता है – अपनी माटी में।

प्रश्न 3.
आकृति पूर्ण कीजिए :
(i) फूल इस तरह झर जाएगा
(ii) भूल-चूक की माफी यह लेगी –
(iii) तब मंडी यह समझेगी –
(iv) इसको इसका अंत पता है –
उत्तर:
(i) फूल इस तरह झर जाएगा – पंखुरी-पंखुरी गिरकर
(ii) भूल-चूक की माफी यह लेगी – फूल की गंध कुमारी
(iii) तब मंडी यह समझेगी – खुद्दारी किसको कहते हैं।
(iv) इसको इसका अंत पता है – फूल को अपना

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कृति 2 : (शब्द संपदा)

प्रश्न 1.
पद्यांश में प्रयुक्त शब्द-युग्म ढूँढ़कर लिखिए :
(i) ………………………………….
(ii) ………………………………….
उत्तर:
(i) एक-एक
(ii) भूल-चूक।

प्रश्न 2.
निम्नलिखित शब्दों के समानार्थी शब्द लिखिए :
(i) पवन = ………………………………….
(ii) तन = ………………………………….
(iii) घर = ………………………………….
(iv) दिन = ………………………………….
उत्तर:
(i) पवन = हवा
(ii) तन = शरीर
(iii) घर = मकान
(iv) दिन = दिवस।

कृति 3 : (सरल अर्थ)

प्रश्न.
प्रस्तुत पद्यांश की प्रथम चार पंक्तियों का सरल अर्थ 25 से 30 शब्दों में लिखिए।
उत्तर:
फूल कहता है कि इस संसार में जिसका भी जन्म होता है, एक-न-एक दिन उसका अंत होना (मरना) निश्चित है। वह कहता है कि यह बात मुझे अच्छी तरह मालूम है कि एक दिन मैं भी पंखुड़ीपंखुड़ी करके झर जाऊँगा और मेरा अंत हो जाएगा। पर इसके पहले मैं हवा के साथ उड़कर वातावरण में फैलकर एक-एक (फूल) के पास ३ जाऊँगा और मेरी सुगंध उनसे जाने-अनजाने में किए की माफी मांगेगी।

फूल कहता है कि उस दिन बाजार और बाजार में खरीद-फरोख्त करने वाले लोगों को यह बात समझ में आएगी कि खुद्दारी अर्थात स्वाभिमान क्या होता है और इसके सम्मान के लिए लोग हर प्रकार का त्याग करने के लिए क्यों तत्पर रहते हैं।

भाषा अध्ययन (व्याकरण)

प्रश्न. सूचनाओं के अनुसार कृतियाँ कीजिए :

1. शब्द भेद :
अधोरेखांकित शब्दों का शब्दभेद पहचानकर लिखिए :
(i) फूल की अरुणाई देखने योग्य थी।
(ii) भँवरे फूलों पर मँडराते हैं।
उत्तर :
(i) अरुणाई – भाववाचक संज्ञा।
(ii) भँवरे – जातिवाचक संज्ञा।

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2. अव्यय :
निम्नलिखित अव्ययों का अपने वाक्यों में प्रयोग कीजिए :
(i) सामने
(ii) तरफ।
उत्तर :
(i) फूल एक-एक के सामने जाएगा।
(ii) मालिन ने फूल की तरफ देखा।

3. संधि :
कृति पूर्ण कीजिए :

संधि शब्दसंधि विच्छेद संधि भेट
…………………यथा + अर्थ …………………
अथवा
नमस्ते ……………………………………

उत्तर:

संधि शब्दसंधि विच्छेद संधि भेट
यथार्थयथा + अर्थस्वर संधि
अथवा
नमस्तेनमः + तेविसर्ग संधि

4. सहायक क्रिया :
निम्नलिखित वाक्यों में से सहायक क्रिया पहचानकर उसका मूल रूप लिखिए :
(i) बिकने से बेहतर है मर जाऊँ।
(ii) मन ने तन पर प्रतिबंध लगा दिया।
उत्तर:
सहायक क्रिया – मूल रूप
(i) जाऊँ – जाना
(ii) दिया – देना

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5. प्रेरणार्थक क्रिया :
निम्नलिखित क्रियाओं के प्रथम प्रेरणार्थक और द्वितीय प्रेरणार्थक रूप लिखिए :
(i) रोना
(ii) उड़ना।
उत्तर:
क्रिया प्रथम प्रेरणार्थक रूप दुवितीय प्रेरणार्थक रूप
(i) रोना – रुलाना – रुलवाना
(ii) उड़ना – उड़ाना – उड़वाना

6. मुहावरे :

प्रश्न 1.
निम्नलिखित मुहावरों का अर्थ लिखकर वाक्य में प्रयोग कीजिए :
(i) चैन न मिलना
(ii) झेंप जाना।
उत्तर :
(i) चैन न मिलना।
अर्थ : बेचैनी अनुभव करना।
वाक्य : इलाके में चोरी की बढ़ती घटनाओं से पुलिस को चैन नहीं मिल रहा था।
(ii) झेंप जाना।
अर्थ : लज्जित होना, शरमाना।
वाक्य : हिसाब-किताब में गड़बड़ी पकड़े जाने पर मुंशी जी झेंप गए।

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प्रश्न 2.
अधोरेखांकित वाक्यांशों के लिए उचित मुहावरे का चयन करके वाक्य फिर से लिखिए : (थर-थर काँपना, नजर आना, दृष्टि फेरना)
(i) चोर पुलिस के डर से बहुत अधिक काँप रहा था।
(ii) आगरा के किले की ऊपरी मंजिल से ताजमहल का गुंबद दिखाई देता है।
उत्तर:
(i) चोर पुलिस के डर से थर-थर काँप रहा था।
(ii) आगरा के किले की ऊपरी मंजिल से ताजमहल का गुंबद नजर आता है।

7. कारक:
निम्नलिखित वाक्यों में प्रयुक्त कारक पहचानकर उसका भेद लिखिए :
(i) अच्छा हो मर कर अपनी माटी में झर जाऊँ।
(ii) चाहे जिस मालिन से मेरी पंखुरियों के रिश्ते जोड़ें।
उत्तर:
(i) माटी में – अधिकरण कारक।
(ii) मालिन से – करण कारक।

8. विरामचिह्न :
निम्नलिखित वाक्यों में यथास्थान उचित विरामचिह्नों का प्रयोग करके वाक्य फिर से लिखिए :
(i) मौसम से मुझको क्या लेना है वह तो आएगा – जाएगा
(ii) अच्छा तो आप मुझे अपनी गंध बेचने के लिए कह रहे हैं
उत्तर :
(i) मौसम से मुझको क्या लेना है, वह तो आएगा-जाएगा।
(ii) अच्छा! तो आप मुझे अपनी गंध बेचने के लिए कह रहे हैं।

9. काल परिवर्तन :
निम्नलिखित वाक्यों का सूचना के अनुसार काल परिवर्तन कीजिए :
(i) मैं गंध नहीं बेचूंगा। (सामान्य भूतकाल)
(ii) मुझको मेरा अंत पता है। (पूर्ण भूतकाल)
उत्तर :
(i) मैंने गंध नहीं बेची।
(ii) मुझको मेरा अंत पता था।

10. वाक्य भेद :

प्रश्न 1.
निम्नलिखित वाक्यों का रचना के आधार पर भेद पहचानकर लिखिए :
(i) एक ओर भौरे का गुंजार है और दूसरी ओर पतझड़।
(ii) मैं वह सौगंध नहीं बेचूंगा, जो मेरा संस्कार बन गई।
उत्तर :
(i) संयुक्त वाक्य
(ii) मिश्र वाक्य।

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प्रश्न 2.
निम्नलिखित वाक्यों का अर्थ के आधार पर दी गई सूचना के अनुसार परिवर्तन कीजिए :
(i) फूल अपनी गंध नहीं बेचेगा। (विस्मयादिबोधक वाक्य)
(ii) फूल एक-एक के घर जाएगा। (संदेहबोधक वाक्य)
उत्तर :
(i) अच्छा ! फूल अपनी गंध नहीं बेचेगा !
(ii) फूल शायद एक-एक के घर जाए।

11. वाक्य शुद्धिकरण :
निम्नलिखित वाक्य शुद्ध करके फिर से लिखिए :
(i) उस दीन ये मंडी समझेगा।
(ii) तब दूनिया उसके पाँव पर पड़ेगी।
उत्तर:
(i) उस दिन ये मंडी समझेगी।
(ii) तब दुनिया उसके पाँव पड़ेगी।

अपनी गंध नहीं बेचूँगा Summary in Hindi

विषय-प्रवेश :
स्वाभिमान मनुष्य की थाती है। जिस व्यक्ति में स्वाभिमान की भावना नहीं होती, उसका अपना कोई अस्तित्व नहीं होता। स्वाभिमानी लोग अपने स्वाभिमान की रक्षा के लिए अपना सब कुछ गँवा देते हैं, पर अपने स्वाभिमान पर आँच नहीं आने देते। प्रस्तुत कविता में कवि ने एक ऐसे ही फूल का वर्णन किया है, जो अपने स्वाभिमान को बनाए रखने के लिए अपना सब कुछ निछावर करने के लिए तत्पर है, पर किसी भी हालत में अपना स्वाभिमान छोड़ने के लिए तैयार नहीं है। कवि ने इस कविता के द्वारा फूल के इस गुण को मनुष्य को भी अपनाने और स्वाभिमानी रहने की प्रेरणा दी है।

अपनी गंध नहीं बेचूँगा कविता का सरल अर्थ

1. चाहे सभी सुमन …………………………. सौगंध नहीं बेचूंगा।

स्वाभिमानी फूल अपने स्वाभिमान की रक्षा के लिए अपना सब कुछ निछावर करने के लिए तैयार है, पर वह किसी भी हालत में अपने स्वाभिमान पर आँच नहीं आने देना चाहता।

वह कहता है कि चाहे सारे फूल बिक जाएँ, केवल फूल ही नहीं चाहे वे उपवन भी बिक जाएँ, जहाँ सारे फूल उत्पन्न होते हैं। सारी बहार क्यों न बिक जाए, पर वह अपनी सुगंध को, जिसे वह अपना स्वाभिमान मानता है, किसी भी हालत में नहीं बेच सकता।

जिस तरह मनुष्य अपने स्वाभिमान के लिए मर मिट जाता है, पर उस पर आँच नहीं आने देता, उसी तरह यह फूल भी अपनी सुगंध की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध है।

फूल कहता है कि पौधे की जिस डाल ने उसे अपनी गोद में खिलाया था, जिन कोंपलों ने उसे लालिमा प्रदान की थी और जिन काँटों ने लक्ष्मणजी की तरह पहरा देकर उसे तोड़े जाने से बचाया था, उन्हें वह कभी भूल नहीं सकता। उनका वह ऋणी है और उस पर पहला अधिकार इन्हीं का है। वे चाहे उसे नोचें या तोड़ें, वह उफ तक नहीं करेगा। वह कहता है कि वे चाहे मुझे तोड़कर किसी मालिन को दे दें, तो भी मुझे कोई आपत्ति नहीं है।

वह चारों ओर से अपने ऊपर नजरें गड़ाने वालों और उसकी कीमत लगाकर उसे बाजार में बेचने वालों से कहता है कि उसने अपनी सुगंध को न बेचने की जो सौगंध खाई है, वह उसका संस्कार बन गई है और वह उसका सौदा कभी नहीं कर सकता। फूल कहता है कि वह अपनी सुगंध कभी नहीं बेच सकता।

2. मौसम से क्या लेना अनुबंध नहीं बेचूंगा।

फूल कहता है कि मौसम, कैसा भी हो, मौसम का उस पर कोई प्रभाव नहीं पड़ता। वह हर स्थिति में अपने आप को स्थिर रखने में सक्षम है। उसे किसी से कुछ भी पाने की आकांक्षा नहीं है। वह लाभ या हानि की कोई परवाह नहीं करता। न उस पर किसी चीज का कोई प्रभाव पड़ता है। और न वह किसी चीज से कभी घबराता है। चाहे उसकी कोमल-कोमल पंखुड़ियों पर भौंरों के गुंजन का सरगम सुनाई देता हो अथवा पतझड़ का मौसम हो, और वह मुरझाई हुई दशा में हो या उस पर कृत्रिम फुहारें डालकर उसे सांत्वना दी जाए, उस पर कोई फर्क नहीं पड़ता।

वह अपनी बोली लगाने वालों और पल-पल अपनी कीमतें आँकने वालों को संबोधित करते हुए कहता है कि मैंने अपने आप से अपने स्वाभिमान का अनुबंध कर लिया है और यह ठान लिया है कि मैं अपने स्वाभिमान पर कभी आँच नहीं आने दूँगा। मैं उस अनुबंध को किसी भी हालत में दाँव पर नहीं लगा सकता अर्थात मैं उसका कभी सौदा नहीं कर सकता। फूल कहता है कि वह अपनी सुगंध कभी नहीं बेच सकता।

3. मुझको मेरा अंत ……………………… वो प्रतिबंध नहीं बेचूंगा।

फूल कहता है कि इस संसार में जिसका भी जन्म होता है, एक-न-एक दिन उसका अंत होना (मरना) निश्चित है। वह कहता है कि यह बात मुझे अच्छी तरह मालूम है कि एक दिन मैं भी पंखुड़ीपंखुड़ी करके झर जाऊँगा और मेरा अंत हो जाएगा। पर इसके पहले मैं हवा के साथ उड़कर वातावरण में फैलकर एक-एक (फूल) के पास जाऊँगा और मेरी सुगंध उनसे जाने-अनजाने में किए की माफी मांगेगी।

फूल कहता है कि उस दिन बाजार और बाजार में खरीद-फरोख्त करने वाले लोगों को यह बात समझ में आएगी कि खुद्दारी अर्थात स्वाभिमान क्या होता है और इसके सम्मान के लिए लोग हर प्रकार का त्याग करने के लिए क्यों तत्पर रहते हैं। फूल कहता है कि किसी के हाथों बिकने से तो अच्छा है कि मैं मर जाऊँ और अपने देश की मिट्टी में मिल जाऊँ। वह कहता है कि मैंने अपनी इच्छा से अपने शरीर पर जो प्रतिबंध लगा लिया है, उस प्रतिबंध को मैं कभी नहीं बेच सकता।

(फूल के इस स्वाभिमान को मनुष्य को भी अपनाना चाहिए और उसे भी किसी लालच में आकर कभी अपना स्वाभिमान बेचना नहीं चाहिए।)

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कृति

(कृतिपत्रिका के प्रश्न 3 (आ) के लिए)

सूचना के अनुसार कृतियाँ कीजिए:

प्रश्न 1.
वर्गीकरण कीजिए:
पद्यांश में उल्लिखित चरित्र-ध्रुव, प्रह्लाद, भरत, लक्ष्मीबाई, रजिया सुलताना, दुर्गावती, पद्मिनी, सीता, चाँदबीबी, सावित्री, जयमल
उत्तर:
ऐतिहासिक – पौराणिक
लक्ष्मीबाई, रजिया सुलताना, दुर्गावती, पद्मिनी, चाँद बीबी, जयमल-पत्ता। – ध्रुव, प्रह्लाद, भरत, सीता, सावित्री।।

प्रश्न 2.
विशेषताओं के आधार पर पहचानिए :
(i) भारत माता के रथ के दो पहिये – ……………………………..
(ii) खूब लड़ने वाली मर्दानी – ……………………………..
(iii) अपनी लगन का सच्चा – ……………………………..
(iv) किसी को कुछ न गिनने वाले – ……………………………..
उत्तर:
(i) भारत माता के रथ के दो पहिये – लड़के (पुरुष), लड़कियाँ (स्त्रियाँ)।
(ii) खूब लड़ने वाली मर्दानी – लक्ष्मीबाई, दुर्गावती, रजिया सुलताना।
(iii) अपनी लगन का सच्चा – प्रह्लाद।
(iv) किसी को कुछ न गिनने वाले – जयमल-पत्ता।

प्रश्न 3.
सही/गलत पहचानकर गलत वाक्य को सही करके वाक्य पुनः लिखिए :
(i) रानी कर्मवती ने अकबर को राखी भेजी थी।
(ii) भरत शेर के दाँत गिनते थे।
(iii) झगड़ने से सब कुछ प्राप्त होता है।
(iv) ध्रुव आकाश में खेले थे।
उत्तर:
(i) रानी कर्मवती ने हुमायूँ को राखी भेजी थी।
(ii) भरत शेरों की दतुली गिनते थे।
(iii) झगड़ने से कुछ भी प्राप्त नहीं होता।
(iv) ध्रुव मिट्टी में खेले थे।

Maharashtra Board Class 10 Hindi Solutions Chapter 6 हम उस धरती की संतति हैं

प्रश्न 4.
कविता से प्राप्त संदेश लिखिए।
उत्तर:
प्रस्तुत कविता कव्वाली के स्वरूप में है। इसमें लड़के जहाँ महापुरुषों और प्रसिद्ध शूरवीरों का हवाला देते हुए अपने आप को लड़कियों से श्रेष्ठ बताने की कोशिश करते हैं, वहीं लड़कियाँ भी सीता, सावित्री, लक्ष्मीबाई तथा युद्ध में अपना पराक्रम दिखाने वाली शूरवीर रानियों को अपनी जमात से जोड़ते हुए लड़कों से अपने आप को कम नहीं बतातीं। पर बाद में लड़के कव्वाली के माध्यम से लड़कियों को जवाब देते हैं कि कोई किसी से बढ़कर नहीं है, सभी बराबर हैं। देश के चाहे महान पुरुष हों या महान स्त्रियाँ सभी भारत माँ की संतान हैं। लड़के-लड़कियाँ दोनों भारत माता के रथ के दो पहियों के समान हैं। रथ के लिए इन दोनों पहियों का होना जरूरी है। इस तरह कविता से यह संदेश मिलता है कि कोई बड़ा या कोई छोटा नहीं है, सभी लोग समान हैं। हमें अपने आप पर निरर्थक गर्व नहीं करना चाहिए।

Hindi Lokbharti 10th Textbook Solutions Chapter 6 हम उस धरती की संतति हैं Additional Important Questions and Answers

पद्यांश क्र. 1
प्रश्न. निम्नलिखित पठित पद्यांश पढ़कर दी गई सूचनाओं के अनुसार कृतियाँ कीजिए:

कृति 1: (आकलन)

प्रश्न 1.
तालिका पूर्ण कीजिए:

चरित्र विशेषताएँ
 इस मिट्टी में खेलने वाला
 लगन का सच्चा (सच्ची लगन वाला)
 शेर के जबड़े में दाँत गिनने वाला
 अपने पराक्रम के आगे किसी को न गिनने वाला

उत्तर:

चरित्र विशेषताएँ
ध्रुव इस मिट्टी में खेलने वाला
प्रहलाद लगन का सच्चा (सच्ची लगन वाला)
भरत शेर के जबड़े में दाँत गिनने वाला
जयमल-पत्ता अपने पराक्रम के आगे किसी को न गिनने वाला

Maharashtra Board Class 10 Hindi Solutions Chapter 6 हम उस धरती की संतति हैं

प्रश्न 2.
आकृति पूर्ण कीजिए:
Maharashtra Board Class 10 Hindi Solutions Chapter 6 हम उस धरती की संतति हैं 1
उत्तर:
Maharashtra Board Class 10 Hindi Solutions Chapter 6 हम उस धरती की संतति हैं 2
प्रश्न 3.
उत्तर लिखिए:
(i) पद्यांश में बड़ाई की गई है, इनकी –
(ii) पद्यांश में प्रयुक्त सौरमंडल का एक प्रसिद्ध ग्रह –
(iii) पद्यांश में आया वह नाम, जिनके नाम पर हमारे देश का नाम पड़ा –
(iv) पद्यांश में आया वन का एक हिंसक पशु –
उत्तर:
(i) पद्यांश में बड़ाई की गई है, इनकी – लड़कों की।
(ii) पद्यांश में प्रयुक्त सौरमंडल का एक प्रसिद्ध ग्रह – घरती।
(iii) पद्यांश में आया वह नाम, जिनके नाम पर हमारे देश का नाम पड़ा – भरत।
(iv) पद्यांश में आया वन का एक हिंसक पशु – शेर।

कृति 2: (स्वमत अभिव्यक्ति)

प्रश्न.
कव्वाली काव्य विधा के बारे में अपने विचार 25 से 30 शब्दों में लिखिए।
उत्तर:
कव्वाली आम जनता से लेकर शिक्षित वर्ग तक की पसंद की एक लोकप्रिय काव्य विधा है। इसकी मुख्य विशेषता, कव्वाली गीत प्रस्तुत करने वाले कलाकारों के बीच किसी विषय को लेकर नोक-झोंक होती है। इसमें प्रतियोगी कलाकार जब एक-दूसरे की काव्य पंक्तियों पर नहले पर दहला जड़ते हैं, तो श्रोताओं के मुँह से अनायास ही तारीफों की बरसात होने लगती है।

श्रोता अच्छे कलाकारों की कव्वाली सुनने में पूरी रात गुजार देते हैं, फिर भी उनका मन नहीं, भरता। कव्वालियों में कल्पना पक्ष प्रमुख होता है और उपमाओं की भरमार होती है। कव्वाली गायक किसी बात का उदाहरण देते-देते कहीं भटक जाता है, तो भी वह बड़ी खूबसूरती के साथ फिर अपने विषय पर लौट आता है। लोकप्रियता के कारण कव्वाली को कई फिल्मों में भी समाहित किया गया है। कव्वाली गायकों में से कुछ के नाम तो लोगों की जबान पर होते हैं।

Maharashtra Board Class 10 Hindi Solutions Chapter 6 हम उस धरती की संतति हैं

पद्यांश क्र. 2
प्रश्न. निम्नलिखित पठित पद्यांश पढ़कर दी गई सूचनाओं के अनुसार कृतियाँ कीजिए:

कृति 1: (आकलन)

प्रश्न 1.
संजाल पूर्ण कीजिए:
Maharashtra Board Class 10 Hindi Solutions Chapter 6 हम उस धरती की संतति हैं 3
उत्तर
Maharashtra Board Class 10 Hindi Solutions Chapter 6 हम उस धरती की संतति हैं 5

प्रश्न 2.
आकृति पूर्ण कीजिए:
Maharashtra Board Class 10 Hindi Solutions Chapter 6 हम उस धरती की संतति हैं 4
उत्तर
Maharashtra Board Class 10 Hindi Solutions Chapter 6 हम उस धरती की संतति हैं 6

Maharashtra Board Class 10 Hindi Solutions Chapter 6 हम उस धरती की संतति हैं

प्रश्न 3.
उत्तर लिखिए:
(i) पद्यांश में आया चित्तौड़ की प्रसिद्ध रानी का नाम –
(ii) पुराने जमाने में राजपूत रानियों का दहकती हुई विशाल चिता में प्रवेश कर प्राण न्योछावर कर देने से संबंधित शब्द –
उत्तर:
(i) पद्यांश में आया चित्तौड़ की प्रसिद्ध रानी का नाम – पद्मिनी।
(ii) पुराने जमाने में राजपूत रानियों का दहकती हुई विशाल चिता में प्रवेश कर प्राण न्योछावर कर देने से संबंधित शब्द – जौहर।

प्रश्न 4.
परिणाम लिखिए:
गर डींग उड़ाएँगे, तो …………………..
उत्तर:
गर डींग उड़ाएँगे, तो मजबूरन ताने सहने होंगे।

कृति 2: (स्वमत अभिव्यक्ति)

प्रश्न.
‘नारी सम्मान’ के बारे में अपने विचार 25 से 30 शब्दों में लिखिए।
उत्तर:
आजकल स्त्रियों के अपमान की अनेक घटनाएँ पढ़नेसुनने में आती हैं। स्त्रियों पर तरह-तरह के अत्याचार होते हैं। यह बड़े दुख की बात है।

हमारे देश में प्राचीन काल से नारियों का सम्मान करने की परंपरा रही है। हमारे यहाँ नारी को देवी का सम्मान दिया जाता रहा है और उसकी पूजा करने की परंपरा रही है। दुर्गा, सरस्वती, लक्ष्मी, पार्वती, महाकाली आदि देवियों की हम श्रद्धा और भक्तिपूर्वक पूजा करते हैं। सीता, सावित्री तथा अनुसूया जैसी महान नारियाँ हमारी आदर्श रही हैं। हमारे ऋषि-मुनियों ने कहा है ‘यत्र नार्यस्तु पूज्यंते रमन्ते तत्र देवताः अर्थात जहाँ नारियों की पूजा की जाती है वहीं देवता निवास करते हैं।

आज हमारे देश में स्त्रियाँ हर क्षेत्र में पुरुषों के साथ बराबरी के स्तर पर काम कर रही हैं। आज की नारी पहले की अपेक्षा अधिक जागरूक हो चुकी है। नारी को सम्मान देने से स्त्रियाँ ही सम्मानित नहीं होंगी, बल्कि उन्हें सम्मान देने वाले खुद भी गौरवान्वित होंगे।

पद्यांशु क्र. 3
प्रश्न, निम्नलिखित पठित पद्यांश पढ़कर दी गई सूचनाओं के अनुसार कृतियाँ कीजिए:

कृति 1: (आकलन)

(1) आकृति पूर्ण कीजिए:
Maharashtra Board Class 10 Hindi Solutions Chapter 6 हम उस धरती की संतति हैं 7
उत्तर:
Maharashtra Board Class 10 Hindi Solutions Chapter 6 हम उस धरती की संतति हैं 8
Maharashtra Board Class 10 Hindi Solutions Chapter 6 हम उस धरती की संतति हैं 9

Maharashtra Board Class 10 Hindi Solutions Chapter 6 हम उस धरती की संतति हैं

प्रश्न 2.
इन शब्दों के अर्थ वाले शब्द पद्यांश से ढूंढकर लिखिए:
(i) नाराज
(ii) झगड़ा
(iii) संतान
(iv) प्राप्त होना।
उत्तर:
(i) नाराज – खफा
(ii) झगड़ा – टंटा
(iii) संतान – संतति
(iv) प्राप्त होना – हासिल करना।

प्रश्न 3.
परिणाम लिखिए:
झगड़े करेंगे, तो ………………………
उत्तर:
झगड़े करेंगे, तो कुछ हासिल न होगा।

प्रश्न 4.
उपर्युक्त पद्यांश में उल्लेखित स्त्री-पुरुष समानता दर्शानेवाली पंक्तियाँ चुनकर लिखिए: (बोर्ड की नमूना कृतिपत्रिका)
(i) …………………….
(ii) …………………….
उत्तर:
(i) बस बात पते की इतनी है, ध्रुव या रजिया भारत माँ के
(ii) भारत माता के रथ के है, हम दोनों ही, दो-दो पहिए, अजी दो पहिए, हाँ दो पहिए।

कृति 2: (स्वमत अभिव्यक्ति)

प्रश्न.
‘झगड़े से कुछ हासिल नहीं होता’-अपने विचार 25 से 30 शब्दों में लिखिए। (बोर्ड की नमूना कृतिपत्रिका)
उत्तर:
किसी बात पर होने वाली कहा-सुनी या विवाद को आमतौर पर झगड़ा कहा जाता है। झगड़े से समस्या सुलझने के बजाय और उलझ जाती है। मुख्य मुद्दा धरा रह जाता है और झगड़ा प्रमुख हो जाता है। कभी-कभी तो झगड़े में लोगों की जान पर भी बन आती है। इसके परिणामस्वरूप लोगों में मारा-मारी और हत्या तक हो जाती है। पर समस्या वैसी की वैसी बनी रहती है, बल्कि उसमें और इजाफा हो जाता है।

Maharashtra Board Class 10 Hindi Solutions Chapter 6 हम उस धरती की संतति हैं

झगड़े के परिणामस्वरूप पीढ़ी-पीढ़ी तक दुश्मनी बनी रहती है। इसलिए झगड़े को भूलकर आपस में बातचीत के माध्यम से ही किसी समस्या का हल निकालने की बात सोचनी चाहिए। अत: किसी समस्या का हल निकालने का सही मार्ग झगड़ा नहीं, बल्कि शांतिपूर्ण माहौल में आपस में बातचीत कर समझौता करना है।

हम उस धरती की संतति हैं Summary in Hindi

विषय-प्रवेश : कव्वाली एक लोकप्रिय काव्य विधा है। इसमें दो दल अपनी-अपनी तारीफों अथवा किसी विषय पर अपनी राय को रोचक और तार्किक ढंग से नोक-झोंक के रूप में प्रस्तुत करते हैं। अच्छे कव्वाली गायकों को श्रोता रात-रात भर सुनते रहते हैं। हम उस घरती की संतति हैं’ कव्वाली के एक दल में लड़के हैं और दूसरे दल में लड़कियाँ हैं। लड़के देश के प्रसिद्ध महापुरुषों और शूरवीर योद्धाओं से अपना संबंध जोड़कर अपने आप को श्रेष्ठ साबित करते हैं, तो लड़कियाँ सीता, सावित्री तथा युद्ध में अपना पराक्रम दिखाने वाली योद्धा नारियों से अपना संबंध जोड़कर अपने आप को श्रेष्ठ बताती हैं। पर बाद में दोनों दलों को अहसास होता है कि उन्हें इस झगड़े से कोई लाभ नहीं है। स्त्री-पुरुष दोनों भारतमाता के रथ के दो पहियों के समान हैं और देश के लिए दोनों आवश्यक हैं।

हम उस धरती की संतति हैं कविता का सरल अर्थ

1. हम उस धरती ……………………………… धरती के लड़के हैं।

[कविता में लड़कों (पुरुष जाति) को लड़कियों (स्त्रियों) से बढ़-चढ़कर बताते हुए लड़के अपनी प्रशंसा करते हुए कहते हैं -]

“हम उस परती पर रहने वाले लड़के हैं, जिनकी जितनी प्रशंसा की जाए, कम है। यह वही घरती है, जहाँ ध्रुव जैसे महापुरुष का जन्म हुआ था और वे इसी मिट्टी में खेलते थे।

इसी मिट्टी में भक्त प्रहलाद का जन्म हुआ था। सारी दुनिया को मालूम है कि वे अपनी धुन के कितने सच्चे थे।

यहीं पर भरत जैसे वीर और साहसी महापुरुष का जन्म हुआ था। वे इतने निडर थे कि शेरों के मुँह खुलवाकर उनके दाँत गिना करते थे। __जयमल और पत्ता जैसे वीर इसी मिट्टी में पैदा हुए थे, जो अपने जैसा वीर किसी को समझते ही नहीं थे।

लड़के लड़कियों को नीचा दिखाते हुए कहते हैं कि इन सभी कारणों से हम (लड़के) तुम लोगों (लड़कियों) से बढ़कर हैं। इसलिए तुम सब (लड़कियों) हमारा (पुरुषों का) सामना नहीं कर सकती हो। अतः हमारे सामने तुम सब अपना मुँह बंद रखो। कुछ बोलने की कोशिश मत करो।”

2. बातों का जनाब ……………………………… हम उस धरती की लड़की हैं।

(लड़कों को अपनी बड़ाई करते हुए सुनकर लड़कियाँ लड़कों को जवाब देती हैं-)
“आप जैसे लोगों को बात करने का ढंग तक मालूम नहीं है। आप अपनी प्रशंसा खुद न कीजिए और चुप रहिए। (सुनिए) हम उस धरती की लड़कियाँ हैं, जिस धरती का कुछ पूछना ही नहीं है। हम उस धरती, की लड़कियाँ हैं जिसकी मिट्टी में वीरांगना झाँसी की रानी लक्ष्मीबाई का जन्म हुआ था।

दुर्गावती और रजिया सुलताना जैसी मर्दानी वीरांगनाएँ जिस मिट्टी में पैदा हुई थीं, जिन्होंने लड़ाई के मैदान में अपना अद्भुत पराक्रम दिखाया था, हम उस धरती की लड़कियाँ हैं।

चाँद बीबी जैसी वीरांगना और जौहर की ज्वाला में हँसते-हँसते कूद जाने वाली महान नारी पद्मिनी का जन्म भी इसी मिट्टी में हुआ था।

यह सीता और सावित्री जैसी महान सन्नारियों की जन्म-स्थली है।

यदि आप (लड़के) अपने श्रेष्ठ होने की बड़ी-बड़ी बातें करेंगे, तो आप लोग हमारे ताने भी सहिए। याद रखिए, हम (लड़कियाँ) इन सन्नारियों की धरती की लड़कियाँ हैं।

3. यों आप खफा ……………………………… धरती की संतति हैं।

(लड़कियों का जवाब सुनकर लड़के समझदारी की बात करते हुए कहते हैं-)

(हमारी बातों पर) आप नाराज क्यों होती हैं? इसमें आपस में E झगड़े की कोई बात नहीं है।

इस बात में क्या रखा है कि हमसे आप लोग बढ़कर हैं अथवा आप लोगों से हम लोग बढ़कर हैं।

इस तरह की बातें हमें आपस में उलझाकर रख देंगी और इससे न हमें कोई फायदा होगा और न आपको ही। सच्ची बात तो यह है कि ध्रुव (पुरुष) और रजिया (स्त्री) दोनों ही इसी धरती भारत माँ की संतान हैं। हम लोग भारत माता के रथ के (स्त्री-पुरुष रूपी) दो पहिए हैं। हम सब इसी धरती की संतान हैं।

हम उस धरती की संतति हैं मुहावरे-अर्थ

  • शेखी बघारना – स्वयं अपनी प्रशंसा करना।
  • डींग मारना – बड़ी-बड़ी बातें करना।
  • पते की बात कहना – रहस्य की बात बताना।

हम उस धरती की संतति हैं टिप्पणियाँ :

  • ध्रुव : राजा उत्तानपाद और रानी सुनीति के पुत्र। महान विष्णु भक्त। विष्णु ने उन्हें आकाश में सप्तर्षि के पास अटल पद दिया था।
  • प्रहलाद : हिरण्यकशिपु के पुत्र। महान विष्णुभक्त। इनकी रक्षा के लिए विष्णु ने नृसिंह अवतार लेकर हिरण्यकशिपु का वध किया था।
  • भरत : दुष्यंत एवं शकुंतला के पुत्र। इनके नाम पर ही हमारे देश का नाम ‘भारत’ पड़ा।
  • सावित्री : राजा अश्वपति की कन्या। सत्यवान की पत्नी। महान पतिव्रता स्त्री। इन्होंने यम से अपने पति के प्राण छुड़ाए थे।
  • सीता : विदेहाधिपति जनक की कन्या। इन्हें वैदेही, जानकी आदि नामों से भी जाना जाता है। ये जमीन की जोताई करते समय मिली थी, इसलिए इनका सीता नाम पड़ा। श्रीराम की पत्नी।
  • लक्ष्मीबाई : झाँसी की रानी। महान वीरांगना।
  • चाँद बीबी : अहमदनगर राज परिवार की गुणी स्त्री। मुगलों ने निजामशाही की राजधानी अहमदनगर पर आक्रमण किया था, तो चाँद बीबी ने बड़ी बहादुरी से किले पर उनका सामना किया था। पर सरदारों के षड्यंत्र के कारण वह मारी गई।
  • रजिया सुलताना : दिल्ली के सुलतान अल्तमश की बेटी। अल्तमश ने रजिया सुलताना को अपने उत्तराधिकारी के रूप में नियुक्त किया था। वह सेना का नेतृत्व स्वयं करती थी।
  • जयमल-पत्ता : जयमल और पत्ता दोनों महान शूरवीर योद्धा थे। उन्होंने चित्तौड़ पर अकबर द्वारा किए गए हमले का बहादुरी पूर्वक सामना किया था।
  • दुर्गावती : भारत की वीरांगना। उनका जन्म प्रसिद्ध चंदेल राजा कीरत राय के परिवार में हुआ था। वे गोंडवाना राज्य की रानी थीं।
  • पद्मावती : चित्तौड़ के राजा रतनसिंह की पत्नी। अपनी सुंदरता के लिए विख्यात। दिल्ली के सुलतान अलाउद्दीन खिलजी ने उनकी सुंदरता के बारे में सुनकर चित्तौड़ पर आक्रमण कर दिया था। राजपूत बहादुरों ने मरते दम तक उसका सामना किया। अंत में वीरांगना पद्मावती ने अन्य राजपूत स्त्रियों के साथ किल्ले में जौहर कर लिया था।

Class 10 Hindi Lokbharti Textbook Solutions

Upas Class 10 Marathi Chapter 4 Question Answer Maharashtra Board

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Balbharti Maharashtra State Board Class 10 Marathi Solutions Aksharbharati 4 उपास Notes, Textbook Exercise Important Questions and Answers.

Std 10 Marathi Chapter 4 Question Answer

Marathi Aksharbharati Std 10 Digest Chapter 4 उपास Textbook Questions and Answers

प्रश्न 1.
आकृत्या पूर्ण करा.
Maharashtra Board Class 10 Marathi Aksharbharati Solutions Chapter 4 उपास 1


उत्तरः
Maharashtra Board Class 10 Marathi Aksharbharati Solutions Chapter 4 उपास 30
Maharashtra Board Class 10 Marathi Aksharbharati Solutions Chapter 4 उपास 31

Maharashtra Board Class 10 Marathi Aksharbharati Solutions Chapter 4 उपास

प्रश्न 2.
कारणे शोधा.
(अ) वजन कमी करण्यासाठी न बोलण्याचा उपाय पंतांना जमणार नव्हता, कारण ………………………… .
उत्तरः
वजन कमी करण्यासाठी न बोलण्याचा उपाय पंतांना जमणार नव्हता, कारण पंत टेलिफोन ऑपरेटर म्हणून नोकरी करत असल्यामुळे त्यांना दिवसभर बोलावेच लागत होते. न बोलता ते काम करू शकणार नव्हते व काम केले नाही तर खाणार काय? म्हणून.

(आ) बाबा बर्वे पंतांच्या समाचाराला आले नाहीत, कारण ………………………… .
उत्तर:
बाबा बर्वे पंतांच्या समाचाराला आले नाहीत कारण उपास हे त्यांचे खास राखीव कुरण होते.

प्रश्न 3.
पाठाधारे खालील संकल्पनांचा अर्थ स्पष्ट करा.
(अ) भीष्म प्रतिज्ञा
(आ) बाळसेदार भाज्या
(इ) वजनाचा मार्ग भलत्याच काट्यातून जातो
(ई) असामान्य मनोनिग्रह
उत्तर:
(i) भीष्म प्रतिज्ञा : पंतांनी आपले वजन कमी करण्याचे ठरवल्यावर मित्रांकडून वेगवेगळ्या प्रतिक्रिया येऊ लागल्या. त्यांचे एकशे एक्क्याऐंशी पौंड वजन पाहून त्यांची झोप उडाली. परंतु पंतांची झोप उडाली यावर रात्री घोरण्यामुळे त्याच्या धर्मपत्नीचा विश्वास नव्हता. एकूण सर्वांनीच त्यांची चेष्टा केल्यावर त्यांनी ‘दोन महिन्यात पन्नास पौंड वजन कमी करून दाखवीन तर खरा!’ अशी भीष्मप्रतिज्ञा केली म्हणजेच वजन कमी करण्याचा ठाम निश्चय पंतांनी केला.

(ii) बाळसेदार भाज्या : पंतांच्या ‘डाएटच्या’ बाबतीतला कुटुंबाचा उत्साह अवर्णनीय होता. रोज काही काही चमत्कारिक पदार्थ त्यांच्या पानात पडायला लागले. बाळसेदार भाज्यांची स्वयंपाकघरातून हकालपट्टी झाली. म्हणजेच कोबी, कॉलिफ्लॉवर अशा बाळसेदार भाज्यांमुळे पंतांचे वजन वाढेल असे वाटल्यामुळे त्या भाज्या कुटुंबाने आणणे सोडून दिले. शिवाय वजन कमी व्हावे म्हणून शेवग्याच्या शेंगा, पडवळ, भेंडी, चवळीच्या शेंगा अशा सडपातळ भाज्या खाणे सुरू केले.

Maharashtra Board Class 10 Marathi Aksharbharati Solutions Chapter 4 उपास

(iii) वजनाचा मार्ग भलत्याच काट्यातून जातो : पंतांनी वजन घटवण्यासाठी आहारशास्त्राची पुस्तके वाचली. चरबीयुक्त द्रव्ये, प्रोटीनयुक्त पदार्थ या शब्दांबद्दलची त्यांची आस्था वाढली, त्यांनी मित्रांचे सल्ले पाळले उदा. दुपारी झोपणे सोडा, पत्ते खेळणे सोडा, रनिंग करा, बोलणे सोडा, तोंडावर ताबा ठेवा, तूप, लोणी, तळलेले पदार्थ खाणे सोडा, दोरीवरच्या उड्या मारा वगैरे, पंतांनी एक महिन्याचा उपास, निराहार, शास्त्रोक्त आहार, दोरीवरच्या उड्या इत्यादी उग्र साधना करूनही पंताचे वजन झाले, ‘एकशे ब्याण्णव पौंड’, त्यामुळे त्यांनी यापुढे जन्मात डाएटच्या आहारी न जाण्याचे ठरवले. कारण त्यांच्या मते एवढे करूनही वजन काही कमी झाले नाही, कारण वजनाचा मार्ग भलत्याच काट्यातून जातो.

(iv) असामान्य मनोनिग्रहः- मित्र मंडळींचे डाएट बाबतीतले विविध सल्ले पंत पाळत होते. त्यानंतर आचार्य बाबा बर्वे यांच्याकडून मौन पाळण्याचा, तोंडावर ताबा ठेवा, बोलणं सोडा हे सल्ले मिळाल्यावर पंतांनी बोलणं सोडणं शक्य नसल्याचे कबूल केलं. कारण ते टेलिफोन ऑपरेटर होते. मग बाबा म्हणाले की “मग कसलं वजन उतरवणार तुम्ही?” यावर पंतांनी चिडून निश्चय केला बस्स. वजन उतरेपर्यंत उपास! काटकुळे झाल्याची स्वप्न त्यांना पडू लागली, भरल्या ताटावरून ते उठू लागले, बिनासाखरेचा आणि बिनदुधाचाच काय बिनचहाचा चहा ते पिऊ लागले.

साखर पाहून त्यांच्या अंगाचा तिळपापड होई, ते फळांवर जगू लागले, दोरीवरच्या उड्या मारू लागले, कचेरी सुटल्यावर गिरगाव रस्त्याने धावू लागले. पंधरवडाभरात फक्त दोन वेळा साखरभात, एकदा कोळंबीभात, एकदा नागपुरी वडाभात, एवढे अपवाद वगळता त्यांनी भाताला स्पर्श केला नव्हता. पंतांच्या उपासाची चेष्टा करणाऱ्यांनाही पंतांमधील फरक जाणवत होता. पंतांना भीती वाटत होती ती प्रशस्तीने मूठभर मांस वाढण्याची परंतु त्यांचा असामान्य मनोनिग्रह आणि जीभेवर ताबा असल्यामुळे त्यांना वीस ते पंचवीस पौंड वजन कमी होण्याची अपेक्षा होती.

प्रश्न 4.
खालील शब्दसमूहासाठी पाठातून एक शब्द शोधा.
(अ) ठरवलेले व्रत मध्येच सोडणे – [           ]
(आ) वजन घटवण्यासाठी आहार बदलण्याची कल्पना – [           ]
(इ) भाषेचा (नदीसारखा) प्रवाह – [           ]
उत्तर:
(अ) ठरवलेले व्रत मध्येच सोडणे – [व्रतभंग]
(आ) वजन घटवण्यासाठी आहार बदलण्याची कल्पना – [आहारपरिवर्तन]
(इ) भाषेचा (नदीसारखा) प्रवाह – [वाक्प्रवाह]

Maharashtra Board Class 10 Marathi Aksharbharati Solutions Chapter 4 उपास

प्रश्न 5.
अचूक शब्द ओळखून लिहा.
(अ) वडीलांसोबत/वडिलांसोबत/वडिलानसोबत/वडीलानसोबत
(आ) तालमिला/तालमीला/ताल्मीला/ताल्मिला
(इ) गारहाणी/गान्हाणि/गा-हाणी/ग्राहाणी
उत्तर:
(i) वडिलांसोबत
(ii) तालमीला
(iii) गा-हाणी

प्रश्न 6.
खालील वाक्प्रचार व त्यांचे अर्थ यांच्या जोड्या जुळवा.
Maharashtra Board Class 10 Marathi Aksharbharati Solutions Chapter 4 उपास 4
उत्तर:
(i – इ),
(ii – ई),
(iii – अ),
(iv – आ)

प्रश्न 7.
स्वमत.
(अ) दोरीवरच्या उड्या मारण्याच्या प्रसंगातील तुम्हांला समजलेला विनोद स्पष्ट करा.
उत्तरः
पंतांच्याखाजगी उपोषणाची हकीकत चाळीत जाहीर झाल्यानंतर चाळीतील मित्रमंडळींनी त्यांना सल्ले दयायला सुरुवात केली. कु. कमलिनी केंकरेंनी दोरीवरच्या उड्या मारल्यास वजन घटते असा सल्ला दिला. प्रत्यक्षात पंतांनी जेव्हा दोरीवरच्या उड्या मारण्यास सुरुवात केली. तेव्हा पहिली उडी शेवटची ठरली. त्यांच्या आठ गुणिले दहाच्या खोलीत पूर्ण दोरी फिरवणे शक्य नव्हते. त्यामुळे पहिल्या उडीतच दोरी ड्रेसिंग टेबलवरच्या तेलाच्या बाटल्या औषधाच्या बाटल्या खाली घेऊन आली. दुसरी उडी अर्धवट मारण्याच्या प्रयत्नातच ती आचार्य बाबा बर्वेच्या गळ्यात पडली. त्यांचा आधीच पंतांवर राग होता, त्यात ही दोरी गळ्यात पडली त्यामुळे त्यांना नको-नको ऐकून घ्यावे लागले. अशा प्रकारे दोरीवरच्या प्रत्येक उडीला अडथळे येत होते आणि उड्या मारणे शक्य होत नव्हते.ही हास्यास्पद गोष्ट ठरली.

Maharashtra Board Class 10 Marathi Aksharbharati Solutions Chapter 4 उपास

(आ) पंतांच्या उपासाबाबत त्यांच्या पत्नीचा अवर्णनीय उत्साह तुमच्या शब्दांत वर्णन करा.
उत्तर:
पंतांनी वजन कमी करण्यासाठी आहारपरिवर्तन करण्याचे ठरवल्यावर त्यांच्या कुटुंबाचा उत्साह अवर्णनीय होता. रोज काही काही चमत्कारिक पदार्थ पंतांच्या पानात पडायला लागले. एके दिवशी नुसती पडवळे उकडून त्यांनी पंतांना खायला घातली. शेवग्याच्या शेंगा, पडवळ, भेंडी, चवळीच्या शेंगा वगैरे सडपातळ भाज्यांचा खुराक पंतांना देणे त्यांनी चालू केला. कोबी, कॉलिफ्लॉ वर वगैरे बाळसेदार मंडळींची स्वयंपाक घरातून हकालपट्टी झाली. सकाळचा चहा देखील पूर्वीसारखा राहिला नाही. अशा प्रकारे पंतांच्या पत्नीचा अवर्णनीय उत्साह दिसून आला.

(इ) पाठातील तुम्हाला सर्वांत आवडलेला विनोद कोणता? तो का आवडला ते स्पष्ट करा.
उत्तर:
पंतांनी असामान्य मनोनिग्रह आणि जिव्हनियंत्रणानंतर कमीत कमी वीस ते पंचवीस पौंडानी वजन घटेल अशी खात्री बाळगली होती. परंतु वजन काट्यावर वजन करताच महिन्याभरापूर्वी ज्या वजन काट्याने त्यांचे वजन एकशे एक्याऐंशी पौंड दाखवले होते त्याच वजन काट्याने त्यांचे वजन आज एकशे व्याण्णव पौंड दाखवले. शिवाय ‘आप बहुत समझदार और गंभीर है।’ असे भविष्यही दाखवले. पंत एकीकडे पौष्टिक सात्त्विक आहार घेतात. लिंबाचा रस, फलाहार, दूध व दुसरीकडे पंधरा दिवसात चार वेळा भात खाऊन तो अपवाद समजतात आणि वजन कमी झाले असेल अशी खात्री बाळगतात, हा विनोद मला सर्वांत जास्त आवडला.

(ई) तुम्ही एखादा संकल्प केला आणि तो पूर्ण केला नाही तर कुटुंबातील व्यक्ती कोणत्या प्रतिक्रिया व्यक्त करतील, याची कल्पना करून लिहा.
उत्तरः
नववीची परीक्षा झाली व मी पास होऊन दहावीच्या वर्गात गेले. यावर्षी काहीही करून सकाळी लवकर उठून अभ्यास करायचा असा मी संकल्प केला. नुकतीच मे महिन्याची सुट्टी अनुभवलेली असल्यामुळे लवकर उठायची सवय मोडली होती. आईला मी माझ्या संकल्पाविषयी सांगितले. दुसऱ्या दिवसापासून आईने मला सकाळी पाच वाजता उठवायला सुरुवात केली. पहिल्या दिवशी नवा उत्साह असल्यामुळे मी शहाण्या बाळासारखी उठून बसले.

शाळा सुरू झाल्यानंतर सुरुवातीला मैत्रिणीबरोबरच्या गप्पा, खेळ, शाळेतील अभ्यास या सर्वांमुळे मला माझ्या संकल्पाविषयी विसर पडू लागला. इतरांबरोबर मजा करणे कमी झाले. कोणतीही गोष्ट करताना मी यंदा दहावीत आहे याची जाणीव करून दिली जाई. सकाळी लवकर उठून अभ्यास करण्याचा माझा संकल्प आई विसरली नव्हती. आईनेच एकदा घरातील सर्वांच्या देखत माझी चेष्टा केली, घरातील लहान भावंडेही माझी मस्करी करू लागली. खेळणे, टि.व्ही. पाहणे हे सारेच मला पारखे झाले. मग मात्र मी निश्चय केला, की आपण कुणाच्याच चेष्टेचा विषय बनू नये, मी केलेला संकल्प पूर्ण करण्यासाठी मनाची तयारी केली व नियमित लवकर उठून अभ्यास नियमित करू लागले.

Maharashtra Board Class 10 Marathi Aksharbharati Solutions Chapter 4 उपास

Marathi Akshar Bharati Class 10 Textbook Solutions Chapter 4 उपास Additional Important Questions and Answers

प्रश्न १. पुढील उताऱ्याच्या आधारे दिलेल्या सूचनेनुसार कृती करा.
कृती १: आकलन कृती

प्रश्न 1.
आकृतिबंध पूर्ण करा.
उत्तर:
Maharashtra Board Class 10 Marathi Aksharbharati Solutions Chapter 4 उपास 5

प्रश्न 2.
काय ते लिहा.
उत्तर:
(i) पंतांची चाळीत जाहीर झालेली गोष्ट – [खाजगी उपोषण]
(ii) पंतांच्या डोळ्यांपुढे रात्रंदिवस नाचत होते – [एकशे एक्क्याऐंशी पौंड वजन असलेले कार्ड]

प्रश्न 3.
एका वाक्यात उत्तरे लिहा.
(i) पंतांनी कोणती भीष्मप्रतिज्ञा केली?
उत्तर:
“दोन महिन्यात पन्नास पौंड वजन कमी करून दाखवीन तर खरा!” अशी भीष्मप्रतिज्ञा पंतांनी केली होती.

Maharashtra Board Class 10 Marathi Aksharbharati Solutions Chapter 4 उपास

(ii) कोणत्या विचाराने पंतांची झोप उडाली?
उत्तर:
वजन कमी झाले पाहिजे, या विचाराने पंतांची झोप उडाली.

(iii) पंतांच्या धर्मपत्नीचा कशावर अजिबात विश्वास नव्हता?
उत्तर:
पंत पूर्वीसारखे गाढ झोपत नाहीत यावर त्यांच्या धर्मपत्नीचा अजिबात विश्वास नव्हता.

(iv) पंतांना ताटातले पदार्थ न दिसता काय दिसू लागल्या?
उत्तर:
पंतांना ताटातले पदार्थ न दिसता नुसत्या ‘कॅलरीज’ दिसू लागल्या. उताऱ्यानुसार घटनांचा क्रम लावा. वजन उतरवण्याच्या शास्त्रात पारंगत झालेले तज्ज्ञ पंतांना भेटू लागले. चाळीतल्या लोकांनी पंतांच्या उपासाची अवहेलना केली. पंतांच्या खाजगी उपोषणाची हकीकत चाळीत जाहीर झाली.

(iv) पंतांनी दोन महिन्यात पन्नास पौंड वजन कमी करून दाखवीन अशी भीष्मप्रतिज्ञा केली.
उत्तर:
(i) पंतांच्या खाजगी उपोषणाची हकीकत चाळीत जाहीर झाली.
(ii) पंतांनी दोन महिन्यात पन्नास पौंड वजन कमी करून दाखवीन! अशी भीष्मप्रतिज्ञा केली.
(iii) वजन उतरवण्याच्या शास्त्रात पारंगत झालेले तज्ज्ञ पंतांना भेटू लागले.
(iv) चाळीतल्या लोकांनी पंतांच्या उपासाची अवहेलना केली.

कृती २ : आकलन कृती

प्रश्न 1.
उत्तरे लिहा.
उत्तर:
(i) पंतांचे वजन – [एकशे एक्क्याऐंशी पौंड]
(ii) चाळीतल्या लोकांनी पंतांना दिलेला सल्ला – [डाएटचा]

Maharashtra Board Class 10 Marathi Aksharbharati Solutions Chapter 4 उपास

प्रश्न 2.
खालील शब्द मराठीत स्पष्ट करा.
उत्तर:
(i) डाएट – नेहमीचा आहार (आहारावर निबंध)
(ii) प्रोटीन – दूध, अंडी, मांस इ. मधील पोषक द्रव्य
(iii) कॅलरी – अन्नापासून मिळणाऱ्या शक्तीचे (ऊर्जेचे) प्रमाण
(iv) पौंड – वजनाचे एक माप

प्रश्न 3.
कोण कोणास म्हणाले ते लिहा.
उत्तर:
Maharashtra Board Class 10 Marathi Aksharbharati Solutions Chapter 4 उपास 6

प्रश्न 4.
कोण ते लिहा.
उत्तर:
(i) डाएटचा सल्ला देणारी चाळीतील व्यक्ती – [सोकाजी त्रिलोकेकर]
(ii) पंतांना दुरुत्तरे करणारी – [पंतांची धर्मपत्नी]

प्रश्न 5.
चूक की बरोबर ते लिहा.
(i) चाळीतल्या लोकांनी पंतांच्या उपासाची अवहेलना केली.
(ii) प्रोटीनयुक्त पदार्थ, चरबीयुक्त पदार्थ पंत खाऊ लागले.
(iii) वजन कमी झाले पाहिजे, या विचाराने पंतांची झोप उडाली.
(iv) आहार शास्त्रातील तज्ज्ञ व्यक्तींना पंत भेटत नव्हते.
उत्तर:
(i) बरोबर
(ii) चूक
(iii) बरोबर
(iv) चूक

Maharashtra Board Class 10 Marathi Aksharbharati Solutions Chapter 4 उपास

प्रश्न 6.
कंसातील योग्य शब्द वापरून रिकाम्या जागा भरा.
(i) रात्रंदिवस ते ………………………….. माझ्या डोळ्यांपुढे नाचत होते. (कार्ड, दिवस, वजन, घड्याळ)
(ii) आमच्या चाळीतल्या लोकांनी माझ्या उपासाची ………………………….. केली होती. (टिंगल, चेष्टा, मस्करी, अवहेलना)
उत्तर:
(i) कार्ड
(ii) अवहेलना

कृती ३ : स्वमत

प्रश्न 1.
पंतांनी भीष्मप्रतिज्ञा करण्यामागचा हेतू लिहा.
उत्तरः
पंतांनी उपोषण केल्याची खाजगी हकीकत चाळीत जाहीर झाली आणि येताजाता ‘नाही ती भानगड आहे’, ‘उगीच हात दाखवून अवलक्षण’ आहे, ‘पेललं नाही तेव्हा खाजगी झालं!’ अशी वाक्ये त्यांच्या कानावर पडू लागली. पंतांना मात्र रात्रांदिवस ‘एकशे एक्क्याऐंशी पौंड’ वजनाचे कार्ड डोळ्यांपुढे नाचत होते. वजन कमी झाले पाहिजे या विचाराने त्यांची झोप उडाली. झोप कमी झाल्यामुळे वजन कमी होते या विचाराने त्यांना त्याचे काही वाटत नव्हते. पण यावर पत्नीचे दुरुत्तर होते की “घोरत तर असता रात्रभर!” एकूण काय वजन कमी झाले पाहिजे या विचाराने पंतांनी “दोन महिन्यात पन्नास पौंड वजन कमी करून दाखवीन तर खरा!” अशी भीष्मप्रतिज्ञा केली.

प्रश्न 2.
‘चाळ संस्कृती’ चे पाठातून होणारे दर्शन स्पष्ट करा.
उत्तरः
पंत म्हणजे लेखक पु. ल. देशपांडे होत. ते चाळीत राहत असतानाचे वर्णन त्यांनी पाठात केले आहे. यासोबत चाळीतील लोकांचे स्वभाव, चाळीतील लोकजीवन यांची ओळख करून दिली आहे.

चाळ संस्कृतीत लोकांच्या वागण्यातील मोकळेपणा पाठातून दिसून येतो. एकमेकांना नावे ठेवली तरी मनात एकमेकांबद्दल प्रेम असते. कोणतीही गोष्ट चाळीत लपून राहत नाही. ही चाळ संस्कृतीची वैशिष्ट्ये पाठात दिसून येतात.

प्रश्न २. खालील उताऱ्याच्या आधारे दिलेल्या सूचनेनुसार कृती करा:
कृती १: आकलन कृती

प्रश्न 1.
खालील कृती पूर्ण करा.
उत्तर:
Maharashtra Board Class 10 Marathi Aksharbharati Solutions Chapter 4 उपास 7

Maharashtra Board Class 10 Marathi Aksharbharati Solutions Chapter 4 उपास

प्रश्न 2.
एका वाक्यात उत्तरे लिहा.
(i) काशीनाथ नाडकर्णीनी पंतांना कोणती गोष्ट वर्ण्य करायला सांगितली?
उत्तर:
काशीनाथ नाडकर्णीनी पंतांना डाळ वर्ण्य करायला सांगितली.

(ii) बाबूकाकांनी कोणत्या गोष्टी सोडावयास सांगितले?
उत्तरः
बाबूकाकांनी तेल आणि तळलेले पदार्थ सोडावयास सांगितले.

(iii) बसून बसून काय खेळल्याने वजन वाढते?
उत्तरः
बसून बसून पत्ते खेळल्याने वजन वाढते.

(iv) “ए इडिअट! सगळ्याच गोष्टींत जोक काय मारतोस नेमी?” असे जनोबा रेगेंना कोण म्हणाले?
उत्तरः
“ए इडिअट! सगळ्याच गोष्टींत जोक काय मारतोस नेमी” असे जनोबा रेगेंना, सोकाजी त्रिलोकेकर म्हणाले.

प्रश्न 3.
कोण ते लिहा.
उत्तर:
(i) नेहमी तिरके बोलणारे → जनोबा रेगे
(ii) सर्व जनांचे ऐकून मनाचे करायचे ठरवणारे → पंत
(iii) ‘बटाट्याची चाळ’ म्हणू नका. वजन वाढेल! असे उपदेश करणारे → जनोबा रेगे
(iv) या ठिकाणी सगळे भात खातात

प्रश्न 4.
उताऱ्यानुसार वाक्यांचा क्रम लावा.
(i) पहिला उपाय म्हणून मी ‘आहारपरिवर्तन’ सुरू केले.
(ii) “तेल आणि तळलेले पदार्थ आधी सोडा.”
(iii) जनोबा रेगे या इसमाला काय म्हणावे हे मला कळत नाही.
(iv) “ए इडिअट! सगळ्याच गोष्टींत जोक काय मारतोस नेमी?
उत्तर:
(i) जनोबा रेगे या इसमाला काय म्हणावे हे मला कळत नाही.
(ii) “ए इडिअट! सगळ्याच गोष्टींत जोक काय मारतोस नेमी?
(iii) “तेल आणि तळलेले पदार्थ आधी सोडा.”
(iv) पहिला उपाय म्हणून मी ‘आहारपरिवर्तन’ सुरू केले.

Maharashtra Board Class 10 Marathi Aksharbharati Solutions Chapter 4 उपास

कृती २ : आकलन कृती

प्रश्न 1.
कंसातील योग्य शब्द वापरून रिकाम्या जागा भरा.
(i) “मी सांगतो तुला पंत तू …………………………….. सोड”. (तेल, तूप, साखर, बटाटा)
(ii) आमच्या कोकणात सगळे …………………………….. खातात. (भाकरी, मासे, भात, भाजी)
(iii) “हो! ‘म्हणजे कुठं राहता?’ म्हणून विचारलं तर नुसतं …………………………….. राहतो’ म्हणा.” (रस्त्यावर, चाळीत, घरात, बंगल्यात)
(iv) “खरं म्हणजे पत्ते खेळायचं सोडा बसून बसून …………………………….. वाढतं.” (पोट, वजन, हाड, झोप)
उत्तर:
(i) बटाटा
(ii) भात
(ii) चाळीत
(iv) वजन

प्रश्न 2.
कोण कोणास म्हणाले?
उत्तर:
Maharashtra Board Class 10 Marathi Aksharbharati Solutions Chapter 4 उपास 8

Maharashtra Board Class 10 Marathi Aksharbharati Solutions Chapter 4 उपास

प्रश्न 3.
कारणे लिहा.

(i) पंतांना दिवसा झोपणं आणि पत्ते खेळणं सोडावयास सांगितले.
उत्तर:
दिवसा झोपण्यामुळे व पत्ते खेळण्यानं बसून बसून वजन वाढते म्हणून दिवसा झोपणं व पत्ते खेळणं सोडावयास सांगितले.

(ii) पंतांना लोणी-तूप सोडा असे सांगितले.
उत्तर:
पंतांना लोणी-तूप सोडा असे सांगितले कारण त्यांच्या हेडक्लार्कच्या वाईफचं वजन लोणी-तूप सोडल्यानं एका आठवड्यात दहा पौंड घटलं होतं म्हणून त्यांनी हा सल्ला दिला.

कृती ३ : स्वमत

प्रश्न 1.
पंतांना कोणाचा सल्ला तिरकेपणाचा वाटला तुमच्या शब्दांत लिहा.
उत्तर:
पंतांच्या चाळीतील सोकाजी त्रिलोकेकर यांनी पंतांना डाएटचा सल्ला दिला. पंतांना बटाटा सोडण्यास सांगितले. त्यावर जनाबा रेगे म्हणाले की, “हो! म्हणजे कुठं राहाता असं जरी विचारले तरी नुसतं ‘चाळीत राहतो’ असे म्हणायचे” ‘बटाट्याच्या चाळीत’ म्हणायचं नाही. वजन वाढेल. असे हे जनोबा रेगे यांचे बोलणे तिरकेपणाचे होते कारण बाकी सगळ्यांनी पंतांना खाण्याबाबत व त्यांच्या वजन वाढीस पूरक अशा सवयी सोडण्याबाबत सल्ले दिले होते, पण रेगे यांनी ‘बटाट्याची चाळ’ असे सुद्धा न म्हणता फक्त चाळच म्हणा असा तिरकस सल्ला पंतांना दिला.

प्रश्न ३. खालील उताऱ्याच्या आधारे दिलेल्या सूचनेनुसार कृती करा:
कृती १ : आकलन कृती

प्रश्न 1.
आकृतिबंध पूर्ण करा.
उत्तर:
Maharashtra Board Class 10 Marathi Aksharbharati Solutions Chapter 4 उपास 9

Maharashtra Board Class 10 Marathi Aksharbharati Solutions Chapter 4 उपास

प्रश्न 2.
कोण ते लिहा.
उत्तर:
(i) डाएटवर सूड घेणारा → कैंटीनचा आचारी
कचेरीतील साऱ्या सेक्शनला पार्टी देणारा → अण्णा नाडगौडा

प्रश्न 3.
एका वाक्यात उत्तरे लिहा.

(i) व्रतभंगाचा प्रसंग केव्हा आला?
उत्तरः
व्रतभंगाचा प्रसंग दुसऱ्या दिवशी म्हणजे अण्णा नाडगौडाच्या पार्टीच्या दिवशी आला.

(ii) पंतांना डाएटवर असल्याची आठवण केव्हा झाली?
उत्तरः
भज्यांची सहावी प्लेट खाल्ल्यावर पंतांना डाएटवर असल्याची आठवण झाली.

(iii) पंतांच्या वजन घटवण्याच्या व्रताची वार्ता पहिल्या दिवशी कोठे गेली होती?
उत्तर:
पंतांच्या वजन घटवण्याच्या व्रताची वार्ता पहिल्या दिवशी कचेरीला गेली होती.

प्रश्न 4.
कारणे लिहा.

(i) पंतांनी बिन साखरेचा चहा सुरू केला.
उत्तर:
साखरेत सर्वांत अधिक कॅलरीज असतात, म्हणून बिनसाखरेचा चहा पंतांनी सुरू केला.

(ii) पंतांनी फक्त मधला भात वर्ण केला.
उत्तरः
वजन कमी करायचे तर पंतांना भात पूर्णपणे सोडावा लागणार होता परंतु भात अजिबात वर्ण्य करणे अवघड होते म्हणून पंतांनी फक्त पहिला भात आणि ताकभात ठेवून मधला भात वर्ण्य केला.

कृती २ : आकलन कृती

प्रश्न 1.
आकृतिबंध पूर्ण करा.
उत्तर:
Maharashtra Board Class 10 Marathi Aksharbharati Solutions Chapter 4 उपास 10

Maharashtra Board Class 10 Marathi Aksharbharati Solutions Chapter 4 उपास

प्रश्न 2.
कारणे लिहा.

(i) पंतांना खाल्लेले गोड लागत नव्हते.
उत्तरः
पंतांना खाल्लेले गोड लागत नव्हते, कारण आचाऱ्याने मिठाईत साखर न घालता साखरेत मिठाई घालून आणली होती. त्यामुळे घासा-घासागणिक सहस्रावधी कॅलरीज पोटात जात होत्या.

(ii) नाडगौडाने स्पेशल भज्यांची ऑर्डर दिली.
उत्तरः
नाडगौडाने स्पेशल भज्यांची ऑर्डर दिली कारण भज्यांशिवाय पार्टी कसली?’ असा भिकोबा मुसळ्याने टोमणा दिला, म्हणून चेकाळून नाडगौडाने स्पेशल भज्यांची ऑर्डर दिली.

प्रश्न 3.
कंसातील योग्य पर्याय निवडून रिकाम्या जागा भरा.

(i) कुटुंबाला सारी …………………………….. तिखटामिठावर उरकायची सक्त ताकीद दिली. (संक्रांत, दिवाळी, गुढीपाडवा, होळी)
(ii) चिवडा अस्सल …………………………….. तला, त्यामुळे आणखी कॅलरीज, (‘तूप’, ‘तेला’, ‘वनस्पती’, ‘साखरेत’)
उत्तर:
(i) दिवाळी
(ii) ‘वनस्पती’

प्रश्न 4.
सहसंबंध लिहा.

(i) चहा : बिनसाखरेचा : भाजी : ……………………………..
(ii) भजी : स्पेशल : चिवडा : ……………………………..
उत्तर:
(i) उकडलेली
(ii) अस्सल

प्रश्न 5.
चूक की बरोबर लिहा.

(i) ‘सध्या मी ‘डाएट’ वर असल्याचे सांगितल्यावर पंतांना सर्वांनी वेड्यात काढले.
(ii) साखरेत सर्वात अधिक कॅलरीज नसतात.
उत्तर:
(i) बरोबर
(ii) चूक

कृती ३ : स्वमत

प्रश्न 1.
पंतांची ‘साखरबंदी’ वर्णन करा.
उत्तरः
पंतांनी आहारपरिवर्तन सुरू केल्यानंतर साखरेत सर्वांत अधिक कॅलरीज असतात; म्हणून प्रथम बिनसाखरेचा चहा सुरू केला. घरात साखरबंदी जाहीर केली. कुटुंबाला सारी दिवाळी तिखटमिठावर उरकायची सक्त ताकीद दिली. मुलांसाठीच फक्त गोडाधोडाचं करण्याची सवलत ठेवली.

Maharashtra Board Class 10 Marathi Aksharbharati Solutions Chapter 4 उपास

प्रश्न 2.
नाडगौडाला वाईट वाटू नये म्हणून पंतांनी काय केले?
उत्तरः
पंतांच्या व्रताचा पहिला दिवस सुरळीत पार पडला. दुसऱ्या दिवशी मात्र व्रतभंगाचा प्रसंग आला. अण्णा नाडगौडाला प्रमोशन मिळाले; म्हणून त्याने साऱ्या सेक्शनला पार्टी दिली. कँटीनच्या आचाऱ्याने पंतांच्या डाएटवर सूड घ्यायचा असे ठरवून पदार्थ केले होते; पण न खावे तर अण्णा नाडगौडाला वाईट वाटेल; कारण सहा वर्षांनी तो ‘एफिशिएन्सी बार’ च्या जाळ्यातून बाहेर पडला होता. पंतांनी नाडगौडाला वाईट वाटू नये म्हणून, स्वतः ‘डाएट’ वर असतानासुद्धा सर्व पदार्थ भरपूर खाल्ले.

प्रश्न 3.
पत्नीने केलेल्या भाजीची पंत कशी खिल्ली उडवतात?
उत्तरः
पंतांनी आहारपरिवर्तन सुरू केल्यावर नुसती उकडलेली पालेभाजी खाणे कसे जमणार हा विचार पोकळ होता. त्याचा अनुभव ती खाल्ल्यावर आला आणि नेहमीच्या भाजीत आणखी वेगळे काय करते याचा कधी अंदाज आला नाही. म्हणजे एक तर पत्नीने केलेली भाजी बेचव असू शकते अथवा पत्नीने फसवून नेहमीसारखी न उकडता दिलेली असावी; पण पंत मात्र केलेल्या भाजीला नाव ठेवतात. पंत आपल्या पत्नीला नेहमीच्या भाजीत ‘ही’ निराळे काय करते याचा अजूनही अंदाज आला नाही, असा उपरोधिक टोमणा देऊन भाजीची खिल्ली उडवतात.

प्रश्न 4.
‘सध्या मी ‘डाएट’ वर असल्याचे सांगितल्यावर सर्वांनी पंतांना वेड्यात काढले’, स्पष्ट करा.
उत्तरः
पंतांनी व्रत सुरू केले आणि दुसऱ्याच दिवशी अण्णा नाडगौडाच्या प्रमोशनची पार्टी होती. नाडगौडाला वाईट वाटू नये म्हणून पंतांनी पार्टीतील पदार्थ खाल्ले. आचाऱ्याने मिठाईत साखर न घालता साखरेत मिठाई घालून आणली होती. वनस्पती तूपातला चिवडा, बटाटेवडे एवढे सगळे असूनही शेवटी भज्यांशिवाय पार्टी कसली म्हणून भजीही होती. एवढ्या सगळ्यातून सहस्त्रावधी कॅलरीज पोटात चालल्या होत्या. भजीची सहावी प्लेट खाल्ल्यावर पंतांनी आपण डाएटवर असल्याचे केविलवाण्या स्वरात सांगितले, म्हणून सर्वांनी पंतांना वेड्यात काढले.

प्रश्न ४. पुढील उताऱ्याच्या आधारे दिलेल्या सूचनेनुसार कृती करा,
कृती १: आकलन कृती

प्रश्न 1.
आकृतिबंध पूर्ण करा.
उत्तर:
Maharashtra Board Class 10 Marathi Aksharbharati Solutions Chapter 4 उपास 11

Maharashtra Board Class 10 Marathi Aksharbharati Solutions Chapter 4 उपास

प्रश्न 2.
एका वाक्यात उत्तरे लिहा.

(i) जगदाळेंनी कोणता सल्ला दिला?
उत्तरः
पंतांना जगदाळेंनी रनिंग करण्याचा सल्ला दिला.

(ii) कु. कमलिनी केंकरेंनी पंतांना कोणता सल्ला दिला?
उत्तर:
कु. कमलिनी केंकरेंनी पंतांना दोरीवरच्या उड्या मारण्याचा सल्ला दिला.

(iii) पंतांना यापूर्वी कधीच कोणती कल्पना आली नव्हती?
उत्तर:
बिनसाखरेचा चहा इतका कडू लागत असेल अशी यापूर्वी पंतांना कधीच कल्पना आली नव्हती.

प्रश्न 3.
कोण कोणास म्हणाले.
उत्तर:
Maharashtra Board Class 10 Marathi Aksharbharati Solutions Chapter 4 उपास 12

प्रश्न 4.
कंसातील योग्य पर्याय निवडून रिकाम्या जागा भरा.
(i) कुटुंबाचा मात्र माझ्या ‘डाएटच्या’ बाबतीतला उत्साह होता. (जेवढ्यासतेवढा, अवर्णनीय, वर्णनीय, खूप)
(ii) रोज काही काही ……………………. पदार्थ माझ्या पानात पडायला लागले. (चविष्ट, खास, आवडते, चमत्कारिक)
उत्तर:
(i) अवर्णनीय
(ii) चमत्कारिक

कृती २: आकलन कृती

प्रश्न 1.
आकृतिबंध पूर्ण करा.
उत्तर:
Maharashtra Board Class 10 Marathi Aksharbharati Solutions Chapter 4 उपास 13

Maharashtra Board Class 10 Marathi Aksharbharati Solutions Chapter 4 उपास

प्रश्न 2.
काय ते लिहा.
उत्तर:
Maharashtra Board Class 10 Marathi Aksharbharati Solutions Chapter 4 उपास 33
Maharashtra Board Class 10 Marathi Aksharbharati Solutions Chapter 4 उपास 15

प्रश्न 3.
खालील विधाने चूक की बरोबर ते लिहा.
(i) शेवटी सर्वांच्या मते मी सकाळी पोहावे असे ठरले.
(ii) सकाळचा चहा देखील सुरुवातीला होता तसा राहिला नाही.
(iii) सडपातळ भाज्यांची स्वयंपाकघरातून हकालपट्टी झाली.
(iv) बाळसेदार भाज्यांचा खुराक चालू झाला.
उत्तर:
(i) चूक
(ii) बरोबर
(iii) चूक
(iv) चूक

प्रश्न 4.
जोड्या जुळवा.
Maharashtra Board Class 10 Marathi Aksharbharati Solutions Chapter 4 उपास 16
उत्तर:
(i-आ),
(ii – इ),
(iii – अ),
(iv – ई)

कृती ३: स्वमत

प्रश्न 1.
भिकोबा मुसळेने पंतांचे कसे समर्थन केले?
उत्तरः
पंतांनी वजन कमी करण्यासाठी ‘डाएट’ सुरू केले होते. परंतु अण्णा नाडगौडाच्या पार्टीत सहा प्लेट भजी खाऊन सातवी प्लेट झाल्यावर त्यांना आपण सध्या डाएटवर असल्याची आठवण होते. तेव्हा भिकोबा मुसळे पंतांचे समर्थन करतात, की खाण्याचा आणि वजनाचा काय संबंध? ‘मी बघ एकवीस गुलाबजाम खाल्ले. एवढंच काय, आपण तर आयुष्यात एक्सरसाईज नाही केला. तुझी कुंभ रास नि कुंभ लग्न आहे. नुसता वायू भक्षण करून राहिलास तरी असाच जाड्या राहणार. तेव्हा थोडक्यात खाण्यावर बंधन ठेवण्याचे कारण नाही, असे भिकोबांना सांगायचे होते.

Maharashtra Board Class 10 Marathi Aksharbharati Solutions Chapter 4 उपास

प्रश्न 2.
बिनसाखरेचा चहा कडू लागतो हे पंतांच्या केव्हा लक्षात आले?
उत्तरः
पंतांनी डाएट सुरू केल्यापासून त्यांच्या धर्मपत्नीचा उत्साह अवर्णनीय होता. रोज चमत्कारिक पदार्थ त्यांच्या पानात पडू लागले. बाळसेदार भाज्यांची स्वयंपाक घरातून हकालपट्टी केली व सडपातळ भाज्यांचा खुराक सुरू केला. सकाळचा चहा देखील सुरुवातीला होता तसा राहिला नाही. बिनसाखरेचा चहा इतका कडू लागत असेल याची पंतांना कधीच कल्पना आली नाही. पत्नीला यासंबंधी विचारले असता कुटुंबाने खुलासा केला की सुरुवातीचा चहा बिनसाखरेचा नव्हताच मुळी. त्यानंतर पंतांना समजले की बिनसारखेचा चहा कडू लागतो.

प्रश्न 3.
‘बाळसेदार भाज्यांची स्वयंपाकघरातून हकालपट्टी झाली’. स्पष्ट करा.
उत्तरः
पंतांचे डाएट सुरू झाल्यानंतर कुटुंबाचा उत्साह वर्णन करता न येण्यासारखा होता. रोज चमत्कारिक पदार्थ पंतांच्या ताटात पडू लागले. सडपातळ भाज्या शेवग्याच्या शेंगा, पडवळ, भेंडी, चवळीच्या शेंगा यांचा खुराक सुरू केला. पंतांचे वजन कमी व्हावे म्हणून बाळसेदार भाज्या कोबी, कॉलिफ्लॉवरची स्वयंपाक घरातून हकालपट्टी केली.

प्रश्न ५. पुढील उताऱ्याच्या आधारे दिलेल्या सूचनेनुसार कृती करा.
कृती १: आकलन कृती

प्रश्न 1.
कारणे लिहा.

(i) पंतांना सुरुवातीला चहा बिनसाखरेचा असूनही कडू लागला नाही.
उत्तर:
पंतांना सुरुवातीला चहा बिनसाखरेचा असूनही कडू लागला नाही कारण तो बिनसाखरेचा नव्हता म्हणून.

(ii) पंतांना बिनसाखरेचा चहा धर्मपत्नीने दिला नाही.
उत्तर:
पंतांना बिनसाखरेचा चहा न देण्याचे कारण घरात थोडीशीच साखर होती. ती संपेपर्यंत धर्मपत्नीने साखरेचा चहा दयायचे ठरवले.

प्रश्न 2.
पुढील घटनांचे परिणाम लिहा.
उत्तर:
Maharashtra Board Class 10 Marathi Aksharbharati Solutions Chapter 4 उपास 17

Maharashtra Board Class 10 Marathi Aksharbharati Solutions Chapter 4 उपास

प्रश्न 3.
उत्तर:
Maharashtra Board Class 10 Marathi Aksharbharati Solutions Chapter 4 उपास 18

प्रश्न 4.
उताऱ्यानुसार वाक्यांचा क्रम लावा.
(i) “इश्श! साखरेशिवाय लाडू आमच्या नाही घराण्यात केले कुणी!”
(ii) “उगीच आरडाओरडा नका करू.”
(iii) “चहा सुरुवातीला बिनासाखरेचा असूनही कडू लागला नाही.”
(iv) कसलं कमी होतंय माझं वजन?
उत्तर:
(i) “चहा सुरुवातीला बिनासाखरेचा असूनही कडू लागला नाही.”
(ii) कसलं कमी होतंय माझं वजन?
(iii) “उगीच आरडाओरडा नका करू.”
(iv) “इश्श! साखरेशिवाय लाडू आमच्या नाही घराण्यात केले कुणी!”

कृती २ : आकलन कृती.

प्रश्न 1.
कोण कोणास म्हणाले?
उत्तर:
Maharashtra Board Class 10 Marathi Aksharbharati Solutions Chapter 4 उपास 19
Maharashtra Board Class 10 Marathi Aksharbharati Solutions Chapter 4 उपास 20

Maharashtra Board Class 10 Marathi Aksharbharati Solutions Chapter 4 उपास

प्रश्न 2.
कंसातील योग्य पर्याय निवडून रिकाम्या जागा भरा.
(i) चहा सुरुवातीला बिनसाखरेचा असूनही …………………………….. लागला नाही. (गोड, कडू, खारट, आंबट)
(ii) ‘साखरेशिवाय …………………………….. आमच्या नाही घराण्यात केले कुणी! (लाडू, पेढे, वड्या, बर्फी)
उत्तर:
(i) कडू
(ii) लाडू

प्रश्न 3.
चूक की बरोबर ते लिहा.
(i) लाडवाच्या रूपाने काही कॅलरीज पोटात गेल्याच!
(ii) लाडू बशीत ठेवून कुटुंबाने पंताच्या वजनक्षय – संकल्पाला मदत केली.
(iii) सुरुवातीला दिलेला चहा बिनसाखरेचा होता,
उत्तर:
(i) बरोबर
(ii) चूक
(iii) चूक

प्रश्न 4.
घटना क्रमानुसार लिहा.
(i) पंतांच्या वजनक्षय संकल्पाला नवे सुरुंग लावणारे कुटुंबाचे उद्गार
(ii) चहा सुरुवातीला बिनसाखरेचा असूनही कडू लागला नाही.
(iii) चहा बिनसाखरेचा नव्हता याचा खुलासा झाला.
(iv) बिनसाखरेचा चहातील साखरेची उणीव लाडू खाऊन भरून काढली.
उत्तर:
(i) चहा सुरुवातीला बिनसाखरेचा असूनही कडू लागला नाही.
(ii) चहा बिनसाखरेचा नव्हता याचा खुलासा झाला.
(iii) पंतांच्या वजनक्षय – संकल्पाला नवे सुरुंग लावणारे कुटुंबाचे उद्गार
(iv) बिनसाखरेच्या चहातील साखरेची उणीव लाडू खाऊन भरून काढली.

प्रश्न ६. पुढील उताऱ्याच्या आधारे दिलेल्या सूचनेनुसार कृती करा.
कृती १: आकलन कृती

प्रश्न 1.
आकृती पूर्ण करा.
उत्तर:
Maharashtra Board Class 10 Marathi Aksharbharati Solutions Chapter 4 उपास 21

Maharashtra Board Class 10 Marathi Aksharbharati Solutions Chapter 4 उपास

प्रश्न 2.
उत्तरे लिहा.

(i) आचार्य बाबा बर्वेनी पंतांना कोणते सल्ले दिले?
उत्तरः
पंतांचे वजन कमी करण्यासाठी आचार्य बाबा बर्वेनी जिभेवर ताबा ठेवा, संयम राखा, मनाची एकाग्रता ठेवा, बोलणे सोडा, असे सल्ले दिले.

(ii) आचार्य बाबा बर्वेनी पंतांना क्षमा केली.
उत्तरः
पंतांच्या दोरी उड्या मारण्याच्या सरावातील दुसरी उडी मारताना बाबा बर्वेच्या गळ्यात दोरी पडली. यावर बर्वे खूप संतापले व पंतांना म्हणाले, ‘हा दुष्टपणा माझ्या गळ्यात दोरी अडकवून केलात हे ठीक झालं, पण तुमच्या वयाला न शोभणाऱ्या या धिंगामस्तीला दुसरा कोणी माझ्यासारखं बळी पडला असता, तर धडगत नव्हती.’ आणि बर्वेनी पंतांना माफ केले.

प्रश्न 3.
कंसांतील योग्य पर्याय निवडून वाक्ये पूर्ण करा.
(i) मौन ही एक …………………………… आहे. (शक्ती, भक्ती, मुक्ती, उक्ती)
(ii) ‘आता या उड्या मारायला मी …………………………… देखील सोडली.’ (खाज, माज, लाज, व्याज)
(iii) उड्या मारायच्या माझ्या दोरीचे एक टोक हातात धरून बाबा एक तास …………………………… या विषयावर बडबडत होते. (उपासाचे महत्त्व, मौनाचं महत्त्व, वजनाचे महत्त्व, संसाराचे महत्त्व)
उत्तर:
(i) शक्ती
(ii) लाज
(iii) मौनाचं महत्त्व

प्रश्न 4.
का ते लिहा.

(i) पंत बोलणं सोडू शकत नव्हते.
उत्तरः
पंत टेलिफोन – ऑपरेटर असल्यामुळे त्यांना दिवसभर बोलावे लागत असे. न बोलता ते त्यांची नोकरी करू शकणार नव्हते. नोकरी नसेल तर पोटापाण्याचे काय? म्हणून पंत बोलणं सोडू शकत नव्हते.

(ii) पंतांना पश्चात्ताप झाला.
उत्तर:
आचार्य बाबा बर्वेना पंतांच्या वजन घटवण्याची वार्ता समजली, तेव्हा त्यांनी पंतांना वेगवेगळे सल्ले दिले. एक तास मौनाच्या सामर्थ्यावर बोलले. पंतांना मात्र मौन पाळणे शक्य नव्हते. तेव्हा वजन घटणे शक्य नसल्याचे सांगत कारुण्यपूर्वक कटाक्ष टाकत बाबा गेले. तेव्हां पंतांना वाटले की मघाशी बाबांच्या गळ्यात दोरी पडली ती गच्च आवळली का नाही, या विचाराने पंतांना पश्चात्ताप झाला.

Maharashtra Board Class 10 Marathi Aksharbharati Solutions Chapter 4 उपास

कृती २: आकलन कृती

प्रश्न 1.
पुढील घटनांचे परिणाम लिहा.
उत्तर:
Maharashtra Board Class 10 Marathi Aksharbharati Solutions Chapter 4 उपास 22

प्रश्न 2.
जोड्या जुळवा.
Maharashtra Board Class 10 Marathi Aksharbharati Solutions Chapter 4 उपास 23
उत्तर:
(1 – इ),
(ii – अ),
(iii – ई),
(iv – उ)
(v – आ)

प्रश्न 3.
खालील विधाने चूक की बरोबर ते लिहा.
(i) मौनाचं सामर्थ्य मोठं नसते.
(ii) वजन वाढवण्यासाठी पंत दोरीच्या उड्या मारत होते.
(iii) पंतांच्या दिवाणखान्यात दोरी संपूर्ण फिरवणे अवघड होते.
(iv) पंतांच्या समाचाराला चाळीतली सारी मंडळी येऊन गेली.
उत्तर:
(i) चूक
(ii) चूक
(iii) बरोबर
(iv) बरोबर

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प्रश्न 4.
कोण कोणास म्हणाले?
उत्तर:
Maharashtra Board Class 10 Marathi Aksharbharati Solutions Chapter 4 उपास 24

प्रश्न 5.
एका वाक्यात उत्तरे लिहा.

(i) ‘मौनाचं महत्त्व’ या विषयावर कोण बडबडत होते?
उत्तर:
‘मौनाचं महत्त्व’ या विषयावर आचार्य बर्वे बडबडत होते.

(ii) पंत कोणती नोकरी करत होते?
उत्तर:
पंत टेलिफोन – ऑपरेटरची नोकरी करत होते.

प्रश्न 6.
उताऱ्यानुसार वाक्यांचा क्रम लावा.
(i) “बोलण्याचा आणि खाण्याचा संबंध काय?”
(ii) जिभेवर ताबा नाही तुमचा.
(iii) “अहो वजन कमी करायला दोरीच्या उड्या मारतोय मी.”
(iv) ‘उपास’ हे त्यांचे खास राखीव कुरण होते.
उत्तर:
(i) ‘उपास’ हे त्यांचे खास राखीव कुरण होते.
(ii) “अहो वजन कमी करायला दोरीच्या उड्या मारतोय मी.”
(iii) जिभेवर ताबा नाही तुमचा.
(iv) “बोलण्याचा आणि खाण्याचा संबंध काय?”

कृती ३: स्वमत

प्रश्न 1.
आचार्य बाबा बर्वेची स्वभाव वैशिष्ट्ये लिहा.
उत्तरः
आचार्य बाबा बर्वे ही पंतांच्या शेजारच्या खोलीत राहणारी व्यक्ती होती. उपास हे त्यांचे खास कुरण होते. स्पष्टवक्तेपणाने पंतांना सांगणारे, दोरीवरच्या उड्या मारण्यावरून पंतांची कान उघडणी करणारे; पण माफ करणारे, मौनाचे महत्त्व जाणणारे, मौन या विषयावर बोलताना त्यांना स्वत:लाच बोलणे थांबवा असे सांगण्याची आवश्यकता असणारे, पंतांना बोलणं सोडण्याचा उपाय शक्य नाही हे पाहून कारुण्यपूर्ण नजरेने कटाक्ष टाकत ‘मग कसलं वजन उतरवणार तुम्ही.’ असं उघड उघड सांगणारे आचार्य बाबा बर्वे होते.

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प्रश्न 2.
‘जिभेवर ताबा नाही तुमचा.’ या बोलण्यामागची भूमिका स्पष्ट करा.
उत्तरः
पंतांचा उपास सुरू झाल्याची हकीकत चाळीत पसरल्यावर लोक त्यांच्या समाचाराला येऊ लागली. प्रत्येकजण त्यांना वजन घटवण्यासाठी उपाय सुचवू लागला. कोणी खाण्यावर बंधन आणण्यासाठी सांगे तर कोणी शारीरिक व्यायामासाठी सांगे; पण आचार्य बनी मात्र जिभेवर बंधन घातले. म्हणजेच खाणे आणि बोलणे या दोन्ही गोष्टी संयमित हव्यात. जिभेचा जसा खाण्यासाठी उपयोग करतो, तसा बोलण्यासाठी उपयोग होतो. हे पंतांना प्रकर्षाने सांगू इच्छितात. त्यासाठी संयम हवा. मौन पाळले पाहिजे तरच वजन घटेल. अशी आचार्य बाबा बर्वेची बोलण्यामागची भूमिका होती.

प्रश्न ७. पुढील उताऱ्याच्या आधारे दिलेल्या सूचनेनुसार कृती करा.
कृती १: आकलन कृती.

प्रश्न 1.
आकृतिबंध पूर्ण करा.
उत्तर:
Maharashtra Board Class 10 Marathi Aksharbharati Solutions Chapter 4 उपास 25

प्रश्न 2.
एका वाक्यात उत्तरे लिहा.

(i) पंतांच्या अंगाचा तिळपापड केव्हा होई?
उत्तर:
साखर पाहिली की पंतांच्या अंगाचा तिळपापड होई.
(ii) पंतांच्या दोरीवरच्या उड्या मारणे बंद का झाले?
उत्तर:
खालच्या मजल्यावरील मंडळींच्या दुष्टपणाने व आकसाने केलेल्या तक्रारींमुळे पंतांना दोरीवरच्या उड्या मारणे थांबवावे लागले.

(iii) पंतांनी कोणता आहार सुरू केला?
उत्तरः
केवळ पौष्टिक व सात्त्विक आहार पंतांनी सुरू केला.

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प्रश्न 3.
उत्तरे लिहा.

(i) पंधरवडाभरात पंतांनी कोणते अपवाद वगळता भाताला स्पर्श केला नाही?
उत्तर:
पंधरवडाभरात फक्त दोन वेळाच साखरभात झाला.एकदा सोकाजीने चोरून कोळंबीभात चारला व खालच्या मजल्यावरच्या भाऊजी पसरटवारांनी एकदा नागपुरी वडाभात पाठवला होता. एवढे अपवाद वगळल्यास पंतांनी भाताला स्पर्श केला नाही.

(ii) पंतांच्या आहारपरिवर्तनाचा परिणाम लिहा.
उत्तरः
पंतांनी आहारपरिवर्तन करून दहाबारा दिवस झाल्यावर त्यांच्यातला फरक त्यांनाच कळायला लागला. लहान मुले बी पेरले की रोप किती वाढले हे रोप उपटून पाहतात त्याप्रमाणे पंतांना रोज संध्याकाळी वजन काट्यावर वजन करावे असे वाटत होते.

प्रश्न 4.
कंसातील योग्य पर्याय निवडून रिकाम्या जागा भरा, मला मी ………………………… झाल्याची स्वप्ने पडू लागली. (जाडजूड, सडपातळ, काटकुळा, उंच)
(ii) ………………………… ताटावरून मी उठू लागलो. (रिकाम्या, सजवलेल्या, जेवलेल्या, भरल्या)
(iii) बिनसाखरेचा आणि बिनदुधाचाच काय; पण ” देखील चहा मी पिऊ लागलो. (पाण्याचा, दुधाचा, कॉफीचा, बिनचहाचा)
उत्तर:
(i) काटकुळा
(ii) भरल्या
(iii) बिनचहाचा

प्रश्न 5.
चूक की बरोबर ते लिहा.
(i) पंत केवळ फळांवर जगू लागले.
(ii) धारोष्ण दुधासाठी गिरगावातील गोठ्यात जाऊ लागले.
(iii) दोरीवरच्या उड्या मारण्यासाठी खालच्या मजल्यावरील मंडळींनी प्रोत्साहन दिले.
(iv) कचेरी सुटल्यावर पंत गिरगाव रस्त्याने धावत येऊ लागले.
उत्तर:
(i) बरोबर
(ii) चूक
(iii) चूक
(iv) बरोबर.

कृती २: आकलन कृती

प्रश्न 1.
कारणे लिहा.
(i) कचेरी सुटल्यावर, पंत गिरगाव रस्त्याने धावू लागले कारण …………………………
(अ) त्यांना घरी लवकर पोहोचायचे होते.
(आ) मित्रांबरोबर गप्पा मारायच्या होत्या.
(इ) फिरत फिरत पायी येऊन पैसे वाचवायचे होते.
(ई) त्यांना वजन कमी करायचे होते.
उत्तरः
कचेरी सुटल्यावर, पंत गिरगाव रस्त्याने धावू लागले कारण त्यांना वजन कमी करायचे होते.
Maharashtra Board Class 10 Marathi Aksharbharati Solutions Chapter 4 उपास

(ii) लिंबाचा रस पंतांना अमृतासारखा वाटू लागला कारण …………………………
(अ) लिंब स्वस्त होती.
(आ) लिंब आवडत होती.
(इ) लिंबाच्या रसाने वजन कमी होते.
(ई) लिंबाचा सिझन होता.
उत्तर:
लिंबाचा रस पंतांना अमृतासारखा वाटू लागला कारण लिंबाच्या रसाने वजन कमी होते.

प्रश्न 2.
ओघतक्ता तयार करा.
उत्तर:
Maharashtra Board Class 10 Marathi Aksharbharati Solutions Chapter 4 उपास 26

Maharashtra Board Class 10 Marathi Aksharbharati Solutions Chapter 4 उपास

प्रश्न 3.
कसे ते लिहा.
उत्तर:
(i) लिंबाचा रस – अमृतासारखा
(ii) दूध – धारोष्ण
(iii) आहार – पौष्टिक आणि सात्त्विक

प्रश्न 4.
उताऱ्यानुसार वाक्यांचा क्रम लावा.
(i) मग मात्र मी चिडलो आणि निश्चय केला की बस्स.
(ii) लिंबाचा रस तर मला अमृतासारखा वाटू लागला.
(iii) मुख्यत: चरबी युक्त द्रव्ये शरीरात कमी गेली.
(iv) एकूण आहारव्रत जोरात चालू ठेवले.
उत्तर:
(i) मग मात्र मी चिडलो आणि निश्चय केला की बस्स.
(i) लिंबाचा रस तर मला अमृतासारखा वाटू लागला.
(iii) एकूण आहारव्रत जोरात चालू ठेवले.
(iv) मुख्यत: चरबी युक्त द्रव्ये शरीरात कमी गेली.

कृती ३: स्वमत

प्रश्न 1.
पंतांना भात अतिशय प्रिय होता, हे स्पष्ट करा.
उत्तरः
पंतांचे एकूण आहारव्रत जोरदार सुरू होते. केवळ पौष्टिक व सात्विक आहार दहाबारा दिवस चालू होता. त्यांच्यातील फरक त्यांनाच कळत होता. एक महिनाभर तुपाचा थेंब त्यांच्या पोटात जाणार नव्हता. केवळ दूध! असे असताना पंतांनी भात खाणे वर्ण्य केलेले असताना पंधरवडाभरात दोन वेळा साखरभात खाल्ला. एकदा सोकाजीने चोरून कोळंबीभात चारला व भाऊजी पसरवटांनी एकदा नागपुरी वडाभात पाठवला होता, एवढे अपवाद वगळता त्यांनी भाताला स्पर्श केला नाही. आहारव्रत सुरू असताना त्यांच्या समोर आलेल्या भाताचे प्रकार पाहून त्यांचा मोह आवरता आला नाही. यावरून पंतांना भात अतिशय प्रिय खादय होते हे स्पष्ट होते.

प्रश्न 2.
कचेरी सुटल्यावर पंत गिरगाव रस्त्याने धावू का लागले?
उत्तरः
पंतांचे वजन कमी करण्यासाठी त्यांच्या आहारतज्ज्ञ मित्रमंडळींनी विविध उपाय सांगितले.खाणे कमी करण्याबरोबरच शारीरिक व्यायाम व्हावा म्हणून दोरीच्या उड्या व रनिंग करावे असा सल्ला मिळाल्यामुळे पंत कचेरी सुटल्यावर गिरगाव रस्त्याने धावत घरी येऊ लागले.

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प्रश्न 3.
पंतांनी उपास सुरू केल्यापासून त्यांनी केलेल्या कष्टाविषयी माहिती दया.
उत्तरः
पंतांनी वजन कमी व्हावे म्हणून उपासाचा निश्चय केला आणि आहारात बदल घडवून आणला. आहाराबरोबरच त्यांनी शारीरिक कष्टही घेतले. गाईचे दूध आणण्यासाठी ते अंधेरीच्या गोठ्यात जाऊ लागले. कचेरी सुटल्यावर गिरगाव रस्त्याने धावत येऊ लागले. दोरीवरच्या उड्या मारू लागले. या सर्व कष्टांच्या मागे त्यांना आपले वजन कमी व्हावे ही एकच अपेक्षा होती.

प्रश्न ८. पुढील उताऱ्याच्या आधारे दिलेल्या सूचनेनुसार कृती करा.
कृती १: आकलन कृती.

प्रश्न 1.
आकृतिबंध पूर्ण करा.
उत्तर:
Maharashtra Board Class 10 Marathi Aksharbharati Solutions Chapter 4 उपास 27

प्रश्न 2.
कोण कोणास म्हणाले?
उत्तर:
Maharashtra Board Class 10 Marathi Aksharbharati Solutions Chapter 4 उपास 28

Maharashtra Board Class 10 Marathi Aksharbharati Solutions Chapter 4 उपास

प्रश्न 3.
कंसातील योग्य पर्याय निवडून रिकाम्या जागा भरा,
(i) मंडळींच्या प्रशस्तीने मला ……………………………. वाटत होती. (खात्री, वाईट, लाज, भीती)
(ii) छे, छे, वजनाचा मार्ग ……………………………. काट्यातून जातो. (नेहमीच्या, हलक्या, भलत्याच, लोखंडी)
(iii) हल्ली मी वजन आणि ……………………………. या दोन्ही गोष्टींची चिंता करायचे सोडून दिले आहे. (खाणे, पिणे, फिरणे, भविष्य)
उत्तर:
(i) भीती
(ii) भलत्याच
(iii) भविष्य

प्रश्न 4.
घटना क्रमानुसार लिहा.
(i) डाएटच्या आहारी या जन्मात न जाण्याचे ठरवले.
(ii) पंतांच्या डाएटची चेष्टा करणाऱ्यांनी प्रशंसा केली.
(iii) एकशे ब्याण्णव पौंड वजन दाखवले.
(iv) असामान्य मनोनिग्रह आणि जिव्हा नियंत्रण केले.
उत्तर:
(i) पंतांच्या डाएटची चेष्टा करणाऱ्यांनी प्रशंसा केली.
(ii) असामान्य मनोनिग्रह आणि जिव्हा नियंत्रण केले.
(iii) एकशे ब्याण्णव पौंड वजन दाखवले.
(iv) डाएटच्या आहारी या जन्मात न जाण्याचे ठरवले.

कृती २: आकलन कृती

प्रश्न 1.
आकृतिबंध पूर्ण करा.
उत्तर:
Maharashtra Board Class 10 Marathi Aksharbharati Solutions Chapter 4 उपास 29

प्रश्न 2.
उत्तरे ते लिहा.
उत्तर:
(i) पंतांना खात्री होती – [वीस पंचवीस पौंडांनी वजन घटण्याची.]
(i) मंडळींच्या प्रशस्तीने पंतांना भीती वाटत होती – [मूठभर मांस वाढण्याची.]

Maharashtra Board Class 10 Marathi Aksharbharati Solutions Chapter 4 उपास

प्रश्न 3.
चूक की बरोबर ते लिहा.
(i) पंत तुरळक तारीफ ऐकून भुलले.
(ii) पंतांनी डाएटच्या आहारी जन्मात न जाण्याचे ठरवले.
(iii) वजनाच्या यंत्रावर पाय ठेवून पंतांनी दोन रुपयाचे नाणे आत टाकले.
उत्तर:
(i) चूक
(i) बरोबर
(iii) चूक

प्रश्न 4.
एका वाक्यात उत्तरे लिहा.
(i) पंतांनी कोणत्या गोष्टींची चिंता करणे सोडून दिले?
उत्तर:
पंतांनी वजन आणि भविष्य या दोन्ही गोष्टींची चिंता करणे सोडून दिले.

(ii) चाळीतील मंडळी कोणत्या गोष्टींची चेष्टा करत होती?
उत्तरः
चाळीतील मंडळी पंतांची, त्यांच्या डाएटची व त्यांच्या उपासाची चेष्टा करत होती.

प्रश्न 5.
रिकाम्या जागी योग्य विधान घालून वाक्य पूर्ण करा.
(i) माझा एकूण निश्चय पाहून चाळीतल्या मंडळीचे आदर दुणावल्याचे …………………………..
(अ) माझ्या सूक्ष्म नजरेतून सुटत नव्हते.
(आ) त्याच्या सूक्ष्म नजरेतून सुटत नव्हते.
(इ) हिच्या सूक्ष्म नजरेतून सुटत नव्हते.
(ई) माझ्या तीक्ष्ण नजरेतून सुटत नव्हते.
उत्तर:
माझा एकूण निश्चय पाहून चाळीतल्या मंडळीचे आदर दुणावल्याचे माझ्या सूक्ष्म नजरेतून सुटत नव्हते.

(ii) ………………………….. या दोन्ही गोष्टींची चिंता करायचे सोडून दिले आहे.
(अ) वजन आणि घट
(आ) वजन आणि भविष्य
(इ) भविष्य आणि चिंता
(ई) वजन आणि काळजी
उत्तरः
वजन आणि भविष्य या दोन्ही गोष्टींची चिंता करायचे सोडून दिले आहे.

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कृती ३: स्वमत

प्रश्न 1.
चाळीतील मंडळींचा उत्साह दुणावल्याचे कोणत्या उद्गारातून स्पष्ट होते?
उत्तरः
पंतांचा डाएट बद्दलचा एकूण निश्चय पाहून पंतांविषयीचा आदर दुणावला व ते पंतांना जाणवत होते. ज्या मंडळींनी पंतांच्या उपासाची चेष्टा केली त्यांनीच ‘पंत, फरक दिसतोय हं!’ अशी कबुली दयायला सुरुवात केली. जनोबा रेग्यांसारख्या कुजकट शेजाऱ्यालाही ‘पंत, भलतेच काय हो रोडावलेत’ असे मान्य करावे लागले.

प्रश्न 2.
एक महिन्याच्या पंतांच्या उग्र साधनेबद्दल माहिती लिहा.
उत्तर:
पंतांनी आपले वजन घटवण्यासाठी एक महिन्याचा उपास, निराहार, शास्त्रोक्त आहार, दोरीवरच्या उड्या इत्यादी उग्र साधना केली. या साधनेनंतर पंतांना खात्री होती, की आपले वजन वीस ते पंचवीस पौंडांनी घटेल. पंतांनी केलेल्या उपासामुळे त्यांच्यातील फरक लोकांनाही जाणवत होता. त्यामुळे पंतांना नक्की वजन घटणार याची खात्री होती.

प्रश्न 3.
उपास करूनही पंतांचे वजन वाढण्यामागचे कारण कोणते असावे असे तुम्हाला वाटते.
उत्तर:
पंतांनी एक महिन्याचा उपास, निराहार, शास्त्रोक्त आहार, दोरीवरच्या उड्या इत्यादी उग्र साधना केली असे म्हटले असले तरी बिनसाखरेचा समजून साखरेचा चहा, लाडू, पंधरवडाभरात भात वर्ण्य केला असूनही चार वेळा भात खाल्ला होता. एकीकडे निराहार, शास्त्रोक्त आहार घेणारे पंत दुसरीकडे कोण कोणत्या पदार्थांचा आस्वाद घेतला हे मार्मिकतेने सांगतात. एकूण पाठातील उपास हा मार्मिकतेचा विषय असल्यामुळे पंतांच्या वागण्यातील विरोधाभासामुळे वजन घटण्याऐवजी वाढलेले दिसून आले, असे मला वाटते.

स्वाध्याय कृती

स्वमत

प्रश्न 4.
तुम्ही एखादा संकल्प केला आणि तो पूर्ण केला नाही तर कुटुंबातील व्यक्ती कोणत्या प्रतिक्रिया व्यक्त करतील, याची कल्पना करून लिहा.
उत्तरः
नववीची परीक्षा झाली व मी पास होऊन दहावीच्या वर्गात गेले. यावर्षी काहीही करून सकाळी लवकर उठून अभ्यास करायचा असा मी संकल्प केला. नुकतीच मे महिन्याची सुट्टी अनुभवलेली असल्यामुळे लवकर उठायची सवय मोडली होती. आईला मी माझ्या संकल्पाविषयी सांगितले. दुसऱ्या दिवसापासून आईने मला सकाळी पाच वाजता उठवायला सुरुवात केली. पहिल्या दिवशी नवा उत्साह असल्यामुळे मी शहाण्या बाळासारखी उठून बसले.

Maharashtra Board Class 10 Marathi Aksharbharati Solutions Chapter 4 उपास

शाळा सुरू झाल्यानंतर सुरुवातीला मैत्रिणीबरोबरच्या गप्पा, खेळ, शाळेतील अभ्यास या सर्वांमुळे मला माझ्या संकल्पाविषयी विसर पडू लागला. इतरांबरोबर मजा करणे कमी झाले. कोणतीही गोष्ट करताना मी यंदा दहावीत आहे याची जाणीव करून दिली जाई. सकाळी लवकर उठून अभ्यास करण्याचा माझा संकल्प आई विसरली नव्हती. आईनेच एकदा घरातील सर्वांच्या देखत माझी चेष्टा केली, घरातील लहान भावंडेही माझी मस्करी करू लागली. खेळणे, टि.व्ही. पाहणे हे सारेच मला पारखे झाले. मग मात्र मी निश्चय केला, की आपण कुणाच्याच चेष्टेचा विषय बनू नये, मी केलेला संकल्प पूर्ण करण्यासाठी मनाची तयारी केली व नियमित लवकर उठून अभ्यास नियमित करू लागले.

उपास शब्दार्द्ध

  • उपास‌ ‌–‌ ‌निरशन,‌ ‌दिवसभर‌ ‌न‌ ‌जेवणे,‌ ‌निराहार‌‌ – (fasting,‌ ‌a‌ ‌fast)‌ ‌
  • परिवर्तन‌ ‌–‌ ‌मोठा‌ ‌बदल‌ ‌–‌ ‌(a‌ ‌radical‌ ‌change)‌ ‌
  • आचारी‌ ‌–‌ ‌स्वयंपाक‌ ‌करणारा‌ ‌–‌ ‌(a‌ ‌cook)‌ ‌
  • चमत्कारिक‌ ‌–‌ ‌विक्षिप्त,‌ ‌विचित्र‌ ‌–‌ ‌(strange,‌ ‌odd)‌ ‌
  • ‌मौन‌‌ – न‌ ‌बोलणे‌‌ –‌ ‌(silence)‌ ‌
  • धारोष्ण‌ ‌–‌ ‌नुकतीच‌ ‌धार‌ ‌काढली‌ ‌आहे‌ ‌असे‌ ‌ताजे‌ ‌दूध‌‌ – (fresh‌ ‌immediately‌ ‌after‌ ‌milking)‌ ‌
  • सामर्थ्य‌ ‌–‌ ‌शक्ती‌,‌ ‌बळ,‌ ‌क्षमता‌ ‌–‌ ‌(power,‌ ‌ability)‌ ‌
  • पश्चात्ताप‌ ‌–‌ ‌खेद,‌ ‌अनुताप‌ ‌–‌ ‌(respentance)‌ ‌
  • वाक्प्रवाह‌ ‌–‌ ‌अखंड‌ ‌बोलणे‌ ‌–‌ ‌(a‌ ‌flow‌ ‌of‌ ‌speech)‌ ‌
  • एकाग्रता‌ ‌–‌ ‌एकाच‌ ‌गोष्टीत‌ ‌पूर्ण‌ ‌लक्ष‌ ‌असणे‌‌ – (concentration)‌ ‌
  • शास्त्रोक्त‌ ‌–‌ ‌शास्त्रात‌ ‌नमूद‌ ‌केल्याप्रमाणे‌‌ – (scientific)‌ ‌
  • भविष्य‌ ‌–‌ ‌भावी‌ ‌गोष्टीचे‌ ‌पूर्वकथन,‌ ‌भाकीत‌‌ – (prediction)‌ ‌
  • पौष्टिक‌ ‌–‌ ‌ताकद‌ ‌वाढवणारे‌ ‌–‌ ‌(nutritious)‌ ‌
  • सात्विक‌ ‌–‌ ‌सत्वगुणी,‌ ‌शुद्ध,‌ ‌पवित्र‌‌ – (pure,‌ ‌god‌ ‌fearing)‌ ‌
  • दुर्दैव‌ ‌–‌ ‌अभागी,‌ ‌कमनशिबी‌‌ – (unfortunate,‌ ‌unlucky)‌ ‌
  • उग्रसाधना‌ ‌–‌ ‌दुःसह‌ ‌तपश्चर्या‌‌ – (learning‌ ‌the‌ ‌hard‌ ‌way,‌ ‌penance)‌ ‌
  • ‌आहार‌ ‌–‌ ‌नेहमी‌ ‌खाण्याचे‌ ‌अन्न –‌ ‌(adiet)‌ ‌
  • आणेली‌ ‌–‌ ‌जुन्या‌ ‌काळातील‌ ‌एक‌ ‌नाणे‌‌ – (old‌ ‌currency‌ ‌coin)‌ ‌
  • वर्य‌ ‌–‌ ‌टाळण्याजोगे,‌ ‌वगळण्याजोगे – (fit‌ ‌to‌ ‌be‌ ‌avoided)
  • ‌‌खाजगी‌‌ –‌ ‌स्वत:चा‌‌ – (private)‌ ‌
  • उपोषण‌ ‌–‌ ‌अन्न–पाणी‌ ‌वयं‌ ‌करणे‌‌ – (fasting)‌ ‌
  • टीका‌ ‌–‌ ‌गुणदोषांचे‌ ‌विवरण‌ ‌–‌ ‌(criticism)‌‌
  • प्रैंड –‌ ‌वजन‌ ‌मोजण्याचे‌ ‌परिमाण‌‌ – (weight‌ ‌measuring‌ ‌element)‌ ‌
  • घोरणे‌‌ –‌ ‌(to‌ ‌snore)‌ ‌
  • आहारशास्त्र‌ ‌–‌ ‌(sitology)‌ ‌
  • शास्त्र‌ ‌–‌ ‌(येथे‌ ‌अर्थ)‌ ‌कला‌ ‌
  • तज्ज्ञ‌ ‌–‌ ‌जाणकार,‌ ‌ज्ञानी‌ ‌–‌‌ (expert)‌ ‌
  • घटेल‌ ‌–‌ ‌घटणे,‌ ‌कमी‌ ‌होणे‌ ‌–‌‌ (reduce)‌ ‌
  • सल्ला‌ ‌–‌ ‌उपदेश‌‌ – (to‌ ‌advice)‌ ‌
  • लोणी‌ ‌–‌ ‌(butter)‌‌
  • तूप‌‌ –‌ ‌(ghee)‌ ‌
  • आहारपरिवर्तन–‌ ‌जेवणातला‌ ‌बदल‌ ‌–‌ ‌(change‌ ‌in‌ ‌diet)‌ ‌
  • वर्ण्य‌ ‌करणे‌ ‌–‌ ‌त्याग‌ ‌करणे‌‌ – (to‌ ‌avoid)‌ ‌
  • सुरळीत‌ ‌–‌ ‌व्यवस्थित‌‌ – (smoothly)‌ ‌
  • कचेरी‌ ‌–‌ ‌कार्यालय‌‌ – (office)‌ ‌
  • कुंभ‌ ‌रास‌ ‌–‌ ‌(aquarius)‌ ‌
  • वायू‌ ‌–‌ ‌हवा‌‌ – (air)‌ ‌
  • दोरीवरच्या‌ ‌उड्या‌‌ – (skipping)‌ ‌
  • अवर्णनीय‌ ‌–‌ ‌वर्णन‌ ‌करता‌ ‌न‌ ‌येणारे‌ ‌–‌ ‌(indescribable)‌ ‌
  • पडवळ‌ ‌–‌ ‌एक‌ ‌भाजी‌ ‌–‌ ‌(snake‌ ‌gourd)‌ ‌
  • शेवग्याच्या‌ ‌शेंगा‌ ‌–‌ ‌(drum‌ ‌sticks)‌ ‌
  • भेंडी‌ ‌–‌ ‌एक‌ ‌भाजी‌ ‌–‌ ‌(lady‌ ‌finger)‌ ‌
  • संयम‌ ‌–‌ ‌ताबा‌‌ –‌ ‌(control)‌ ‌
  • कटाक्ष‌ ‌–‌ ‌डोळ्यांच्या‌ ‌कोपऱ्यातून‌ ‌टाकलेला‌ ‌दृष्टिक्षेप‌‌ – (a‌ ‌glance)‌ ‌
  • अमृत‌ ‌–‌ ‌पीयुष,‌ ‌सुधा‌ ‌–‌ ‌(rector)
  • गोठा‌ –‌ ‌गुरे‌ ‌बांधण्याची‌ ‌जागा‌ ‌–‌ ‌(cow‌ ‌shed)
  • ‌कुजकट‌ ‌–‌ ‌(येथे‌ ‌अर्थ)‌ ‌वाईट‌ ‌
  • तुरळक‌‌ –‌ ‌क्वचित‌ ‌घडणारी‌ ‌–‌ ‌(rarely)
  • ‌जिव्हा ‌‌ ‌–‌ ‌जीभ‌‌ –‌ ‌(tongue)‌‌

Marathi Aksharbharati Std 10 Digest 

Rang Sahityache Class 10 Marathi Chapter 10 Question Answer Maharashtra Board

Class 10th Marathi Aksharbharati Chapter 10 रंग साहित्याचे Question Answer Maharashtra Board

Balbharti Maharashtra State Board Class 10 Marathi Solutions Aksharbharati Chapter 10 रंग साहित्याचे Notes, Textbook Exercise Important Questions and Answers.

Std 10 Marathi Chapter 10 Question Answer

Marathi Aksharbharati Std 10 Digest Chapter 10 रंग साहित्याचे Textbook Questions and Answers

प्रश्न 1.
प्रस्तुत पाठात आलेल्या साहित्य प्रकारांची नावे लिहा.
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उत्तर:
(i) कथा
(ii) कादंबरी
(iii) कविता
(iv) नाटक
(v) चरित्र
(vi) आत्मचरित्र
(vii) प्रवासवर्णन

प्रश्न 2.
आकृतिबंध पूर्ण करा.
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उत्तर:
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प्रश्न 3.
फरक स्पष्ट करा.
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उत्तर:
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प्रश्न 4.
खाली दिलेल्या अनेकवचनी नामांचे एकवचनी रूप लिहून त्यांचा वापर करून प्रत्येकी एक वाक्य तयार करा.
(i) रस्ते
(ii) वेळा
(iii) भिंती
(iv) विहिरी
(v) घड्याळे
(vi) माणसे
उत्तर:
(i) रस्ते – रस्ता – हा रस्ता रूंद व डांबरी आहे.
(ii) वेळा – वेळ – सकाळची वेळ अभ्यासासाठी चांगली असते.
(iii) भिंती – भिंत – चीनची भिंत खूप उंच व लांब आहे.
(iv) विहिरी – विहीर – गावाकडची विहीर पाण्याने भरली आहे.
(v) घड्याळे – घड्याळ – भिंतीवरचे घड्याळ सुशोभित दिसते.
(vi) माणसे – माणूस – कष्टाळू व इमानदार माणूस बक्षिसपात्र असतो.

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प्रश्न 5.
खालील शब्दांना ‘पर’ हा एकच शब्द जोडून नवीन अर्थपूर्ण शब्द तयार होतात. ते बनवा. मराठी भाषेतील अशा विपुल शब्दसंपत्तीचा अभ्यास करा. त्याप्रमाणे वेगवेगळे शब्द तयार करा.
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उत्तर:
Maharashtra Board Class 10 Marathi Aksharbharati Solutions Chapter 10 रंग साहित्याचे 16

प्रश्न 6.
खालील सामासिक शब्दांचा समास ओळखून तक्ता पूर्ण करा.
यथामती, प्रतिदिन, आईवडील, चारपाच, त्रिभुवन, केरकचरा, भाजीपाला, चहापाणी, आजन्म, गैरशिस्त, विटीदांडू, पापपुण्य, स्त्रीपुरुष
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उत्तर:
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प्रश्न 7.
स्वमत.
(अ) पुस्तकाशी मैत्री करण्याचे फायदे लिहा.
उत्तरः
पुस्तकांशी मैत्री म्हणजे निर्भेळ आनंदच. पुस्तके आपल्याशी बोलतात, त्यांचे विचार प्रगट करतात. ज्ञान देतात. चांगल्या कामासाठी प्रेरणा देतात. कठीण संकल्पना सोप्या करून सांगतात. चित्रांद्वारे, शब्दांतून मनमोकळ्या गप्पा मारतात. शब्दसंग्रह वाढवितात. प्रसंगी विविध स्थळांना भेटी दिल्याचा आनंद देतात. पुस्तके आपल्यावर कधीही रागावत नाहीत. रूसत नाहीत. भांडत नाहीत. काही अपेक्षा ठेवत नाहीत. म्हणून त्यांच्याशी मैत्री करून आपणही त्यांची काळजी घेणे तितकेच गरजेचे आहे.

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(आ) तुम्हाला आवडलेल्या कोणत्याही एका साहित्यप्रकाराची वैशिष्ट्ये तुमच्या शब्दांत लिहा.
उत्तरः
मला आवडलेला साहित्यप्रकार म्हणजे कादंबरी. कादंबरी म्हणजे मोठी कथाच. विविध पात्रांनी, प्रसंगांनी नटलेली, सजलेली. कादंबरी जर खुमासदार असेल तर, ती हातातून सोडवत नाही. पुढे काय होणार याची उत्कंठा लागते. त्यातील पात्रांचा परिचय होतो व ती पात्रे आपल्याला आपल्यातीलच वाटू लागतात. कादंबरीत मन रममाण होते. सुखाच्या प्रसंगात भान हरपते. दु:खी प्रसंगाने अतिशय वाईटही वाटते, इतके तादात्म्य कादंबरीशी साधता येते. ‘ययाति’, ‘स्वामी’, या कादंबऱ्या माझ्या आवडत्या आहेत.

(इ) ‘उत्तम लेखक होण्यासाठी उत्तम वाचक होणे आवश्यक असते’, याबाबत तुमचे विचार स्पष्ट करा.
उत्तरः
‘वाचाल तर वाचाल’ या उक्तीप्रमाणे वाचनाने आपणांस अनेक लाभ होतात. वाचनाने शब्द संपत्ती वाढते. नवनवीन संकल्पना कळतात. विचार प्रगल्भ होतात, लेखक होण्यासाठी या सर्वांचा उपयोग होतो. समाजातील चालीरिती, संस्कृती, नवीन शोध, पर्यटन, शैक्षणिक स्तर यांची माहिती वाचनाने मिळते. विचारांची बैठक पक्की होते. काळाचे भान येते. नव्या जुन्या गोष्टी कळतात. उत्तम विचार समर्थ लेखणीद्वारे प्रगट होतात.

(ई) तुम्हाला आवडलेल्या पुस्तकाबाबत खालील मुद्द्यांचा विचार करून माहिती लिहा.
(१) पुस्तकाचे नाव
(२) लेखक
(३) साहित्यप्रकार
(४) वर्ण्य विषय
(५) मध्यवर्ती कल्पना
(६) पुस्तकातून मिळणारा संदेश
(७) मूल्य
(८) सामाजिक महत्त्व
(९) आवडण्याची कारणे
उत्तरः
मला ‘पांडुरंग सदाशिव साने’ लिखित ‘श्यामची आई’ हे पुस्तक आवडते. हा ‘कादंबरी’ साहित्यप्रकार असून प्रस्तुत कादंबरीत श्याम हे मुख्य पात्र आहे. बालपणी त्यावर झालेले संस्कार, आईने लावलेले वळण, घरची गरीबी पण संस्कारांची श्रीमंती अशा मिश्रणातून घडलेला श्याम म्हणजे स्वतः लेखक पांडुरंग सदाशिव साने, अर्थात साने गुरूजी. मोठेपणी स्वातंत्र्य लढ्यात सहभागी झाले.

गांधीवादाचा पुरस्कार केला. कारागृहात रोज रात्री आपल्या इतर कैदी मित्रांसोबत लहानपणीच्या सर्व आठवणींना उजाळा दिला. रोज एक कथा सांगण्याचा परिपाठ झाला व त्यातून ‘श्यामची आई’ पुस्तक साकारले. धारिष्ट्य, खरेपणा, स्वाभिमान, निखळप्रेम, सहिष्णूता या गोष्टींचा अंतर्भाव या कादंबरीत ओतप्रोत भरला आहे.

आजच्या तंत्रज्ञानाच्या युगात बुद्ध्यांक जरी वाढला तरी भावनांक कमी झाला आहे. ही कादंबरी वाचून समानता, आदरभाव, स्वाभिमान, सच्चेपणा या मुल्यांची सजवणूक समाजात होईल, आईविषयीचे नितांत प्रेम, आईचे ही खरे मार्गदर्शन अशा वात्सल्यतेची अपूर्व कहाणी ‘श्यामची आई’ मध्ये असल्याने ही कादंबरी आवडते.

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Marathi Akshar Bharati Class 10 Textbook Solutions Chapter 10 रंग साहित्याचे Additional Important Questions and Answers

प्रश्न १. खालील उताऱ्याच्या आधारे दिलेल्या सूचनेनुसार कृती करा.

कृती १ : आकलन कृती

प्रश्न 1.
आकृतिबंध पूर्ण करा.
उत्तरः
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प्रश्न 2.
चौकटीत उत्तरे लिहा.
उत्तरः
(i) सुश्रुतची सहल या गावी नेण्याचे ठरले – [भिलार]
(ii) मुलामुलींचा वेश करून आले – [पुस्तके]
(ii) कथेचे दुसरे नाव – [गोष्ट]

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प्रश्न 3.
कोण कोणास म्हणाले?
उत्तरः
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कृती २ : आकलन कृती

प्रश्न 1.
खालील शब्द उत्तर येईल असे प्रश्न तयार करा,
(i) हातात हात घालून
(ii) लहानपणापासूनच.
उत्तर:
(i) काही पुस्तके कशी नाचत होती?
(ii) कथेची ओळख सुश्रुतला केव्हापासून आहे?

प्रश्न 2.
सहसंबंध लिहा.
(i) सूचना : वर्ग : : सहल : ……………………………..
उत्तर:
भिलार

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प्रश्न 3.
कंसातील योग्य शब्द वापरून रिकाम्या जागा भरा,
(i) सुश्रुतच्या वर्गाची …………………………….. गावाला सहल नेण्याचे ठरले. (किल्लारी, भिलार, पुणे, ठाणे)
(ii) काही पुस्तके मुला – मुलींचा वेश करून आणि हातात हात घालून …………………………….. गाणी गात आहेत. (नाचत, बागडत, आनंदाने, उत्साहाने)
उत्तर:
(i) भिलार
(ii) आनंदाने

प्रश्न 4.
खालील प्रश्नांची एका वाक्यात उत्तरे लिहा.

(i) सुश्रुतला कथा आपले दुसरे नाव काय सांगते?
उत्तर:
सुश्रुतला कथा आपले दुसरे नाव ‘गोष्ट’ असे सांगते.

(ii) सुश्रुतची आजी त्याला कोणत्या गोष्टी सांगायची?
उत्तर:
सुश्रुतची आजी त्याला कोल्हा, उंदीर, ससा-कासव यांच्या गोष्टी सांगायची.

(iii) अरे आम्ही सर्व तुला भेटायला आलो आहोत, असे सुश्रुतला कोण म्हणाले?
उत्तर:
अरे आम्ही सर्व तुला भेटायाला आलो आहोत, असे सुश्रुतला पुस्तकाच्या वेशातील मुले म्हणाली.

प्रश्न २. खालील उताऱ्याच्या आधारे दिलेल्या सूचनेनुसार कृती करा.

कृती १ : आकलन कृती

प्रश्न 1.
आकृतिबंध पूर्ण करा.
उत्तरः
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प्रश्न 2.
खालील प्रश्नांची उत्तरे एका वाक्यात लिहा.

(i) कलाकृती उत्तम केव्हा होते?
उत्तरः
दर्जेदार कथा असली की कलाकृती उत्तम होते.

(ii) कथेच्या यशाचे रहस्य काय?
उत्तर:
उत्तम निवेदनतंत्राचा वापर हे कथेच्या यशाचे रहस्य आहे.

(iii) कादंबरी वाचताना वाचक कशात रममाण होतो?
उत्तरः
कथानकात पुढे काय होईल याच्या विचारात कादंबरी वाचताना वाचक गुंतून जातो व रममाण होतो.

(iv) कथेची थोरली बहीण कोण?
उत्तर:
कथेची थोरली बहीण कादंबरी होय.

प्रश्न 3.
कंसातील योग्य शब्द वापरून रिकाम्या जागा भरा.
(i) …………………………… म्हणजे खरं तर मोठी कथाच; पण माझा आवाका कथेपेक्षा पार मोठा! (कथा, निबंध, कादंबरी, संवाद)
(ii) साहित्य क्षेत्रातील सर्वोच्च मानाचा …………………………… पुरस्कार वि. स. खांडेकर यांच्या ययाति या कादंबरीला मिळाला. (अर्जुन, ज्ञानपीठ, साहित्य)
(iii) कवितेची शब्दरचना अर्थपूर्ण व …………………………… असते. (चपखल, लयबद्ध, वैशिष्ट्यपूर्ण, आशययुक्त)
(iv) उत्तम …………………………… तंत्रामुळे मी खुलत जाते, रंगत जाते किंबहुना उत्तम निवेदनतंत्राचा वापर हे माझ्या यशाचं रहस्य. (भाषण, कथन, निवेदन, अनुवादन)
उत्तर:
(i) कादंबरी
(ii) ज्ञानपीठ
(iii) चपखल
(iv) निवेदन

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कृती २ : आकलन कृती

प्रश्न 1.
आकृतिबंध पूर्ण करा.
उत्तरः
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प्रश्न 2.
सकारण लिहा.

(i) कवितांची व आपली फार पूर्वीपासून चांगलीच ओळख आहे.
उत्तर:
शालेय जीवनात पाठ्यपुस्तकातील सगळ्या कविता तालासुरांत म्हटल्या जातात.

(ii) मराठी माणसांचा ऊर अभिमानानं भरून आला.
उत्तरः
साहित्य क्षेत्रातील सर्वोच्च मानाचा ‘ज्ञानपीठ’ पुरस्कार वि. स. खांडेकर यांच्या ‘ययाति’ या कादंबरीला मिळाला.

प्रश्न 3.
चूक की बरोबर ते लिहा.

(i) ‘ही आवडते मज मनापासुनी शाळा’ आणि ‘श्रावणमासी हर्ष मानसी’ या सुश्रुतच्या नावडत्या कविता होत्या.
(ii) कादंबरी म्हणजे खरं तर मोठी कथाच.
उत्तर:
(i) चूक
(ii) बरोबर

कृती ३ : स्वमत

प्रश्न 1.
तुम्ही दूरदर्शनवर किंवा प्रत्यक्षात पाहिलेल्या काव्य संमेलनाविषयी तुमचे मत लिहा.
उत्तर:
होळीच्या निमित्ताने भरलेल्या काव्यसंमेलनास मला प्रत्यक्ष उपस्थित राहण्याचा योग आला. मोठ्या व्यासपीठावर अनेक कवी, कवयित्री विराजमान होते. प्रत्येक जण आपली कविता विशिष्ट हावभावांसहित, चालीत म्हणून दाखवीत होते. कवितांची रचना अर्थपूर्ण व चपखल होती. कल्पनांचा सुंदर आविष्कार होता. काही कविता सामाजिक होत्या तर काही कविता हास्यरसपूर्ण होत्या. श्रोते मनापासून कवितांना दाद देत होते. कवीच्या आवाजातील चढउतार, त्यांचे हावभाव कौतुकास्पद होते. काही कवितांमध्ये अनुप्रासामुळे गोडवा होता. उत्प्रेक्षा, उपमा, रूपक अलंकारांनी सजलेल्या या कविता मनाला मोहून गेल्या. काव्यसंमेलन कधी संपले ते कळले नाही. कविता गुणगुणतच आम्ही बाहेर पडलो.

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प्रश्न ३. खालील उताऱ्याच्या आधारे दिलेल्या सूचनेनुसार कृती करा.

कृती १ : आकलन कृती

प्रश्न 1.
आकृतिबंध पूर्ण करा.
उत्तरः
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प्रश्न 2.
खालील प्रश्नांची उत्तरे एका वाक्यात लिहा.

(i) सामान्य लोकांची मते कशी बदलतात?
उत्तर:
चरित्र वाचनाने सामान्य लोकांची मते बदलतात,

(ii) चरित्र कसे असते?
उत्तर:
चरित्र संघर्षमय, कर्तृत्ववान, संधीचे सुवर्णसंधीत रूपांतर करणारे असते.

(iii) चरित्र कसे जन्माला येते?
उत्तर:
एखादया थोर व्यक्तिमत्त्वाच्या आयुष्याची गाथा लिहिण्याची प्रेरणा लेखकाला मिळते व चरित्र जन्माला येते.

(iv) नाटककाराची कोणती अपेक्षा असते?
उत्तरः
नाटक वाचनीय आणि प्रेक्षणीय व्हावं अशी नाटककाराची अपेक्षा असते.

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प्रश्न 3.
कंसातील योग्य शब्द वापरून रिकाम्या जागा भरा.
(i) …………………………. नाटकाचे लेखक वि. वा. शिरवाडकर म्हणजेच कवीवर्य कुसुमाग्रज. (‘नटसम्राट’, ‘विठ्ठल तो आला’, ‘गिधाड’, ‘कुलांगार’)
(ii) माझं रंगमंचावर सादरीकरण होणार याचे भान ठेवूनच …………………………. माझी मांडणी करतो. (कादंबरीकार, कथाकार, कविताकार, नाटककार)
उत्तर:
(i) ‘नटसम्राट’
(ii) नाटककार

कृती २ : आकलन कृती

प्रश्न 1.
कारणे शोधा.

(i) नाटक मराठी माणसाच्या हृदयात अढळ स्थान प्राप्त करते कारण . . .
उत्तरः
पात्ररचना, चुरचुरीत संवाद आणि नाट्यमय घटना प्रसंग यांमुळे नाटक मराठी माणसाच्या हृदयात अढळ स्थान प्राप्त करते.

(ii) २७ फेब्रुवारीला मराठी दिन साजरा करतात कारण . . .
उत्तर:
२७ फेब्रुवारी हा ‘ज्ञानपीठ’ पुरस्काराचे मानकरी कविवर्य कुसुमाग्रज म्हणजे वि.वा.शिरवाडकर यांचा जन्मदिन आहे. त्यांच्या साहित्य सेवेमुळेच त्यांचा जन्मदिवस मराठी दिन म्हणून साजरा करतात.

प्रश्न 2.
वर्गीकरण करा.
वसंत कानेटकर, रणजित देसाई, पु.ल. देशपांडे, धनंजय गाडगीळ, प्र.के. अत्रे, भा.द.खेर, राम गणेश गडकरी, मधुसुदन कालेलकर, बाबासाहेब पुरंदरे
उत्तरः
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प्रश्न 3.
योग्य पर्याय निवडून विधान पूर्ण करा.
(i) संतकाव्यापासून पंतकाव्य, मध्ययुगीन काव्य, शाहिरी काव्य अशी वळणे घेत आधुनिक काळात मी …
(अ) मुक्त छंदाचे रूप धारण केले आहे.
(आ) करूण रसाचे रूप धारण केले आहे.
(इ) अभंग छंदाचे रूप धारण केले आहे.
(ई) मुक्त छंदाचे रूप स्वीकारले आहे
उत्तर:
संतकाव्यापासून पंतकाव्य, मध्ययुगीन काव्य, शाहिरी काव्य अशी वळणे घेत आधुनिक काळात मी मुक्त छंदाचे रूप धारण केले आहे.

प्रश्न 4.
चूक की बरोबर लिहा.
(i) ‘नटसम्राट’ नाटकाचे लेखक कुसुमाग्रज म्हणजेच वि. वा. शिरवाडकर.
(ii) थोरांची चरित्रे सामान्यांना धोका देतात.
उत्तर:
(i) बरोबर
(ii) चूक

कृती ३ : स्वमत

प्रश्न 1.
‘नाटक कलाकाराला घडवते’ याचे समर्थन करणारे विचार तुमच्या शब्दांत मांडा.
उत्तरः
साहित्यप्रकारातील ‘नाटक’ हा भाग म्हणजे विलक्षण आव्हानात्मक, नाट्यसंहिता लिहिण्यापासून ते थेट रंगमंचापर्यंतचा नाटकाचा प्रवास हा विविधांगी असतो. उत्कृष्ट लेखन, उत्कृष्ट दिग्दर्शन व उत्कृष्ट अभिनय यावर नाटकाचे यश अवलंबून असते, नाटकात काम करणारे कलाकार शब्दांना मूर्तरूप देतात. प्रेक्षकांच्या मनावर पकड करतात. संवादफेक, शब्दांचे उच्चार, आवाजातील चढ-उतार, नाटकाचा आशय व त्यातून समाजाला मिळणारा संदेश याची जबाबदारी कलाकारावर असते. कलाकार त्या भूमिकेत मनापासून शिरल्याखेरीज ती भूमिका प्रभावी होत नाही. नाटक कलाकाराच्या रोमारोमांत भिनलेले असते. म्हणून नाटक कलाकाराची सर्वांगीण प्रगती करते व त्याला घडवते.

प्रश्न ४. खालील उताऱ्याच्या आधारे दिलेल्या सूचनेनुसार कृती करा.

कृती १ : आकलन कृती

प्रश्न 1.
आकृतिबंध पूर्ण करा.
उत्तरः
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Maharashtra Board Class 10 Marathi Aksharbharati Solutions Chapter 10 रंग साहित्याचे 11

Maharashtra Board Class 10 Marathi Aksharbharati Solutions Chapter 10 रंग साहित्याचे

प्रश्न 2.
मी कोण ते लिहा.
उत्तरः
(i) एखादया व्यक्तिच्या आयुष्याचे वर्णन – [चरित्र]
(ii) स्वत:च्या जीवनप्रवासाचे तटस्थपणे केलेले वर्णन – [आत्मचरित्र]

प्रश्न 3.
खालील प्रश्नांची उत्तरे एका वाक्यात लिहा.

(i) आत्मचरित्रात तटस्थपणे कशाचे कथन आढळते?
उत्तरः
आत्मचरित्रात आयुष्यात आलेल्या विविध टप्प्यांचे, वळणांचे, भल्याबुऱ्या अनुभवांचे तटस्थपणे केलेले कथन आढळते.

(ii) घरी बसून दूरच्या गावी नेणारे कोण असते?
उत्तरः
घरी बसून दूरच्या गावी नेणारे प्रवासवर्णन असते.

(iii) प्रवासवर्णनात लेखकाचे कसब कोणते?
उत्तरः
माहिती रटाळ, कंटाळवाणी न होऊ देता रंजक पद्धतीने मनोवेधक भाषेत मांडणं हे लेखकाचं कसब असतं.

(iv) सर्व साहित्य मित्रांमुळे सुश्रुतला काय फायदा होणार आहे ?
उत्तरः
सर्व साहित्य मित्रांमुळे मनोरंजन होऊन ज्ञानही वाढेल व लेखनही सुधारेल.

कृती २: आकलन

प्रश्न 1.
आकृती पूर्ण करा.
उत्तरः
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प्रश्न 2.
सकारण लिहा.
प्रवासवर्णन रंजक होते –
उत्तरः
लेखक त्या ठिकाणच्या माहितीबरोबर स्वत:चे अनुभव, भावना, निसर्गसौंदर्य, व्यक्तिविशेष यांची सुरेख मांडणी करतो.

प्रश्न 3.
योग्य पर्याय निवडा.
(i) सुश्रुतला साहित्य मित्रांशी मैत्री करायला आवडेल कारण . . .
(अ) ते सुश्रुतला बक्षिस देतील.
(ब) ते सुश्रुतला कधीच सोडून जाणार नाही.
(क) ते सप्तरंगी इंद्रधनुष्यासारखे आहेत.
(ड) ते सुश्रुतशी खेळतील.
उत्तरः
सुश्रुतला साहित्य मित्रांशी मैत्री करायला आवडेल कारण ते सुश्रुतला कधीच सोडून जाणार नाही.

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(ii) मी प्रेक्षणीय ठिकाणांची माहिती वाचकांपर्यंत पोहोचवतो –
(अ) लेखक
(ब) कवी
(क) चित्रकार
(ड) प्रवासवर्णन
उत्तरः
मी प्रेक्षणीय ठिकाणांची माहिती वाचकांपर्यंत पोहोचवतो प्रवासवर्णन.

प्रश्न 4.
कंसातील योग्य शब्द वापरून रिकाम्या जागा भरा.
(i) …………………………….. रंग विविध हे, भुलविती साऱ्या रसिकजना. (विषयाचे, साहित्याचे, कथेचे, निबंधाचे)
(ii) धन्य आमुची …………………………….. मराठी, धन्य साहित्यसंपदा. (माय, मातृ, श्रेष्ठ, कनिष्ठ)
उत्तर:
(i) साहित्याचे
(ii) माय

कृती ३ : स्वमत

प्रश्न 1.
‘आत्मचरित्र म्हणजे लेखकाच्या जीवनाचा आरसा’ हे विधान स्पष्ट करा.
उत्तरः
आत्मचरित्र म्हणजे लेखकाने स्वत:च्या जीवनप्रवासाचे तटस्थपणे केलेले वर्णन. विविध वळणांचे, आयुष्यातील भल्या-बुऱ्या घटनांचे लेखक तटस्थपणे वर्णन करून शब्दात मांडतो. त्यात खोटेपणाला वाव नसतो. जे घडले ते जसेच्या तसे मांडण्याचा त्याचा प्रामाणिक प्रयत्न असतो.

जसा आरसा जे आहे तसेच दाखवतो तसेच आत्मचरित्र ही घडलेल्या घटना अतिरंजीत न करता जशाच्या तशा दाखवते. त्यात लेखकाचा संघर्ष असू शकतो, त्याचे कर्तृत्व, त्याचा मान-अपमान व त्याची गुणवैशिष्ट्ये आत्मचरित्रातून दिसतात. अनेक आत्मचरित्रे बोधप्रद असतात. त्यातून जिद्द, चिकाटी, सच्चेपणा हे गुण शिकता येतात. मी स्वातंत्र्यवीर सावरकर व गांधीजीचे चरित्र वाचले आहे. खरोखरच आत्मचरित्र म्हणजे लेखकाच्या जीवनाचा आरसा असतो हे तेव्हा उमगले.

स्वाध्याय कृती

(७) स्वमत

(i) पुस्तकाशी मैत्री करण्याचे फायदे.
उत्तरः
पुस्तकांशी मैत्री म्हणजे निर्भेळ आनंदच. पुस्तके आपल्याशी बोलतात, त्यांचे विचार प्रगट करतात. ज्ञान देतात. चांगल्या कामासाठी प्रेरणा देतात. कठीण संकल्पना सोप्या करून सांगतात. चित्रांद्वारे, शब्दांतून मनमोकळ्या गप्पा मारतात. शब्दसंग्रह वाढवितात. प्रसंगी विविध स्थळांना भेटी दिल्याचा आनंद देतात. पुस्तके आपल्यावर कधीही रागावत नाहीत. रूसत नाहीत. भांडत नाहीत. काही अपेक्षा ठेवत नाहीत. म्हणून त्यांच्याशी मैत्री करून आपणही त्यांची काळजी घेणे तितकेच गरजेचे आहे.

(ii) तुम्हांला आवडलेल्या कोणत्याही साहित्यप्रकाराची वैशिष्ट्ये तुमच्या शब्दात लिहा.
उत्तरः
मला आवडलेला साहित्यप्रकार म्हणजे कादंबरी. कादंबरी म्हणजे मोठी कथाच. विविध पात्रांनी, प्रसंगांनी नटलेली, सजलेली. कादंबरी जर खुमासदार असेल तर, ती हातातून सोडवत नाही. पुढे काय होणार याची उत्कंठा लागते. त्यातील पात्रांचा परिचय होतो व ती पात्रे आपल्याला आपल्यातीलच वाटू लागतात. कादंबरीत मन रममाण होते. सुखाच्या प्रसंगात भान हरपते. दु:खी प्रसंगाने अतिशय वाईटही वाटते, इतके तादात्म्य कादंबरीशी साधता येते. ‘ययाति’, ‘स्वामी’, या कादंबऱ्या माझ्या आवडत्या आहेत.

Maharashtra Board Class 10 Marathi Aksharbharati Solutions Chapter 10 रंग साहित्याचे

(iii) ‘उत्तम लेखक होण्यासाठी उत्तम वाचक होणे आवश्यक असते’ यावर तुमचे विचार स्पष्ट करा.
उत्तरः
‘वाचाल तर वाचाल’ या उक्तीप्रमाणे वाचनाने आपणांस अनेक लाभ होतात. वाचनाने शब्द संपत्ती वाढते. नवनवीन संकल्पना कळतात. विचार प्रगल्भ होतात, लेखक होण्यासाठी या सर्वांचा उपयोग होतो. समाजातील चालीरिती, संस्कृती, नवीन शोध, पर्यटन, शैक्षणिक स्तर यांची माहिती वाचनाने मिळते. विचारांची बैठक पक्की होते. काळाचे भान येते. नव्या जुन्या गोष्टी कळतात. उत्तम विचार समर्थ लेखणीद्वारे प्रगट होतात.

रंग साहित्याचे Summary in Marathi

रंग साहित्याचे पाठपरिचय‌
प्रत्येक‌ ‌भाषा‌ ‌विविध‌ ‌साहित्यप्रकारांनी‌ ‌नटलेली‌ ‌असते.‌ ‌असे‌ ‌साहित्यप्रकार‌ ‌मानवी‌ ‌रूप‌ ‌घेऊन‌ ‌या‌ ‌पाठातून‌ ‌स्वपरिचय‌ ‌करून‌ ‌देत‌ ‌आहेत,‌ ‌भाषासमृद्धीकरणासाठी‌ ‌साहित्यप्रकारांचा,‌ ‌त्यांच्यातील‌ ‌वैशिष्ट्यांचा‌ ‌उपयोग‌ ‌होतो.‌ ‌या‌ ‌साहित्यप्रकारांशी‌ ‌मैत्री‌ ‌केली,‌ ‌तर‌ ‌मनोरंजनाबरोबर‌ ‌आपले‌ ‌ज्ञानही‌ ‌वाढेल‌ ‌असा‌ ‌संदेशही‌ ‌पाठातून‌ ‌दिला‌ ‌आहे.‌ ‌नाट्यस्वरूपातील‌ ‌हा‌ ‌पाठ‌ ‌साहित्यातील‌ ‌विविध‌ ‌कलाकृतींचा‌ ‌परिचय‌ ‌करून‌ ‌देणारा‌ ‌आहे.‌‌

Maharashtra Board Class 10 Marathi Aksharbharati Solutions Chapter 10 रंग साहित्याचे 23

रंग साहित्याचे Summary in English

Every‌ ‌language‌ ‌is‌ ‌enhanced‌ ‌by‌ ‌a‌ ‌body‌ ‌of‌ ‌literature.‌ ‌When‌ ‌different‌ ‌types‌ ‌of‌ ‌literature‌ ‌take‌ ‌human‌ ‌form‌ ‌and‌ ‌introduce‌ ‌themselves,‌ ‌they‌ ‌add‌ ‌to‌ ‌the‌ ‌beauty‌ ‌of‌ ‌language.‌ ‌The‌ ‌various‌ ‌characteristics‌ ‌of‌ ‌literature‌ ‌help‌ ‌in‌ ‌this‌ ‌process.‌ ‌If‌ ‌we‌ ‌get‌ ‌acquainted‌ ‌with‌ ‌these‌ ‌literary‌ ‌types,‌ ‌we‌ ‌not‌ ‌only‌ ‌get‌ ‌entertained‌ ‌but‌ ‌also‌ ‌acquire‌ ‌a‌ ‌fair‌ ‌amount‌ ‌of‌ ‌knowledge.‌ ‌This‌ ‌message‌ ‌is‌ ‌conveyed‌ ‌through‌ ‌this‌ ‌lesson.‌ ‌This‌ ‌animated‌ ‌lesson‌ ‌introduces‌ ‌us‌ ‌to‌ ‌various‌ ‌types‌ ‌of‌ ‌literary‌ ‌divisions.‌‌

रंग साहित्याचे ‌शब्दार्थ‌

  • सहल‌ ‌–‌ ‌यात्रा‌‌ –‌ ‌(picnic)‌ ‌
  • वेश‌ ‌–‌ ‌पोशाख‌‌ –‌ ‌(costume)‌ ‌
  • सूचना‌ ‌–‌ ‌बातमी‌‌ –‌ ‌(notice)‌ ‌
  • ओळख‌ ‌–‌ ‌परिचय‌‌ – (introduction)‌ ‌
  • कथा –‌ ‌गोष्ट‌‌ – (story)‌ ‌
  • आकर्षक‌ ‌–‌ ‌लक्षवेधी‌‌ –‌ ‌(attractive)‌ ‌
  • परिणामकारक‌ ‌–‌ ‌प्रभावी‌ ‌–‌ ‌(effective)‌ ‌
  • शेवट‌‌ –‌ ‌समारोप‌‌ – (ending)‌ ‌
  • साहसकथा‌ ‌–‌ ‌शौर्यकथा‌‌ – (adventurous)‌ ‌
  • परीकथा‌ ‌–‌ ‌पऱ्यांच्या‌ ‌गोष्टी‌ ‌–‌ ‌(fairly‌ ‌tales)‌ ‌
  • बोधकथा‌ ‌–‌ ‌नीतीकथा‌‌ – (moral‌ ‌stories)‌ ‌
  • नाटक‌ ‌–‌ ‌नाटिका‌ ‌–‌ ‌(drama,‌ ‌play)‌ ‌
  • मालिका‌ ‌–‌ ‌संलग्नकथा‌ ‌–‌ ‌(episodes)‌ ‌
  • चित्रपट‌ ‌–‌ ‌सिनेमा‌‌ –‌ ‌(movies)‌ ‌
  • दर्जेदार‌ ‌–‌ ‌गुणवत्तापूर्ण‌ ‌–‌ ‌(qualitative)‌ ‌
  • उत्तम‌ ‌–‌ ‌सुरेख‌‌ –‌ ‌(excellent)‌ ‌
  • निवेदन‌ ‌–‌ ‌कथन‌‌ –‌ ‌(statement)‌ ‌
  • तंत्र –‌ ‌पद्धत‌ ‌–‌ ‌(technique)‌ ‌
  • यश‌ ‌–‌ ‌सफलता‌ ‌–‌ ‌(success)‌ ‌
  • रहस्य‌ ‌–‌ ‌गुपीत‌‌ – (mystery)‌ ‌
  • तृप्त‌ ‌–‌ ‌समाधान‌‌ –‌ ‌(satisfaction)‌ ‌
  • कादंबरी‌ ‌–‌ ‌अखंड‌ ‌मोठी‌ ‌कथा‌ ‌–‌ ‌(novel)‌ ‌
  • आवाका‌ ‌–‌ ‌पसारा‌ ‌–‌ ‌(volume)‌‌
  • पात्र‌ कलाकार‌ ‌–‌ ‌(characters)‌ ‌
  • ‌परस्पर‌ एकमेकांशी‌ ‌–‌ ‌(inter‌ ‌related)‌ ‌
  • ‌उत्कंठा‌‌ –‌ ‌उत्सुकता‌ ‌–‌ ‌(eagerness)‌
  • सर्वोच्च‌‌ –‌ ‌अत्यंत‌ ‌मोठा‌‌ –‌ ‌(highest)
  • पुरस्कार‌ ‌‌–‌‌ ‌बक्षिस‌‌ –‌ ‌(award)‌ ‌
  • आटोपशीर‌ ‌–‌ ‌नेमके‌‌ –‌ ‌(handily)‌‌
  • आशय‌‌ –‌ ‌हेतू‌‌ –‌ ‌‌(purpose)‌
  • वैशिष्ट्य‌‌ –‌ ‌विशिष्टता‌‌ –‌ ‌(peculiarity)‌ ‌
  • यमक‌‌ ‌–‌ एक‌ ‌शब्दालंकार‌ ‌–‌ ‌(homonym)‌ ‌
  • अनुप्रास‌ –‌ ‌एक‌ ‌शब्दालंकार‌ ‌–‌ ‌(alliteration)
  • ‌उपमा‌‌ –‌ ‌‌एक‌ ‌अर्थालंकार‌ ‌–‌ ‌(example)‌
  • रूपक‌‌ ‌–‌ ‌एक‌ ‌अर्थालंकार‌ ‌–‌ ‌(metaphor)‌ ‌
  • चपखल‌ ‌–‌ ‌तंतोतंत‌ ‌–‌ ‌(precise)‌ ‌
  • आविष्कार‌ ‌–‌ ‌प्रगटीकरण‌ ‌–‌ ‌(manifestation)‌ ‌
  • रूपांतर‌ ‌–‌ ‌परिवर्तन‌ ‌–‌ ‌(transfiguration)‌ ‌
  • निरीक्षण‌ ‌–‌ ‌बारकाईने‌ ‌पहाणे‌ ‌–‌ ‌(observation)‌ ‌
  • अर्थालंकार‌‌ –‌ ‌एक‌ ‌अलंकाराचा‌ ‌प्रकार‌‌ (figure‌ ‌of‌ ‌speech)‌ ‌
  • अर्थपूर्ण‌ ‌–‌ ‌उद्देशपूर्ण‌ ‌–‌ ‌(meaningful)‌ ‌
  • कल्पना‌ ‌–‌ ‌कल्पित‌‌ (imagination)‌
  • संवाद ‌–‌ ‌संभाषण‌ ‌–‌ ‌(dialogue)‌‌

Marathi Akshar Bharati Class 10th Digest 

Class 10 Hindi Chapter 1 Barshahi Jalad Question Answer Maharashtra Board

Std 10 Hindi Chapter 1 Barshahi Jalad Question Answer Maharashtra Board

Balbharti Maharashtra State Board Class 10 Hindi Solutions Lokbharti Chapter 1 बरषहिं जलद Notes, Textbook Exercise Important Questions and Answers.

Hindi Lokbharti 10th Digest Chapter 1 बरषहिं जलद Questions And Answers

Hindi Lokbharti 10th Std Digest Chapter 1 बरषहिं जलद Textbook Questions and Answers

कृति

कृतिपत्रिका के प्रश्न 2 (अ) तथा प्रश्न 2 (आ) के लिए।

सूचना के अनुसार कृतियाँ कीजिए:

प्रश्न 1.
कृति पूर्ण कीजिए:
Maharashtra Board Class 10 Hindi Solutions Chapter 1 बरषहिं जलद 1
उत्तर:
Maharashtra Board Class 10 Hindi Solutions Chapter 1 बरषहिं जलद 5

Maharashtra Board Class 10 Hindi Solutions Chapter 2 दो लघुकथाएँ

प्रश्न 2.
निम्न अर्थ को स्पष्ट करने वाली पंक्तियाँ लिखिए:
a. संतों की सहनशीलता …………………………….
b. कपूत के कारण कुल की हानि …………………………….
उत्तर:
a. खल के बचन संत सह जैसे।
b. कपूत के कारण कुल की हानि – जिमि कपूत के उपजे, कुल सदधर्म नसाहिं।।

प्रश्न 3.
तालिका पूर्ण कीजिए:
Maharashtra Board Class 10 Hindi Solutions Chapter 1 बरषहिं जलद 2
उत्तर:
इन्हें – यह कहा है
(i) नदी के जल का समुद्र में मिलना – ईश्वर को प्राप्त कर स्थिर हुआ जीव
(ii) सज्जनों के सद्गुण – तालाब में जल भरना

प्रश्न 4.
जोड़ियाँ मिलाइए:
Maharashtra Board Class 10 Hindi Solutions Chapter 1 बरषहिं जलद 3
उत्तर:
(i) नव पल्लव से भरा वृक्ष -साधक के मन का विवेक
(ii) उपकारी की संपत्ति -ससि संपन्न पृथ्वी
(iii) मेढक की ध्वनि -बटुक समुदाय द्वारा वेद-पाठ
(iv) कलियुग में धर्म का पलायन – चक्रवाक पक्षी का न दिखना कर जाना

प्रश्न 5.
इनके लिए पद्यांश में प्रयुक्त शब्द:
Maharashtra Board Class 10 Hindi Solutions Chapter 1 बरषहिं जलद 4
उत्तर:
Maharashtra Board Class 10 Hindi Solutions Chapter 1 बरषहिं जलद 13

Maharashtra Board Class 10 Hindi Solutions Chapter 2 दो लघुकथाएँ

प्रश्न 6.
प्रस्तुत पद्यांश से अपनी पसंद की किन्हीं चार पंक्तियों का सरल अर्थ लिखिए।

उपयोजित लेखन

कहानी लेखन: ‘परहित सरिस धर्म नहिं भाई इस सुवचन पर आधारित कहानी लेखन कीजिए।

Hindi Lokbharti 10th Textbook Solutions Chapter 1 बरषहिं जलद Additional Important Questions and Answers

पद्यांश क्र.1
प्रश्न. निम्नलिखित पठित पद्यांश पढ़कर दी गई सूचनाओं के अनुसार कृतियाँ कीजिए:

कृति 1: (आकलन)

प्रश्न 1.
आकृति पूर्ण कीजिए:
(i) मन डर रहा है इनका – [ ]
(ii) बिजली की तुलना की गई है इससे – [ ]
(iii) भूमि के पास आए बादल ऐसे लगते हैं – [ ]
(iv) विद्यार्थी जिसे पाने के लिए पढ़ाई करते हैं – [ ]
उत्तर:
(i) मन डर रहा है इनका – [श्रीराम का]
(ii) बिजली की तुलना की गई है इससे [दुष्ट की प्रीति से]
(iii) भूमि के पास आए बादल ऐसे लगते हैं – [विद्वान की तरह]
(iv) विद्यार्थी जिसे पाने के लिए पढ़ाई करते हैं – [विद्या]

प्रश्न 2.
आकृति पूर्ण कीजिए:
Maharashtra Board Class 10 Hindi Solutions Chapter 1 बरषहिं जलद 6
उत्तर:
Maharashtra Board Class 10 Hindi Solutions Chapter 1 बरषहिं जलद 10

Maharashtra Board Class 10 Hindi Solutions Chapter 2 दो लघुकथाएँ

प्रश्न 3.
जोड़ियाँ मिलाइए:
(i) दमकती बिजली – दुष्टों के वचन
(ii) भूमि पर गिरा पानी – राम का डरना
(iii) बूंदों का प्रहार – दुष्ट की मित्रता
(iv) बादलों की गर्जना – माया से लिपटा जीव
उत्तर:
(i) दमकती बिजली – दुष्ट की मित्रता
(ii) भूमि पर गिरा पानी – माया से लिपटा जीव
(iii) बूंदों का प्रहार – दुष्टों के वचन
(iv) बादलों की गर्जना – राम का डरना

प्रश्न 4.
आकृति पूर्ण कीजिए:
Maharashtra Board Class 10 Hindi Solutions Chapter 1 बरषहिं जलद 8
उत्तर:
Maharashtra Board Class 10 Hindi Solutions Chapter 1 बरषहिं जलद 12

प्रश्न 5.
निम्नलिखित अर्थ को स्पष्ट करने वाली पंक्तियाँ लिखिए:
(i) संतों की सहनशीलता।
(ii) जीव की निश्चिंतता।
(iii) रास्तों का अदृश्य हो जाना।
(iv) विद्वानों की विनम्रता
उत्तर:
(i) खल के बचन संत सह जैसे।
(ii) होई अचल जिमि जिव हरि पाई।
(iii) हरित भूमि तृन संकुल, समुझि परहि नहिं पंथ।
(iv) जथा नवहिं बुध विद्या पाएँ।

Maharashtra Board Class 10 Hindi Solutions Chapter 2 दो लघुकथाएँ

कृति 2: (शब्द संपदा)

प्रश्न 1.
निम्नलिखित शब्दों के तत्सम रूप लिखिए:
(i) थिर – ………………………………………..
(ii) जथा – ………………………………………..
(iii) सदगुन – ………………………………………..
(iv) अघात – ………………………………………..
उत्तर:
(i) थिर -स्थिर
(ii) जथा – यथा
(iii) सदगुन – सद्गुण
(iv) अघात – आघात।

प्रश्न 2.
निम्नलिखित शब्दों के समानार्थी शब्द लिखिए:
(i) जलनिधि = ……………………
(ii) गिरि = ……………………
(iii) नदी = ……………………
(iv) जल = ……………………
उत्तर:
(i) जलनिधि = समुद्र
(ii) गिरि = पहाड़
(iii) नदी = सरिता
(iv) जल = पानी।

कृति 3: (सरल अर्थ)

प्रश्न.
प्रस्तुत पद्यांश की प्रथम चार पंक्तियों का सरल अर्थ 25 से 30 शब्दों में लिखिए।
उत्तर:
बादल आकाश में उमड़-घुमड़कर भयंकर गर्जना कर रहे हैं। श्रीराम जी कह रहे हैं कि ऐसे में सीता जी के बिना उनका मन भयभीत हो रहा है। बिजली आकाश में ऐसे चमक रही है, जैसे दुष्ट व्यक्ति की मित्रता स्थिर नहीं रहती । कभी वह बनी रहती है और कभी टूटने के कगार पर पहुँच जाती है। बादल धरती के नजदीक आकर बरस रहे हैं। उनका यह व्यवहार ठीक उसी प्रकार लगता है, जैसे विद्वान व्यक्ति विद्या पाकर विनम्र हो जाते हैं। बादल भी जल के भार से झुक गए हैं और पृथ्वी के नजदीक आकर अपने जल से प्राणियों को तृप्त कर रहे हैं। पहाड़ों पर वर्षा की बूदों की चोट पड़ रही है, पर पहाड़ चुपचाप शांत भाव से यह आघात उसी प्रकार सहते जा रहे हैं, जैसे संत लोग दुष्टों के कटुवचन सह लेते हैं और उस पर कोई प्रतिक्रिया नहीं करते।

Maharashtra Board Class 10 Hindi Solutions Chapter 2 दो लघुकथाएँ

पदयांश क्र. 2
प्रश्न. निम्नलिखित पठित पद्यांश पढ़कर दी गई सूचनाओं के अनुसार कृतियाँ कीजिए:

कृति 1: (आका

प्रश्न 1.
आकृति पूर्ण कीजिए:
Maharashtra Board Class 10 Hindi Solutions Chapter 1 बरषहिं जलद 14
उत्तर:
Maharashtra Board Class 10 Hindi Solutions Chapter 1 बरषहिं जलद 15

प्रश्न 2.
उत्तर लिखिए:
इनकी तुलना की गई है, इनसे –
(i) रात के अंधकार में जुगनू – [ ]
(ii) ससि (अनाज) से भरपूर घरती – [ ]
(iii) कृषि को निराने वाले किसान – [ ]
(iv) दिखाई न देने वाला चक्रवाक – [ ]
उत्तर:
(i) रात के अंधकार में जुगनू – [घमंडियों के समाज से]
(ii) ससि (अनाज) से भरपूर धरती – [उपकारी की संपति से]
(iii) कृषि को निराने वाले किसान – [मोह-मद-मान त्यागने वाले विद्वान से]
(iv) दिखाई न देने वाला चक्रवाक – [कलियुग पाकर भाग जाने वाले धर्म से]

प्रश्न 3.
निम्नलिखित शब्दों के लिए पद्यांश में प्रयुक्त शब्द खोजकर लिखिए:
(i) ग्रह – [ ]
(ii) पेड़ – [ ]
(iii) पत्ते – [ ]
(iv) उपग्रह – [ ]
(v) पौधा – [ ]
उत्तर:
(i) ग्रह – [पतंग (सूर्य)]
(ii) पेड़ – [बिटप]
(iii) पत्ते – [पात]
(iv) उपग्रह – [महि]
(v) पौधा – [अर्क-जवास]

Maharashtra Board Class 10 Hindi Solutions Chapter 2 दो लघुकथाएँ

प्रश्न 4.
तालिका पूर्ण कीजिए:
इन्हें – यह कहा है
(i) ………………….. – बटु समुदाय
(ii) (नव पल्लव वाले) वृक्ष – …………………..
(iii) (लुप्त हुई) धूल – …………………..
(iv) ………………….. – ज्ञान उत्पन्न हुआ
उत्तर:
इन्हे – यह कहा है
(i) दादुर – बटु समुदाय
(ii) (नव पल्लव वाले) वृक्ष – ज्ञान प्राप्त कर प्रफुल्लित होने वाला साधक
(iii) (लुप्त हुई) धूल – क्रोध के कारण लुप्त हुआ धर्म
(iv) (विषयों से विरक्त) मनुष्य – ज्ञान उत्पन्न हुआ।

प्रश्न 5.
उत्तर लिखिए:
पद्यांश में आया –
(i) एक प्रसिद्ध धर्मग्रंथ – [ ]
(ii) चित्त का मनोविकार या उग्र भाव – [ ]
(iii) एक प्रसिद्ध पक्षी – [ ]
(iv) वह शब्द, जिसके दो अर्थ हैं, जिनमें से एक का अर्थ सूर्य है – [ ]
उत्तर:
(i) एक प्रसिद्घ धर्मग्रंथ – [वेद]
(ii) चित्त का मनोविकार या उग्र भाव – [क्रोध]
(iii) एक प्रसिद्ध पक्षी – [चक्रवाक (चकवा)]
(iv) वह शब्द, जिसके दो अर्थ हैं, जिनमें से एक का अर्थ सूर्य है – [पतंग]

प्रश्न 6.
निम्न अर्थ को स्पष्ट करने वाली पंक्तियाँ लिखिए:
(i) कुसंग से ज्ञान नष्ट होना और सुसंग से ज्ञान उत्पन्न होना। – [ ]
उत्तर:
(i) कुसंग से ज्ञान नष्ट होना और सुसंग से ज्ञान उत्पन्न होना। – बिनसइ-उपजइ म्यान जिमि, पाइ कुसंग-सुसंग

कृति 2 : (शब्द संपदा)

प्रश्न 1.
निम्नलिखित शब्दों के अर्थ वाले शब्द पद्यांश से ढूँढ़कर लिखिए:
(i) हुए – ……………………….
(ii) जैसे – ……………………….
(iii) कहीं – ……………………….
(iv) की – ……………………….
उत्तर:
(i) हुए – भए, भयऊ।
(ii) जैसे – जनु, जस।
(iii) कहीं – कतहुँ।
(iv) की – कै।

Maharashtra Board Class 10 Hindi Solutions Chapter 2 दो लघुकथाएँ

प्रश्न 2.
निम्नलिखित शब्दों के लिंग पहचानकर लिखिए:
(i) दादुर
(ii) धूरी (धूल)
(iii) धर्म
(iv) प्रजा
उत्तर:
(i) दादुर – पुल्लिग
(ii) धूरी (धूल) – स्त्रीलिंग
(iii) धर्म – पुल्लिग
(iv) प्रजा – स्त्रीलिंग।

कृति 3 : (सरल अर्थ)
प्रश्न.
उपर्युक्त पद्यांश की अंतिम चार पंक्तियों (दोहा) का सरल अर्थ 25 से 30 शब्दों में लिखिए।
उत्तर :
कभी-कभी वायु बहुत तेज गति से चलने लगती है। इससे बादल यहाँ-वहाँ गायब हो जाते हैं। यह दृश्य उसी प्रकार लगता है जैसे परिवार में कुपुत्र के उत्पन्न होने से कुल के उत्तम धर्म (श्रेष्ठ आचरण) नष्ट हो जाते हैं। कभी (बादलों के कारण) दिन में घोर अंधकार छा जाता है और कभी सूर्य प्रकट हो जाता है। तब लगता है, जैसे बुरी संगति पाकर ज्ञान नष्ट हो गया हो और अच्छी संगति पाकर ज्ञान उत्पन्न हो गया हो।

भाषा अध्ययन (व्याकरण)

प्रश्न. सूचनाओं के अनुसार कृतियों कीजिए :

1. शब्द भेद :

प्रश्न.
अधोरेखांकित शब्दों के शब्दभेद पहचानकर लिखिए :
(i) भूमि परत भा ढाबर पानी।
(i) नव पल्लव भए बिटप अनेका।
उत्तर:
(i) पानी-द्रव्यवाचक संज्ञा
(ii) नव-गुणवाचक विशेषण।

2. अव्यय:

प्रश्न.
निम्नलिखित अव्ययों का अपने वाक्यों में प्रयोग कीजिए :
(i) नहीं
(i) इसलिए।
उत्तर :
(i) जनक कॉलेज नहीं जाता।
(ii) बेचन बिजली का बिल अदा नहीं कर पाया, इसलिए बिजली आपूर्ति खंडित हो गई।

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3. संधि :

प्रश्न.
कृति पूर्ण कीजिए:
संधि शब्द – संधि विच्छेद – संधि भेद
…………………… – विद्या + अर्थी – ……………………
अथवा
जगन्नाथ – …………………… – ……………………
उत्तर:
संधिशब्द – संधि विच्छेद – संधि भेद
विद्यार्थी – विद्या + अर्थी – स्वर संधि
अथवा
जगन्नाथ – जगत् + नाथ – व्यंजन संधि

4. सहायक क्रिया:

प्रश्न.
निम्नलिखित वाक्यों में सहायक क्रिया पहचानकर उनका मूल रूप लिखिए:
(i) बादल पृथ्वी के नजदीक आकर बरस रहे हैं।
(ii) दुष्ट लोग थोड़ा धन पाकर भी इतराने लगते हैं।
उत्तर:
सहायक क्रिया – मूल रूप
(i) रहे – रहना
(ii) लगने – लगना

5. प्रेरणार्थक क्रिया:

प्रश्न.
निम्नलिखित क्रियाओं के प्रथम प्रेरणार्थक और द्वितीय प्रेरणार्थक रूप लिखिए:
(i) सहना
(ii) गिरना।
उत्तर:
क्रिया – प्रथम प्रेरणार्थक रूप – द्वितीय प्रेरणार्थक रूप
(i) सहना – सहाना – सहवाना
(ii) गिरना – गिराना – गिरवाना

6. मुहावरे:

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प्रश्न 1.
निम्नलिखित मुहावरों का अर्थ लिखकर वाक्य में प्रयोग कीजिए:
(i) आँखें फाड़कर देखना
(ii) रुआँसा होना।
उत्तर:
(i) आँखें फाड़कर देखना।
अर्थ: आश्चर्य से देखना।
वाक्य: मनीष सर्कस के कलाकारों के करतब आँखें फाड़कर देख रहा था।

(ii) रुआँसा होना।
अर्थ: उदास होना।
वाक्य: मालिक की झिड़कियाँ खाकर नौकर रुआँसा हो गया।

प्रश्न 2.
अधोरेखांकित वाक्यांश के लिए उचित मुहावरे का चयन कर वाक्य फिर से लिखिए: (हामी भरना, करवट बदलना)
आखिरकार रंजन ने शादी करने के लिए स्वीकृति दी।
उत्तर:
आखिरकार रंजन ने शादी करने के लिए हामी भरी।

7. कारक:
प्रश्न.
निम्नलिखित वाक्य में प्रयुक्त कारक पहचानकर उसका भेद लिखिए:
(i) छोटी-छोटी नदियाँ वर्षा के जल से भर जाती हैं।
(ii) नदी अपने किनारों को तोड़ती हुई आगे बढ़ जाती है।
उत्तर:
(i) वर्षा के-संबंध कारक
(ii) किनारों को-कर्म कारक ।

8. विरामचिह्न:

प्रश्न.
निम्नलिखित वाक्यों में यथास्थान उचित विरामचिह्न लगाकर वाक्य फिर से लिखिए:
(i) पृथ्वी घास से परिपूर्ण होकर हरी हो गई है जिससे रास्तों का पता नहीं चलता
(ii) हरी भरी फसलों से युक्त पृथ्वी कैसी लग रही है
उत्तर:
(i) पृथ्वी घास से परिपूर्ण होकर हरी हो गई है, जिससे रास्तों का पता नहीं चलता।
(ii) हरी-भरी फसलों से युक्त पृथ्वी कैसी लग रही है?

9. काल परिवर्तन:

प्रश्न.
निम्नलिखित वाक्यों का सूचना के अनुसार काल परिवर्तन कीजिए:
(i) प्रियाहीन मेरा मन डरता है। (पूर्ण वर्तमानकाल)
(ii) बादल पृथ्वी के नजदीक आकर बरस रहे हैं। (सामान्य भविष्यकाल)
उत्तर:
(i) प्रियाहीन मेरा मन डरा है।
(ii) बादल पृथ्वी के नजदीक आकर बरसेंगे।

Maharashtra Board Class 10 Hindi Solutions Chapter 2 दो लघुकथाएँ

10. वाक्य भेद:

प्रश्न 1.
निम्नलिखित वाक्यों का रचना के आधार पर भेद पहचानकर लिखिए:
(i) बादल गरज रहे हैं और बिजली चमक रही है।
(ii) अनेक वृक्षों में नई-नई कोंपलें आ गई हैं, जिससे वे हरे-भरे तथा सुशोभित हो गए हैं।
उत्तर:
(i) संयुक्त वाक्य
(ii) मिश्र वाक्य।

प्रश्न 2.
निम्नलिखित वाक्यों का अर्थ के आधार पर दी गई सूचना के अनुसार परिवर्तन कीजिए:
(i) कलियुग में धर्म पलायन कर जाता है। (प्रश्नवाचक वाक्य)
(ii) संत पुरुष दुष्टों के वचन सहते हैं। (निषेधवाचक वाक्य)
उत्तर:
(i) क्या कलियुग में धर्म पलायन कर जाता है?
(ii) संत पुरुष दुष्टों के वचन नहीं सहते।

11. वाक्य शुद्धिकरण:

प्रश्न.
निम्नलिखित वाक्य शुद्ध करके फिर से लिखिए:
(i) एक-एक करके सद्गुण सज्जन के पास चला आते है।
(ii) धूल खोजने पे भी कहीं नहीं मिलता है।
उत्तर:
(i) एक-एक कर सद्गुण सज्जन के पास चले आते हैं।
(ii) धूल खोजने पर भी कहीं नहीं मिलती है।

उपयोजित लेखन

निम्नलिखित मुद्दों के आधार पर 70 से 80 शब्दों में कहानी लिखकर उसे उचित शीर्षक दीजिए तथा सीख लिखिए:
एक महानुभाव की कल्पना – विश्वविद्यालय स्थापना का प्रण – दान से घन एकत्र करना – एक सेठ के पास जाना – सेठ का दिन भर बिठाए रखना – महानुभाव निराश – शाम को सात लाख रुपए का चेक पाना – आश्चर्य और खुशी।
उत्तर:
बात आजादी मिलने के बहुत पहले की है। तब देश में उच्च शिक्षा प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों की पढ़ाई के लिए बहुत कम विश्वविद्यालय थे। विद्यार्थियों को दूर-दूर स्थानों पर जाकर शिक्षा प्राप्त करनी पड़ती थी और उन्हें वही टिककर पढ़ना पड़ता था। विद्यार्थियों की इस परेशानी को दर करने के लिए एक महानुभाव ने अपने शहर में विश्वविद्यालय स्थापित करने का प्रण किया।

Maharashtra Board Class 10 Hindi Solutions Chapter 2 दो लघुकथाएँ

इसके लिए उन्होंने सारे देश का दौरा किया और जहाँ से जो भी धन मिला, एकत्र किया। एक बार किसी व्यक्ति ने उन्हें बताया कि आप कलकत्ता के फलाँ सेठ के पास जाइए। वहाँ आपको अवश्य कुछ धन मिलेगा। वे पहुँच गए उनके पास। उन्होंने सेठ जी से अपना उद्देश्य बताया। सेठ जी ने उन्हें कुछ देर इंतजार करने के लिए कहा और वे अपने काम में लग गए। दोपहर से शाम हो गई। सेठ जी ने उन्हें नहीं बुलाया।

वे निराश हो गए थे। इतने में सेठ जी अपने केबिन से बाहर आए। वे सज्जन खड़े हो गए और बोले, “सेठ जी मुझे आज्ञा दीजिए, मैं चलूँ।” सेठ जी ने कहा, “बैठिए भाई, बैठिए! मैं आपका ही काम कर रहा था। ये लीजिए अपने परोपकार के काम में मेरा छोटा-सा सहयोग! इस समय मैं और कुछ नहीं दे पाऊँगा।” सेठ जी ने एक चेक उन सज्जन के हाथ में थमा दिया।

उन महाशय ने चेक पर नजर डाली- ‘सात लाख रुपए।’ उनके मुँह से निकला, “सेठ जी, मुझे तो लगा था, मुझे यहाँ से खाली हाथ जाना पड़ेगा, पर आपने तो…।” “बस… बस!” उन्होंने उन सज्जन की बात काटते हुए कहा, “आप परोपकार का काम कर रहे हैं, मुझसे जो बन पड़ा, मैंने भी सहयोग दे दिया।” इस धन से विश्वविद्यालय के कई काम पूरे हुए।

विश्वविद्यालय के निर्माण के लिए यह धन एकत्र करने वाले व्यक्ति थे महामना मदनमोहन मालवीय और उन्होंने जिस विश्वविद्यालय का निर्माण किया, वह था ‘बनारस हिंदू विश्वविद्यालय।

सीख: परोपकार सबसे बड़ा धर्म है।

बरषहिं जलद Summary in Hindi

विषय-प्रवेश : अवधी बोली में लिखा गया ‘रामचरितमानस’ विश्व के अमूल्य ग्रंथों में से एक है। प्रस्तुत काव्य खंड इसी ग्रंथ से लिया गया है। चौपाई और दोहों जैसे लोकप्रिय छंदों में प्रस्तुत इस काव्य खंड में तुलसीदासजी ने वर्षा ऋतु का सुंदर वर्णन किया है। इस काव्य खंड में उन्होंने वर्षा ऋतु से संबंधित विभिन्न वस्तुओं को जीवन से जोड़कर देखा है।

यह काव्य खंड सीता हरण के पश्चात का है। श्रीराम और लक्ष्मण जी सीता जी की खोज में वन में भटक रहे हैं। बरसात की ऋत आ चुकी है पर सीता जी का पता नहीं चल सका है। कवि ने इस काव्य खंड में श्रीराम के मन की व्याकुलता का चित्रण किया है।

बरषहिं जलद चौपाइयों और दोहों का सरल अर्थ

1. घन घमंड नभ …………………………… जिमि जिव हरि पाई।। (चौपाई)

कवि कहते हैं कि आकाश में बादल उमड़-घुमड़कर भयंकर गर्जना कर रहे हैं। (श्रीरामजी कह रहे हैं कि) प्रिया (सीता जी) के बिना मेरा मन डर रहा है। बिजली आकाश में ऐसे चमक रही है, जैसे दुष्ट व्यक्ति की मित्रता स्थिर नहीं रहती। यानी वह चमकती है और चमककर लुप्त हो जाती है।

बादल पृथ्वी के नजदीक आकर (नीचे उतरकर) बरस रहे हैं। ठीक उसी प्रकार जैसे विद्वान व्यक्ति विद्या प्राप्त कर विनम्र हो जाते हैं। बूंदों की चोट पहाड़ों पर पड़ रही है। पहाड़ बूंदों के प्रहार को इस प्रकार शांत भाव से सह रहे हैं, जैसे संत पुरुष दुष्टों के कटु वचनों को सह लेते हैं।

छोटी नदियाँ वर्षा के जल से भरकर अपने किनारों को तोड़ती हुई आगे बढ़ती जा रही हैं, जैसे मामूली धन पाकर भी दुष्ट लोग इतराने लगते हैं (यानी मर्यादा का त्याग कर देते हैं)। पृथ्वी पर गिरते ही पानी गँदला हो गया है, मानो प्राणी से माया लिपट गई हो।

वर्षा का पानी एकत्र होकर तालाबों में भर रहा है। जैसे एक-एक कर सद्गुण सज्जन व्यक्ति के पास चले आते हैं। नदी का पानी समुद्र में जाकर उसी प्रकार स्थिर हो जाता है जिस प्रकार जीव हरि (ईश्वर) को प्राप्त कर अचल (आवागमन से मुक्त) हो जाता है।

2. हरित भूमि …………………………… होहिं सद्ग्रंथ।। (दोहा)

पृथ्वी घास से परिपूर्ण होकर हरीभरी हो गई है, जिससे रास्तों का पता नहीं चलता है। यह दृश्य ऐसा लगता है, जैसे पाखंडी के पाखंड भरे मत के प्रचार से सद्ग्रंथ लुप्त हो जाते हैं।

3. दादुर धुनि चहुँ उपजे ग्याना।। (चौपाई)

कवि कहते हैं कि वर्षा काल में चारों दिशाओं में मेढकों की ध्वनि ऐसी (सुहावनी) लगती है मानो विद्यार्थियों का समूह वेद-पाठ कर रहा हो। अनेक वृक्षों में नई-नई कोंपलें आ गई हैं, जिससे वे ऐसे हरेभरे तथा सुशोभित हो गए हैं, जैसे साधना करने वाले किसी व्यक्ति का मन ज्ञान प्राप्त करने पर प्रफुल्लित हो जाता है।

(बरसात के दिनों में) मदार और जवासा के पौधे पत्तों से रहित हो गए हैं। उन्हें देखकर ऐसा लगता है मानो अच्छे शासक के राज्य में दुष्टों का धंधा जाता रहा हो (खत्म हो गया हो)। धूल खोजने पर भी कहीं नहीं मिलती है। जैसे क्रोध धर्म को दूर कर देता है, उसी तरह वर्षा ने धूल को नष्ट कर दिया है।

अनाज से युक्त (लहलहाती हुई हरी-भरी खेती) पृथ्वी कुछ इस : प्रकार शोभायमान हो रही है, जैसे उपकार करने वाले व्यक्ति शोभायमान होते हैं। रात के अंधकार में जुगनू चारों ओर दिखाई दे रहे हैं। उन्हें देखकर ऐसा लगता है जैसे घमंडियों का समूह एकत्र हो गया है।

चतुर किसान अपनी फसलों की निराई कर रहे हैं। (अपनी फसल से घास-फूस निकालकर फेंक रहे हैं)। इसे देखकर ऐसा लगता है जैसे विद्वान लोग मोह, मद, माया का त्याग कर रहे हों।

बरसात के दिनों में चक्रवाक पक्षी कहीं नहीं दिखाई दे रहे हैं। इससे ऐसा लग रहा है जैसे कलियुग में धर्म पलायन कर गया हो।

यह पृथ्वी अनेक प्रकार के जीवों से भरी पड़ी है। यह उसी तरह शोभायमान हो रही है, जैसे अच्छे राजा के राज्य में प्रजा की वृद्धि (विकास) होती है।

यहाँ-वहाँ अनेक सही थककर इस तरह ठहरे हुए हैं, जैसे मनुष्य को ज्ञान प्राप्त होने पर इंद्रियाँ शिथिल हो जाती हैं और विषयों की ओर’ जाना छोड़ देती हैं।

4. कंबहुँ प्रबल …………………………… कुसंग-सुसंग।। (दोहा)

कभी-कभी वायु बहुत तेज गति से चलने लगती है। इससे बादल यहाँ-वहाँ गायब हो जाते हैं। यह दृश्य उसी प्रकार लगता है जैसे परिवार में कुपुत्र के उत्पन्न होने से कुल के उत्तम धर्म (श्रेष्ठ आचरण) नष्ट हो जाते हैं।

कभी (बादलों के कारण) दिन में घोर अंधकार छा जाता है और कभी सूर्य प्रकट हो जाता है। तब लगता है, जैसे बुरी संगति पाकर ज्ञान नष्ट हो गया हो और अच्छी संगति पाकर ज्ञान उत्पन्न हो गया हो।

Class 10 Hindi Lokbharti Textbook Solutions

Class 10 Hindi Chapter 10 Thes Question Answer Maharashtra Board

Std 10 Hindi Chapter 10 Thes Question Answer Maharashtra Board

Balbharti Maharashtra State Board Class 10 Hindi Solutions Lokbharti Chapter 10 ठेस Notes, Textbook Exercise Important Questions and Answers.

Hindi Lokbharti 10th Digest Chapter 10 ठेस Questions And Answers

Hindi Lokbharti 10th Std Digest Chapter 10 ठेस Textbook Questions and Answers

कृति

(कृतिपत्रिका के प्रश्न 3 (अ) के लिए)

सूचना के अनुसार कृतियाँ कीजिए:

प्रश्न 1.
संजाल पूर्ण कीजिए:
Maharashtra Board Class 10 Hindi Solutions Chapter 10 ठेस 1
उत्तर:
Maharashtra Board Class 10 Hindi Solutions Chapter 10 ठेस 13

प्रश्न 2.
कृति पूर्ण कीजिए:
Maharashtra Board Class 10 Hindi Solutions Chapter 10 ठेस 2
उत्तर:
Maharashtra Board Class 10 Hindi Solutions Chapter 10 ठेस 12
Maharashtra Board Class 10 Hindi Solutions Chapter 10 ठेस 22

Maharashtra Board Class 10 Hindi Solutions Chapter 10 ठेस 7

Maharashtra Board Class 10 Hindi Solutions Chapter 10 ठेस

प्रश्न 3.
वाक्यों का उचित क्रम लगाकर लिखिए:
a. सातों तारे मंद पड़ गए।
b. ये मेरी ओर से हैं। सब चीजें हैं दीदी।
c. लोग उसको बेकार ही नहीं, ‘बेगार’ समझते हैं।
d. मानू दीदी काकी की सबसे छोटी बेटी है।
उत्तर:
a. सातों तारे मंद पड़ रहे हैं।
b. ये मेरी ओर से हैं। सब चीजें हैं दीदी!
c. लोग उसको बेकार ही नहीं, ‘बेगार’ समझते हैं।
d. मानू दीदी काकी की सबसे छोटी बेटी है।

(अभिव्यक्ति)

प्रश्न.
‘कला और कलाकार का सम्मान करना हमारा दायित्व है’, इस कथन पर अपने विचारों को शब्दबद्ध कीजिए।
उत्तर:
हमारे देश की संस्कृति में लोक कलाओं की सशक्त पहचान रही है। ये मूलतः ग्रामीण अंचलों में अनेक जातियों व जनजातियों में पीढ़ी-दर-पीढ़ी संरक्षित पारंपरिक कलाएँ हैं। लोक कला का इतिहास उतना ही पुराना है, जितना कि भारतीय ग्रामीण सभ्यता का। लोक कलाओं में लोकगीत, लोकनृत्य, गायन, वादन, अभिनय, मूर्तिकला, काष्ठकला, धातुकला, चित्रकला, हस्तकला आदि का समावेश होता है। हस्तकला ऐसे कलात्मक कार्य को कहते हैं, जो उपयोगी होने के साथ-साथ सजाने के काम आता है तथा जिसे मुख्यतः हाथ से या साधारण औजारों की सहायता से ही किया जाता है।

ऐसी कलाओं का धार्मिक एवं सांस्कृतिक महत्त्व होता है। वर्तमान में लोक कलाओं और कलाकारों को उचित प्रश्रय न मिलने के कारण अनेक लोक कलाओं पर संकट उत्पन्न हो गया है। धीरे-धीरे समय परिवर्तन, भौतिकतावाद, पश्चिमीकरण तथा आर्थिक संपन्नता के कारण परंपरागत लोक कलाओं पर नकारात्मक प्रभाव पड़ा है। जनता व प्रशासन दोनों को ही लोक कलाओं और कलाकारों की पहचान नष्ट होने से बचाने के प्रयास करने चाहिए।

भाषा बिंदु

प्रश्न 1.
कोष्ठक की सूचना के अनुसार निम्न वाक्यों का काल परिवर्तन कीजिए:

a. अली घर से बाहर चला जाता है। (सामान्य भूतकाल)
—————————————————————
b. आराम हराम हो जाता है। (पूर्ण वर्तमानकाल एवं पूर्ण भविष्यकाल)
—————————————————————
c. सरकार एक ही टैक्स लगाती है। (सामान्य भविष्यकाल)
—————————————————————
d. आप इतनी देर से नाप-तौल करते हैं। (अपूर्ण वर्तमानकाल)
—————————————————————
e. वे बाजार से नई पुस्तक खरीदते हैं। (पूर्ण भूतकाल एवं अपूर्ण भविष्यकाल)
—————————————————————
f. वे पुस्तक शांति से पढ़ते हैं। (अपूर्ण भूतकाल)
—————————————————————
g. सातों तारे मंद पड़ गए। (अपूर्ण वर्तमानकाल)
—————————————————————
h. मैंने खिड़की से गरदन निकालकर झिड़की के स्वर में कहा। (अपूर्ण भूतकाल)
—————————————————————
उत्तर:
a. अली घर से बाहर चला गया।
b. (अ) आराम हराम हो गया है।
(ब) आराम हराम हो चुका होगा।
c. सरकार एक ही टैक्स लगाएगी।
d. आप इतनी देर से नाप-तौल कर रहे हैं।
e. (अ) उन्होंने बाजार से नई पुस्तक खरीदी थी।
(ब) वे बाजार से नई पुस्तक खरीदते रहेंगे।
f. वे पुस्तक शांति से पढ़ रहे थे।
g. सिरचन ने मुस्कराकर पान का बीड़ा मुँह में ले लिया।
h. मैं खिड़की से गरदन निकालकर झिड़की के स्वर में कह रहा था।

Maharashtra Board Class 10 Hindi Solutions Chapter 10 ठेस

प्रश्न 2.
नीचे दिए गए वाक्य का काल पहचानकर निर्देशानुसार काल परिवर्तन कीजिए:
Maharashtra Board Class 10 Hindi Solutions Chapter 10 ठेस 3
उत्तर:
मानू को ससुराल पहुँचाने मैं ही जा रहा था – अपूर्ण भूतकाल

1. सामान्य वर्तमानकाल मानू को ससुराल पहुँचाने में ही जाता हूँ।
2. सामान्य भविष्यकाल मानू को ससुराल पहुँचाने में ही जाऊँगा।
3. अपूर्ण भविष्यकाल मानू को ससुराल पहुँचाने में ही जाता रहँगा।
4. पूर्ण वर्तमानकाल मानू को ससुराल मैंने ही पहुँचाया है।
5. सामान्य वर्तमानकाल मानू को ससुराल पहुँचाने में ही गया।
6. अपूर्ण वर्तमानकाल मानू को ससुराल पहुँचाने में ही जा रहा हूँ।
7. पूर्ण भूतकाल मानू को ससुराल पहुँचाने में ही गया था।
8. पूर्ण भविष्यकाल मानू को ससुराल पहुंचाने में ही जा चुका हूँगा।

उपयोजित लेखन

प्रश्न.
‘पुस्तक प्रदर्शनी में एक घंटा’ विषय पर अस्सी से सौ शब्दों में निबंध लेखन कीजिए।
उत्तर:
पुस्तकें अनमोल होती हैं। वे हमारी सबसे अच्छी मित्र होती हैं, क्योंकि वे ज्ञान-विज्ञान का भंडार होती हैं। व्यक्ति आते हैं और चले जाते हैं परंतु उनके श्रेष्ठ विचार, ज्ञान, संस्कृति, सभ्यता, मानवीय मूल्य पुस्तकों के रूप में जीवित रहते हैं। पुस्तक प्रदर्शनी और मेले हमारे लिए वरदान हैं। ये पाठकों और लेखकों का संगम होते हैं। प्रत्येक वर्ष अगस्त में पुणे में कोरेगाँव पार्क में पुस्तक प्रदर्शनी और मेले का आयोजन किया जाता है। अनेक पुस्तक विक्रेता और प्रकाशक वहाँ आते हैं। इस बार मैं भी उस प्रदर्शनी में गया।

स्टालों पर पुस्तकें बड़े आकर्षक ढंग से सजी हुई थीं। सभी स्तर और रुचि के लोगों के लिए वहाँ यथेष्ट सामग्री थी। इतिहास, भूगोल, ज्ञान-विज्ञान, साहित्य, धर्म, भाषा, यात्रा, जीवन-वृत्त आदि सभी विषयों की पुस्तकें वहाँ थीं। अनेक स्कूलों के विद्यार्थी वहाँ आए हुए थे। बच्चे-बड़े सभी पुस्तकें खरीदने में व्यस्त थे या उनको देख-पढ़ रहे थे। कुछ लोग ग्रुप में खड़े पुस्तकों पर चर्चा कर रहे थे। मेरे पास समय का अभाव था। मैंने अपने और छोटे भाई के लिए मुंशी प्रेमचंद का कहानी-संग्रह तथा हिंदी का एक शब्दकोश खरीदा।

Hindi Lokbharti 10th Textbook Solutions Chapter 10 ठेस Additional Important Questions and Answers

Maharashtra Board Class 10 Hindi Solutions Chapter 10 ठेस

गद्यांश क्र. 1
प्रश्न. निम्नलिखित पठित गद्यांश पढ़कर दी गई सूचनाओं के अनुसार कृतियाँ कीजिए:

कृति 1: (आकलन)

प्रश्न 1.
कारण लिखिए:
गाँव के लोग अब सिरचन को खेत-खलिहान की मजदूरी के लिए इसलिए नहीं बुलाते:
उत्तर:
लोग उसको बेकार ही नहीं, बेगार’ समझते हैं। दूसरे मजदूर खेत पर पहुँचकर एक-तिहाई काम कर चुकते हैं, तब पगडंडी पर तौल-तौलकर पाँव रखता हुआ, धीरे-धीरे कहीं सिरचन राय हाथ में खुरपी डुलाता हुआ दिखाई पड़ेगा।

प्रश्न 2.
वाक्यों को उचित क्रम लगाकर लिखिए:
(i) तुम्हारी भाभी ने कहाँ से बनाना सीखी हैं?
(ii) लोग उसको बेकार ही नहीं, ‘बेगार’ समझते हैं।
(iii) मुफ्त में मजदूरी देनी हो, तो और बात है।
उत्तर:
(i) मुफ्त में मजदूरी देनी हो, तो और बात है।
(ii) मैं पहले ही पूछ लेता, भोग क्या-क्या लगेगा?
(iii) तुम्हारी भाभी ने कहाँ से बनाना सीखी है?

प्रश्न 3.
संजाल पूर्ण कीजिए:
Maharashtra Board Class 10 Hindi Solutions Chapter 10 ठेस 4
उत्तर:
Maharashtra Board Class 10 Hindi Solutions Chapter 10 ठेस 6

Maharashtra Board Class 10 Hindi Solutions Chapter 10 ठेस

प्रश्न 4.
एक शब्द में उत्तर लिखिए:
(i) बिना मजदूरी दिए जबरदस्ती लिया गया काम – …………………………..
(ii) बाँस की तीलियों से बना परदा – …………………………..
उत्तर:
(i) बिना मजदूरी दिए जबरदस्ती लिया गया काम- बेगार।
(ii) बाँस की तीलियों से बना परदा- चिक।

कृति 2: (स्वमत अभिव्यक्ति)

प्रश्न.
‘खेत-खलिहान की मजदूरी इस विषय में 25 से 30 शब्दों में अपने विचार लिखिए।
उत्तर:
भारत गाँवों और खेतों का देश है। यहाँ आज भी देश की दो-तिहाई जनता खेती से जुड़ी है। खेत हैं, खेती है तो मजदूर भी जरूरी हैं। मजदूर और किसान एक-दूसरे के पूरक हैं। मजदूर के बिना किसानों का काम असंभव-सा होता है। फसल की बुआई, गुड़ाई, निराई, सिंचाई आदि के काम के लिए मजदूरों की आवश्यकता होती ही है। भूमिहीन मजदूर परिवार बहुत गरीब होते हैं। उनके पास अपनी जमीन नहीं होती। उन्हें रोजी-रोटी के लिए दूसरों के खेतों में काम करना पड़ता है। फसल की बुआई और कटाई के समय तो बड़े किसानों के खेतों में उन्हें काम और मजदूरी मिल जाती है, परंतु पूरे वर्ष काम नहीं मिल पाता। ऐसे समय इन मजदूरों को अपनी जरूरतें पूरी करने के लिए मजदूरी के अन्य कार्य करने पड़ते हैं। बार-बार कर्ज लेना पड़ता है।

गद्यांश क्र. 2
प्रश्न, निम्नलिखित पठित गद्यांश पढ़कर दी गई सूचनाओं के अनुसार कृतियाँ कीजिए:
कृति 1: (आकलन)

प्रश्न 1.
कृति पूर्ण कीजिए:
Maharashtra Board Class 10 Hindi Solutions Chapter 10 ठेस 8
उत्तर:
Maharashtra Board Class 10 Hindi Solutions Chapter 10 ठेस 11
Maharashtra Board Class 10 Hindi Solutions Chapter 10 ठेस 12

Maharashtra Board Class 10 Hindi Solutions Chapter 10 ठेस

प्रश्न 2.
गलत वाक्य सही करके लिखिए:
(i) दूध, घी, मलाई न मिले तो कोई बात नहीं किंतु बात में जरा भी झाला सिरचन नहीं बरदाश्त कर सकता।
(ii) आज तो अब अधकपाली दर्द के कारण मन ठीक नहीं है। थोड़ा-सा रह गया है, किसी दिन आकर पूरा कर दूंगा।
उत्तर:
(i) दूध में कोई मिठाई न मिले तो कोई बात नहीं किंतु बात में जरा भी झाला सिरचन नहीं बरदाश्त कर सकता।
(ii) आज तो अब अधकपाली दर्द से माथा टनटना रहा है। थोड़ा-सा रह गया है, किसी दिन आकर पूरा कर दूंगा।

प्रश्न 3.
आकृति पूर्ण कीजिए:
(i) सिरचन जाति का यह है – [ ]
(ii) बिना इसके पेट भर भात पर काम करने वाला कारीगर – [ ]
(iii) सिरचन को लोग यह भी समझते हैं – [ ]
(iv) ऐसे बहुत-से काम हैं जिन्हें इसके सिवा गाँव में कोई नहीं जानता – [ ]
उत्तर:
(i) सिरचन जाति का यह है – [कारीगर]
(ii) बिना इसके पेट भर भात पर काम करने वाला कारीगर – [मजदूरी]
(iii) सिरचन को लोग यह भी समझते हैं – [चटोर]
(iv) ऐसे बहुत-से काम हैं जिन्हें इसके सिवा गाँव में कोई नहीं जानता – [सिरंचन]

प्रश्न 4.
कृति पूर्ण कीजिए:
Maharashtra Board Class 10 Hindi Solutions Chapter 10 ठेस 10
उत्तर:
Maharashtra Board Class 10 Hindi Solutions Chapter 10 ठेस 14

गद्यांश क्र. 3.
प्रश्न. निम्नलिखित पठित गद्यांश पढ़कर दी गई सूचनाओं के अनुसार कृतियाँ कीजिए:
कृति 1: (आकलन)

प्रश्न 1.
संजाल पूर्ण कीजिए:
Maharashtra Board Class 10 Hindi Solutions Chapter 10 ठेस 15
उत्तर:
Maharashtra Board Class 10 Hindi Solutions Chapter 10 ठेस 17

Maharashtra Board Class 10 Hindi Solutions Chapter 10 ठेस

प्रश्न 2.
वाक्यों को उचित क्रम लगाकर लिखिए:
(i) मानू दीदी काकी की सबसे छोटी बेटी है।
(ii) मँझली भाभी का मुँह लटक गया।
(iii) मॅझली भाभी से रहा नहीं गया।
उत्तर:
(i) रंगीन सुतलियों में झब्बे डालकर सिरचन चिक बुनने बैठा।
(ii) मैंझली भाभी से रहा नहीं गया।
(iii) मँझली भाभी का मुँह लटक गया।

प्रश्न 3.
कारण लिखिए:
मझली भाभी का मुँह लटक गया –
उत्तर:
मझली भाभी का प्रस्ताव सुनकर सिरचन ने कहा कि बहुरिया, मोहर छापवाली धोती के साथ रेशमी कुर्ता देने पर भी ऐसी चीज नहीं बनती। मानू दीदी का दूल्हा अफसर है। सिरचन की बात सुनकर मझली भाभी का मुँह लटक गया।

प्रश्न 4.
वाक्य पूर्ण कीजिए:
(i) मानू के दूल्हे ने पहले ही बड़ी भाभी को –
(ii) मोहर छापवाली धोती नहीं, मुंगिया लड्डू, बेटी की बिदाई के समय –
उत्तर:
(i) मानू के दूल्हे ने पहले ही बड़ी भाभी को लिखकर चेतावनी दे दी है।
(ii) मोहर छापवाली धोती नहीं, मुँगिया लड्डू, बेटी की विदाई के समय रोज मिठाई जो खाने को मिलेगी।

प्रश्न 5.
कृति पूर्ण कीजिए:
Maharashtra Board Class 10 Hindi Solutions Chapter 10 ठेस 16
उत्तर:
Maharashtra Board Class 10 Hindi Solutions Chapter 10 ठेस 18

कृति 2: (स्वमत अभिव्यक्ति)

प्रश्न.
‘मन लगाकर काम करना एक गुण है’ इस विषय में अपने विचार 25 से 30 शब्दों में लिखिए।
उत्तर:
किसी भी काम को मन लगाकर अर्थात तन्मयता से करना एक गुण है। उसका फल भी हमें मिलता है। मन लगाकर किए गए काम के परिणाम हमेशा उत्तम होते हैं। जिस काम को करने में मन लगता है, वह कभी बोझ नहीं लगता। जो काम मन मारकर करना पड़े, वह बोझ बन जाता है। कुछ लोग ऐसे होते हैं, जो एक किनारे खड़े होकर नाव की तलाश करते हैं अर्थात उचित काम और अवसर की तलाश करते रहते हैं और वह अवसर कभी नहीं आता, वे जिंदगी भर इंतजार ही करते रहते हैं। कुछ लोग नौकरी में मन लगाकर काम ही नहीं करना चाहते। दूसरे साथी जब मेहनत और लगन से काम करके प्रोन्नति पाकर आगे बढ़ जाते हैं, तो ईष्या के वश होकर उन्हें अधिकारियों का चमचा आदि कहते हैं।

Maharashtra Board Class 10 Hindi Solutions Chapter 10 ठेस

गद्यांश क्र. 4
प्रश्न. निम्नलिखित पठित गद्यांश पढ़कर दी गई सूचनाओं के अनुसार कृतियाँ कीजिए:
कृति 1: (आकलन)

प्रश्न 1.
ये वाक्य किसने, किससे कहे हैं? लिखिए:
(i) आज सिरचन को कलेवा किसने दिया है?
(ii) अरी मँझली, सिरचन को बुंदिया क्यों नहीं देती?
(iii) बँदिया मैं नहीं खाता, काकी!
(iv) किसी के नैहर-ससुराल की बात क्यों करेगा वह?
उत्तर:
(i) आज सिरचन को कलेवा किसने दिया है? – लेखक ने माँ से कहा है।
(ii) अरी मँझली, सिरचन को बुंदिया क्यों नहीं देती? – लेखक की माँ ने मँझली भाभी से कहा है।
(iii) बुंदिया मैं नहीं खाता, काकी- सिरचन ने लेखक की माँ से कहा है।
(iv) किसी के नैहर-ससुराल की बात क्यों करेगा वह? – चाची ने लेखक की माँ से कहा है।

प्रश्न 2.
आकृति पूर्ण कीजिए:
(i) सिरचन को काम में मगन होकर खाने-पीने की यह न रहती।। – [ ]
(ii) चिक में सुतली के फंदे डालकर सिरचन ने इस पर निगाह डाली। – [ ]
(iii) मानू यह सजाकर बाहर बैठकखाने में भेज रही थी। – [ ]
(iv) अरी मैंझली, सिरचन को यह क्यों नहीं देती। – [ ]
उत्तर:
(i) सिरचन को काम में मगन होकर – खाने-पीने की यह न रहती। – [सुध]
(ii) चिक में सुतली के फंदे डालकर – सिरचन ने इस पर निगाह डाली। [सूप]
(iii) मानू यह सजाकर बाहर बैठकखाने में भेज रही थी। – [पान]
(iv) अरी मँझली, सिरचन को यह क्यों नहीं देती। – [बँदियाँ]

प्रश्न 3.
संजाल पूर्ण कीजिए:
Maharashtra Board Class 10 Hindi Solutions Chapter 10 ठेस 19
उत्तर:
Maharashtra Board Class 10 Hindi Solutions Chapter 10 ठेस 20

Maharashtra Board Class 10 Hindi Solutions Chapter 10 ठेस

कृति 2: (स्वमत अभिव्यक्ति)

प्रश्न.
‘बहू के मायके की आलोचना करना उचित नहीं है इस विषय में अपने विचार 25 से 30 शब्दों में लिखिए।।
उत्तर:
कहा जाता है कि बेटियों का असली घर उनका ससुराल होता है। जिसे असली घर बताया जाता है, यानि कि ससुराल, वहाँ अकसर बहू को बेगाना समझा जाता है। ससुराल में बहू को कोई हक नहीं होता कि वह अपनी इच्छा से कुछ कर सके। हर छोटी-बड़ी बात के लिए उसे ससुरालवालों की आज्ञा की आवश्यकता होती है। बहू सबकी इच्छाओं का ख्याल रखती है, सबका सम्मान करती है, पर बहू का सम्मान अकसर नहीं किया जाता। स्थिति तब और भी भयंकर हो जाती है, जब ससुरालवाले समय-असमय बहू के मायके की आलोचना करने लगते हैं।

मायकेवालों ने क्या भेजा है, बहू क्या लाई है? आदि प्रश्न घरवाले ही नहीं, कभी-कभी अड़ोस-पड़ोसवालों की जुबान पर भी आने लगते हैं। लड़केवाले प्रायः समझते हैं कि उनका दर्जा लड़कीवालों से ऊँचा है। बात-बात पर बह के मायकेवालों की उपेक्षा की जाती है। उनमें मीन-मेख निकाली जाती है। परिणामस्वरूप, बहू के मन में ससुराल के प्रति विद्वेष की भावना आ जाती है। हमें बहू के मायकेवालों का सम्मान करना होगा। तभी बहू भी ससुरालवालों को सम्मान देगी। हमेशा उनसे कुछ लेने की अपेक्षा करना उचित नहीं है।

गद्यांश क्र.5
प्रश्न. निम्नलिखित पठित गद्यांश पढकर दी गई सूचनाओं के अनुसार कृतियाँ कीजिए:
कृति 1: (आकलन)

प्रश्न 1.
एक शब्द में उत्तर लिखिए:
*(i) सिरचन ने छोटी चाची से माँगा –
(ii) सिरचन की घरवाली ने यह बुनी थी –
उत्तर:
(i) सिरचन ने छोटी चाची से माँगा – गमकौआ जर्दा।
(i) सिरचन की घरवाली ने यह बुनी थी – शीतलपाटी।

प्रश्न 2.
वाक्यों को उचित क्रम लगाकर लिखिए:
(i) सिरचन ने मुस्कराकर पान का बीड़ा मुँह में ले लिया।
(ii) चाची कई कारणों से जली-भुनी रहती थी सिरचन से।
(iii) बस, सिरचन की उँगलियों में सुतली के फंदे पड़ गए।
उत्तर:
(ii) चाची कई कारणों से जली-भुनी रहती थी सिरचन से।
(ii) बस, सिरचन की उँगलियों में सुतली के फंदे पड़ गए।
(iii) सातों तारे मंद पड़ गए।

Maharashtra Board Class 10 Hindi Solutions Chapter 10 ठेस

प्रश्न 3.
कारण लिखिए:
(i) मेरा कलेजा धड़क उठा… हो गया सत्यानाश!
(ii) सातों तारे मंद पड़ गए।
उत्तर:
(i) चाची ने सिरचन को बुरी तरह डाँटा था। मैं जानता था कि सिरचन बड़ा स्वाभिमानी है। अब वह मानू की ससुराल के लिए चिक और शीतलपाटी बनाएगा भी या नहीं।
(ii) सिरचन बड़ा स्वाभिमानी था। चाची ने उसे बुरी तरह डाँटा तो वह उस चिक को, जिसे उसने बड़े मन से बनाना शुरू किया था, अधूरी छोड़कर चला गया।

कृति 2: (स्वमत अभिव्यक्ति)

प्रश्न.
‘सिरचन काम अधूरा छोड़कर चला गया। क्या यह उचित था’ इस विषय में अपने विचार 25 से 30 शब्दों में लिखिए।
उत्तर:
लेखक की चाची के बुरा-भला कहने पर सिरचन नाराज होकर काम अधूरा छोड़कर चला गया। इसे किसी भी प्रकार उचित नहीं कहा जा सकता। सिरचन अच्छी तरह जानता था कि चिक और पटेर की शीतलपाटियाँ मानू के अफसर दूल्हे की फरमाइश पर बनवाई जा रही हैं। मानू उन्हें लेकर ही ससुराल जाएगी। फिर भी उसने काम पूरा . नहीं किया और चला गया। यह सिरचन ने ठीक नहीं किया। उसने एक बार भी नहीं सोचा कि दूल्हे की फरमाइश पूरी न होने की स्थिति में मानू को ताने सुनने पड़ सकते हैं। सास-ससुर व घर के अन्य सदस्यों की नाराजगी का शिकार होना पड़ सकता है। उस समय वह मानू, जिसके प्रति सिरचन के मन में भी स्नेह था, कितनी दुखी होगी। सिरचन का काम अधूरा छोड़कर जाना मुझे उचित नहीं लगा। (विद्यार्थी अपने ३ विचार लिखें।)

गद्यांश क्र. 6
प्रश्न. निम्नलिखित पठित गद्यांश पढ़कर दी गई सूचनाओं के अनुसार कृतियाँ कीजिए:
कृति 1: (आकलन)

प्रश्न 1.
ये वाक्य किसने, किससे कहे हैं? लिखिए:
(i) यह भी बेजा नहीं दिखलाई पड़ता, क्यों मानू?
(ii) चाची और मँझली भाभी की नजर न लग जाए इसमें भी!
(iii) मानू दीदी कहाँ हैं? एक बार देखू।
(iv) ये मेरी ओर से हैं। सब चीजें हैं दीदी!
उत्तर:
(i) यह भी बेजा नहीं दिखलाई पड़ता, क्यों मानू? – बड़ी भाभी ने मानू से कहा है।
(ii) चाची और मँझली भाभी की नजर न लग जाए इसमें भी! – लेखक ने बड़ी भाभी से कहा है।
(iii) मानू दीदी कहाँ हैं? एक बार देखू। – सिरचन ने लेखक से कहा है।
(iv) यह मेरी ओर से हैं। सब चीजें हैं दीदी! – सिरचन ने मानू से कहा है।

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प्रश्न 2.
वाक्यों को उचित क्रम लगाकर लिखिए:
(i) मानू फूट-फूटकर रो रही थी।
(ii) मानू कुछ नहीं बोली!… बेचारी!
(iii) मानू को ससुराल पहुँचाने में ही जा रहा था।
उत्तर:
(i) मानू कुछ नहीं बोली!… बेचारी!
(ii) मानू को ससुराल पहुँचाने मैं ही जा रहा था।
(iii) मानू फूट-फूटकर रो रही थी।

प्रश्न 3.
दो ऐसे प्रश्न बनाइए, जिनके उत्तर निम्नलिखित शब्द हों:
(i) सिरचन ने
(ii) मानू।
उत्तर:
(i) किसने दाँत से जीभ को काटकर दोनों हाथ जोड़ दिए?
(ii) मोहर छापवाली धोती का दाम कौन देने लगी?

कृति 2: (स्वमत अभिव्यक्ति)

प्रश्न.
‘सिरचन भावनाओं से परिपूर्ण व्यक्ति था’ इस विषय में अपने विचार 25 से 30 शब्दों में लिखिए।
उत्तर:
सिरचन भावनाओं से परिपूर्ण व्यक्ति है। वह एक उच्चकोटि का कलाकार है। चिक, शीतलपाटी आदि बनाने में पूरे क्षेत्र में उसका कोई सानी नहीं है। लेखक का परिवार, विशेष रूप से उनकी माँ का सिरचन बहुत आदर करता है। लेखक की माँ भी सिरचन की कला का सम्मान करती है। शायद इसीलिए लेखक की चाची उससे जली-भुनी रहती है। भावुक होने के कारण सिरचन को किसी के द्वारा टोका जाना तनिक भी बर्दाश्त नहीं होता। इसीलिए चाची के बुरा-भला कहने पर वह नाराज होकर काम अधूरा छोड़कर चला जाता है।

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परंतु सिरचन जानता है कि चिक, शीतलपाटी आदि सभी चीजों के लिए मानू के अफसर पति ने फरमाइश की थी। उसे मानू से स्नेह था। अतः नाराज होने के बावजूद वह मानू के लिए वे सारी चीजें बनाता है और इतनी सुंदर कि लेखक भी उसकी कारीगरी देखकर दंग रह जाता है। सिरचन स्वयं उन्हें लेकर स्टेशन आता है। मानू जब माँ द्वारा कही गई मोहर छापवाली धोती का दाम सिरचन को देना चाहती है तो वह दोनों हाथ जोड़कर मना कर देता है।

उपक्रम/कृति/परियोजना

प्रश्न.
लेखनीय
लोक कलाओं के नामों की सूची तैयार कीजिए।
उत्तर:

  • मधुबनी
  • जादोपाटिया
  • कलमकारी
  • कांगड़ा
  • गोंड
  • चित्तर
  • तंजावुर
  • थंगक
  • पातचित्र
  • पिछवई
  • पिथोरा
  • फड़
  • बाटिक
  • यमुनाघाट
  • वरली।

प्रश्न.
पठनीय
देश की आत्मा गाँवों में बसती है, गांधी जी के इस विचार से संबंधित लेख पदिए तथा इस पर स्वमत प्रस्तुत कीजिए।
उत्तर:
हमारा देश कृषिप्रधान देश है। यह गाँवों का देश है। भारत की आत्मा गाँवों में बसती है। सरित-सरोवर, झील-जलाशय, विविध विटप, वन-पर्वत, खेत-खलिहान और सहज-स्वाभाविक जीवन शैली सब गाँवों में ही उपलब्ध हो सकती है। आज भी भारत की 65 प्रतिशत से अधिक जनसंख्या गाँवों में बसती है। परंतु देश के आर्थिक विकास का लाभ गाँववासियों को संख्या के अनुपात में नहीं मिल पाता। आज भी असंख्य गाँव देश की मुख्य धारा से नहीं जुड़ पाए हैं। गाँवों की समस्याएँ चाहे गरीबी हो, सामाजिक हो, पेयजल हो या बिजली, सड़क, शिक्षा आदि हों, इन्हें कभी भी गंभीर रूप से नहीं लिया गया। शहर के निकट बसे गाँवों में तो फिर भी विकास की संभावनाएं बनी रहती हैं, परंतु दूर-दराज के पिछड़े गाँवों के विकास के प्रति प्रशासन का ध्यान ही नहीं जाता। देखा जाए तो गाँवों की प्रगति से ही पूरे देश की प्रगति जुड़ी है, क्योंकि गाँवों से ही हमारी प्रत्येक आवश्यकता अनाज, वस्त्र, कागज, ईंधन, उद्योगों के लिए कच्चा माल आदि की पूर्ति होती है।

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प्रश्न.
संभाषणीय
आपकी तथा परिवार के किसी बड़े सदस्य की दिनचर्या की तुलना कीजिए तथा समानता एवं अंतर बताइए।
उत्तर:
मैं दसवीं कक्षा की छात्रा हूँ और उसी स्कूल में पढ़ती हूँ, जहाँ मेरी माँ वाइस प्रिंसिपल हैं और हिंदी की प्राध्यापिका हैं। हम दोनों आठ बजे बस से स्कूल जाते हैं और दो बजे घर लौटते हैं। माँ सुबह जल्दी जगती हैं। नाश्ता और दोपहर का खाना बनाती हैं। मुझे जगाती हैं। स्वयं तैयार होती हैं। फिर हम स्कूल के लिए निकलते हैं। स्कूल से घर आकर मैं कपड़े बदलती हूँ, तब तक माँ खाना गरम करती हैं। खाना खाते समय हम दोनों स्कूल व मेरी पढ़ाई के विषय में बातें करते हैं। उसके बाद हम दोनों लगभग एक घंटा विश्राम करते हैं। चार बजे माँ फिर से काम पर लग जाती हैं।

विद्यार्थियों का गृहकार्य-कक्षाकार्य आदि जाँचना, कभी परीक्षा के लिए प्रश्नपत्र बनाना और कभी परीक्षा की उत्तर-पुस्तिकाएँ जाँचना, हर दिन माँ के पास स्कूल से संबंधित काम होता ही है। मैं भी उनके पास बैठकर पढ़ती हूँ। छह-साढ़े छह बजे माँ रात के खाने की तैयारी के लिए रसोई में जाती हैं। इस बीच मैं अपनी सहेलियों के साथ कुछ देर खेलने चली जाती हूँ। आठ बजे पिता जी के आने के बाद हम तीनों खाना खाते हैं। उसके बाद मैं पढ़ती हूँ और ग्यारह बजे सो जाती हूँ।

प्रश्न.
श्रवणीय
महाराष्ट्र में चलाए जाने वाले लघु उद्योगों की जानकारी रेडियो/दूरदर्शन पर सुनिए और इसके मुख्य मुद्दों को लिखिए।
उत्तर:
महाराष्ट्र में चलाए जाने वाले लघु उद्योग और क्षेत्र:

  • कोल्हापुरी चप्पलें (कोल्हापुर)
  • वरली पेंटिंग (ठाणे)
  • लकड़ी के खिलौने (सावंतवाडी)
  • गंजीफा (सावंतवाडी)
  • चाँदी का काम (हुपरी)
  • बीदरी काम (बीदर)
  • दरी (विदर्भ)
  • बाँस का सामान (रायगड, ठाणे)
  • पीतल के संगीत वाद्य (ताल, झाँझ, घंटे)

ठेस Summary in Hindi

विषय-प्रवेश : कलाकार किसी भी धर्म, जाति और वर्ग का हो, उसे अपनी कला पर अभिमान होता है। वह स्वाभिमान के मूल्य को समझता है और उसकी रक्षा के लिए हमेशा तत्पर रहता है। जाति या धर्म के नाम पर जब उसके स्वाभिमान पर आघात होता है तो वह उसे बरदाश्त नहीं करता।

प्रस्तुत कहानी में सिरचन नामक एक ग्रामीण कलाकार का वर्णन किया गया है। वह मोथी घास और पटेर की रंगीन शीतलपाटी (चटाई), बाँस की तीलियों की झिलमिलाती चिक, सतरंगे डोर के मोढ़े, भूसी-चुन्नी रखने के लिए पूँज की रस्सी के बड़े-बड़े जाले, ताल के सूखे पत्तों की छतरी-टोपी आदि उपयोगी वस्तुएँ बनाता है। ये वस्तुएँ बनाकर वह अपनी आजीविका कमाता है। स्वाभिमानी होने के कारण वह हर परिस्थिति में अपने स्वाभिमान की रक्षा करता है।

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Class 10 Hindi Chapter 3 Shram Sadhana Question Answer Maharashtra Board

Std 10 Hindi Chapter 3 Shram Sadhana Question Answer Maharashtra Board

Balbharti Maharashtra State Board Class 10 Hindi Solutions Lokbharti Chapter 3 श्रम साधना Notes, Textbook Exercise Important Questions and Answers.

Hindi Lokbharti 10th Digest Chapter 3 श्रम साधना Questions And Answers

Hindi Lokbharti 10th Std Digest Chapter 3 श्रम साधना Textbook Questions and Answers

कृति

(कृतिपत्रिका के प्रश्न 1 (अ) तथा प्रश्न 1 (आ) के लिए 

*सूचना के अनुसार कृतियाँ कीजिए:

प्रश्न 1.
उत्तर लिखिए:
१. व्यापारी और उद्योगपतियों के लिए अर्थशास्त्र द्वारा बनाए गए नये नियम –
२. संपत्ति के दो मुख्य साधन –
३. समाप्त हुईं दो प्रथाएँ –
४. कल्याणकारी राज्य का अर्थ –
उत्तर:
कल्याणकारी राज्य का अर्थ – सब तरह के दुर्बलों को राजसत्ता द्वारा मदद दिया जाना।

प्रश्न 2.
कृति पूर्ण कीजिए:
Maharashtra Board Class 10 Hindi Solutions Chapter 3 श्रम साधना 44
उत्तर:
Maharashtra Board Class 10 Hindi Solutions Chapter 3 श्रम साधना 35

प्रश्न 3.
तुलना कीजिए:
बुद्धिजीवी – श्रमजीवी
1. …………………. 2. ………………….
1. …………………. 2. ………………….
उत्तर:
बुद्धिजीवी – श्रमजीवी
1. बौद्धिक काम करना। -1. शारीरिक श्रम करना।
2. अधिक आमदनी, प्रतिष्ठित एवं सुखमय जीवन। – 2. आमदनी कम, प्रतिष्ठा नहीं, कष्टमय जीवन।

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प्रश्न 4.
लिखिए:
Maharashtra Board Class 10 Hindi Solutions Chapter 3 श्रम साधना 454
उत्तर:
Maharashtra Board Class 10 Hindi Solutions Chapter 3 श्रम साधना 39

प्रश्न 5.
पाठ में प्रयुक्त ‘इक’ प्रत्यययुक्त शब्दों को ढूँढ़कर लिखिए तथा उनमें से किन्हीं चार का स्वतंत्र वाक्यों में प्रयोग कीजिए।
उत्तर:

प्रश्न 6.
पाठ में कुछ ऐसे शब्द हैं, जिनके विलोम शब्द भी पाठ में ही प्रयुक्त हुए हैं, ऐसे शब्द ढूँढ़कर लिखिए।
उत्तर:
(i) हाड़ × माँस
(ii) प्रत्यक्ष × अप्रत्यक्ष
(iii) देश × विदेश
(iv) हाथ × पैर
(v) स्वार्थ × परार्थ
(vi) अमीर × गरीब।

अभिव्यक्ति
‘समाज परोपकार वृत्ति के बल पर ही ऊँचा उठ सकता है’, इस कथन से संबंधित अपने विचार लिखिए।
उत्तर:
हमारे शास्त्रों में परोपकार को बहुत महत्त्व दिया गया है। पेड़ों में फल लगना, नदियों के जल का बहना परोपकार का ही एक रूप है। इसी तरह सज्जन व्यक्तियों की संपत्ति और इस शरीर को भी परोपकार में लगा देने के लिए कहा गया है। हमारे समाज में गरीब-अमीर हर प्रकार के व्यक्ति होते हैं। अनेक लोग ऐसे हैं जिन्हें भरपेट भोजन भी नहीं मिलता और कुछ लोग ऐसे हैं, जिनके पास इतनी संपत्ति है कि उन्हें स्वयं इसकी पूरी जानकारी नहीं है। मनुष्य में परोपकार की प्रवृत्ति जन्मजात होती है। प्यासे को पानी पिलाना और किसी भूखे को खाना खिला देना कौन नहीं चाहता।

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यही परोपकार भावना है। हमारे देश में अनेक अस्पताल, अनेक शिक्षा संस्थाएँ परोपकार करने वाले लोगों के धन से चल रही हैं। समाज के कमजोर वर्ग के लिए तरह-तरह की संस्थाएँ काम कर रही हैं। इनका संचालन दान अथवा सहायता के रूप में प्राप्त धन से हो रहा है। हर युग में समाज के उत्थान के लिए परोपकारियों का सहयोग प्राप्त होता रहा है। यह सहयोग इसी तरह मिलता रहना चाहिए तभी हमारे समाज का उत्थान होगा।

भाषा बिंदु

प्रश्न 1.
निम्न वाक्यों में अधोरेखांकित शब्द समूह के लिए कोष्ठक में दिए गए मुहावरों में से उचित मुहावरे का चयन कर वाक्य फिर से लिखिए:
[इज्जत उतारना, हाथ फेरना, काँप उठना, तिलमिला जाना, दुम हिलाना, बोलबाला होना]

१. करामत अली हौले-से लक्ष्मी से स्नेह करने लगा।
वाक्य = ………………………………………
उत्तर:
वाक्य: करामत अली हौले-से लक्ष्मी पर हाथ फेरने लगा।

२. सार्वजनिक अस्पताल का खयाल आते ही मैं भयभीत हो गया ।
वाक्य = ………………………………………
उत्तर:
वाक्य: सार्वजनिक अस्पताल का ख्याल आते ही मैं काँप उठा।

३. क्या आपने मुझे अपमानित करने के लिए यहाँ बुलाया था ?
वाक्य = ………………………………………
उत्तर:
वाक्य: क्या आपने मेरी इज्जत उतारने के लिए यहाँ बुलाया था?

४. सिरचन को बुलाओ, चापलूसी करता हुआ हाजिर हो जाएगा।
वाक्य = ………………………………………
उत्तर:
वाक्य: सिरचन को बुलाओ, दुम हिलाता हुआ हाजिर हो जाएगा।

५. पंडित बुद्धिराम काकी को देखते ही क्रोध में आ गए।
वाक्य = ………………………………………
उत्तर:
वाक्य: पंडित बुद्धिराम काकी को देखते ही तिलमिला उठे।

प्रश्न 2.
निम्नलिखित मुहावरों का अर्थ लिखकर उनका अर्थपूर्ण वाक्यों में प्रयोग कीजिए
१. गुजर-बसर करना: ………………………………………
२. गला फाड़ना: ………………………………………
३. कलेजे में हूक उठना: ………………………………………
४. सीना तानकर खड़े रहना: ………………………………………
५. टाँग अड़ाना: ………………………………………
६. जेब ढीली होना: ………………………………………
७. निजात पाना: ………………………………………
८. फूट-फूटकर रोना: ………………………………………
९. मन तरंगायित होना: ………………………………………
१०. मुँह लटकाना: ………………………………………
उत्तर:
(i) गुजर-बसर करना।
अर्थ: जीविका चलाना।
वाक्य: पंडित घनश्याम किसी तरह गुजर-बसर कर लेते हैं।

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(ii) गला फाड़ना।
अर्थ: ऊँची आवाज में बोलना।
वाक्य: बेटे ने पिता से कहा, “मैं आपकी बात सुन रहा हूँ,आप
नाहक गला फाड़ रहे हैं।”

(iii) कलेजे में हूक उठना।
अर्थ: कसक होना।
वाक्य: सेठ लक्खूमल जब भी जवान बेटे की हत्या की बात याद करते हैं, उनके कलेजे में हूक उठती है।

(iv) सीना तानकर खड़े रहना।
अर्थ: दृढ़तापूर्वक अड़े रहना।।
वाक्य: वह समाजसेवक निर्दोष लोगों की सहायता के लिए सीना तानकर खड़ा रहता हैं।

(v) टाँग अड़ानां।
अर्थ: कार्य में बाधा डालना।
वाक्य: किसी के बनते हुए काम में टाँग अड़ाना अच्छी बात नहीं है।

(vi) जेब ढीली होना।
अर्थ: काफी खर्च होना।
वाक्य: मरीज की बीमारी तो ठीक हो गई, पर अस्पताल का बिल भरने में जेब ढीली हो गई।

(vii) निजात पाना।
अर्थ: मुक्त होना।
वाक्य: आखिरकार लंबे अरसे बाद सेठजी लेन-देन के मुकदमे से निजात पा गए।

(viii) फूट-फूटकर रोना।
अर्थ: बिलखते हुए रोना।
वाक्य: बेटे के गायब हो जाने पर माँ फूट-फूटकर रोई थी।

(ix) मन तरंगित होना।
अर्थ: मौज में आना।
वाक्य: बेटे की अच्छे वेतनवाली नौकरी लग जाने की बात सुनकर पिता का मन तरंगित हो गया।

(x) मुँह लटकाना।
अर्थ: चिंता, दुख से सिर नीचा कर लेना।
वाक्य: पिता जब निकम्मे बेटे को फटकारता है, तो वह मुँह लटकाकर सुनता रहता है।

प्रश्न 3.
पाठ्यपुस्तक में आए मुहावरों का अपने वाक्यों में प्रयोग कीजिए।
उत्तर:
(इसके लिए विद्यार्थी ‘नवनीत हिंदी (LL) उपयोजित लेखन, कक्षा दसवीं’ पुस्तक देखें।)

उपयोजित लेखन

निम्न शब्दों के आधार पर कहानी लेखन कीजिए
मिट्टी, चाँद, खरगोश, कागज।
उत्तर:
एक छोटा-सा गाँव था। गाँव के लोग खेती-बारी से अपना गुजारा करते थे। लोगों के पास छोटे-छोटे खेत थे। वे अपने खेतों में साल में दो फसलें उगाते थे। खेतों में उत्पन्न अनाज से साल भर बड़ी मुश्किल से उनका काम चलता था। इस गाँव के लोगों में आपस में बहुत प्रेम-भाव था। गाँव में कुछ लोग ऐसे थे, जिनके पास खेत भी नहीं थे। उनका जीवन बहुत कष्टमय था। इन्हीं में से एक था आत्माराम। आत्माराम गाँव के किसानों के खेत में काम करके कुछ कमा लिया करता था।

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एक दिन गाँव में एक साधु महाराज आए। आत्माराम ने साधु के सामने अपनी समस्या रखते हुए कहा, “महाराज कुछ ऐसा उपाय बताइए, जिसमें मैं चार पैसे कमाकर अपना और अपने परिवार का पेट पाल सकूँ।” साधु महाराज ने कहा, “ले यह मिट्टी। यह मिट्टी तेरे लिए सोना बनेगी।” आत्माराम बोला, “मैं समझा नहीं, महाराज। ऐसी मिट्टी तो गाँव में बहुत है, क्या करूँ इसका?” साधु ने कहा, “मिट्टी खोद। उससे खिलौने बना और बाजार में बेच। तेरा भला होगा।” आत्माराम ने साधु को धन्यवाद दिया।

वह मिट्टी से खरगोश, चूहा, तोता, गुड़िया, गुड्डा बनाता और बाजार में बेच आता। इससे उसे अच्छी आय होने लगी। अब उसकी जिंदगी आराम से चलने लगी।

एक दिन बाजार में एक लड़के ने उससे चाँद के खिलौने की माँग की। यह खिलौना तो उसने कभी बनाया ही नहीं था। बात आई-गई हो गई।

एक दिन आत्माराम ने चाँद की शक्ल का पतंग आकाश में उड़ते हुए देखा। फिर क्या था! अब आत्माराम ने मिट्टी के खिलौने बनाने बंद कर दिए और कागज के पतंग, खरगोश, तोते, बिल्ली, गुड़िया, गुड्डा आदि बनाने लगा। अब उसके खिलौनों का वजन हल्का हो गया और उसकी कमाई भारी हो गई।

Hindi Lokbharti 10th Textbook Solutions Chapter 3 श्रम साधना Additional Important Questions and Answers

गद्यांश क्र.1
प्रश्न. निम्नलिखित पठित गद्यांश पढ़कर दी गई सूचनाओं के अनुसार कृतियाँ कीजिए:

कृति 1: (आकलन)

आकृति पूर्ण कीजिए:
Maharashtra Board Class 10 Hindi Solutions Chapter 3 श्रम साधना 1
(स्वाध्याय में दिए गए ‘उत्तर लिखिए’ प्रश्न को कृतिस्वरूप में दिया गया है।)
Maharashtra Board Class 10 Hindi Solutions Chapter 3 श्रम साधना 2
Maharashtra Board Class 10 Hindi Solutions Chapter 3 श्रम साधना 3
उत्तर:
Maharashtra Board Class 10 Hindi Solutions Chapter 3 श्रम साधना 4
(ii)
Maharashtra Board Class 10 Hindi Solutions Chapter 3 श्रम साधना 5
(iii)
Maharashtra Board Class 10 Hindi Solutions Chapter 3 श्रम साधना 6

Maharashtra Board Class 10 Hindi Solutions Chapter 3 श्रम साधना

कृति 2: (आकलन)

प्रश्न 1.
(i) संजाल पूर्ण कीजिए:
Maharashtra Board Class 10 Hindi Solutions Chapter 3 श्रम साधना 7
उत्तर:
Maharashtra Board Class 10 Hindi Solutions Chapter 3 श्रम साधना 13

(ii) लिखिए:
Maharashtra Board Class 10 Hindi Solutions Chapter 3 श्रम साधना 8
उत्तर:
Maharashtra Board Class 10 Hindi Solutions Chapter 3 श्रम साधना 14

Maharashtra Board Class 10 Hindi Solutions Chapter 3 श्रम साधना

प्रश्न 2.
आकृति पूर्ण कीजिए:
(i)
Maharashtra Board Class 10 Hindi Solutions Chapter 3 श्रम साधना 9
(ii)
Maharashtra Board Class 10 Hindi Solutions Chapter 3 श्रम साधना 10
(iii)
Maharashtra Board Class 10 Hindi Solutions Chapter 3 श्रम साधना 11
(iv)
Maharashtra Board Class 10 Hindi Solutions Chapter 3 श्रम साधना 12
उत्तर:
Maharashtra Board Class 10 Hindi Solutions Chapter 3 श्रम साधना 15

कृति 3: (शब्द संपदा)

प्रश्न 1.
शब्दों के समानार्थी शब्द लिखिए:
(i) प्रथा =
(ii) युद्ध =
(iii) हुकूमत =
(iv) गुलामी =
उत्तर:
(i) प्रथा = रिवाज
(ii) युद्ध = लड़ाई
(iii) हुकूमत = शासन
(iv) गुलामी = दासता।

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प्रश्न 2.
विरुद्धार्थी शब्द लिखिए:
(i) गौण x
(ii) अनेक x
(iii) अप्राकृतिक x
(iv) बादशाह x
उत्तर:
(i) गौण x मुख्य
(ii) अनेक x एक
(iii) अप्राकृतिक x कृत्रिम
(iv) बादशाह x भिखारी।

प्रश्न 3.
लिंग पहचान कर लिखिए:
(i) मकान – ………………………
(i) संपत्ति – …………………………
उत्तर:
(i) मकान – पुल्लिग
(ii) संपत्ति – स्त्रीलिंग।

कृति 4: (स्वमत अभिव्यक्ति)

प्रश्न.
‘राजाओं और बादशाहों का राज’ के बारे में अपने विचार 25 से 30 शब्दों में व्यक्त कीजिए।
उत्तर:
स्वतंत्रता प्राप्ति के पहले हमारे देश में छोटी-बडी अनेक रियासतें थीं। राजा, बादशाह और तालुकेदार इन रियासतों के मालिक थे। इनके राज में रहने वाली जनता इनकी प्रजा कहलाती थी। राजा और बादशाह जनता से तरह-तरह के कर वसूल करते थे और कर अदा न कर पाने पर जनता पर तरह-तरह के अत्याचार करते थे। एक तरह से जनता को ये अपना गुलाम समझते थे और उसका शोषण करने में जरा भी नहीं झिझकते थे। जनता इनसे त्रस्त थी।

इसके अलावा ये राजा और बादशाह अपने स्वार्थ के लिए आपस में लड़ते-भिड़ते थे और मौका मिलने पर एक-दूसरे की रियासतों पर कब्जा कर जनता में लूटपाट किया करते थे। असहाय जनता की कोई सुनने वाला नहीं था। आजादी मिलने के बाद इन छोटी-छोटी रियासतों को खत्म कर भारत संघ में मिला लिया गया। इसके बाद इन राजाओं और बादशाहों का राज खत्म हो गया। इसके साथ ही समाप्त हो गया जनता पर इनका अत्याचार। फिर तो प्रजातंत्र में न कोई किसी का राजा रहा न कोई किसी की प्रजा। सबको समान अधिकार उपलब्ध हो गए।

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गद्यांश क्र. 2
प्रश्न निम्नलिखित पठित गद्यांश पढ़कर दी गई सूचनाओं के अनुसार कृतियाँ कीजिए:

कृति 1: (आकलन)

प्रश्न 1.
संजाल पूर्ण कीजिए:
Maharashtra Board Class 10 Hindi Solutions Chapter 3 श्रम साधना 16
उत्तर:
Maharashtra Board Class 10 Hindi Solutions Chapter 3 श्रम साधना 18
Maharashtra Board Class 10 Hindi Solutions Chapter 3 श्रम साधना 19

Maharashtra Board Class 10 Hindi Solutions Chapter 3 श्रम साधना

प्रश्न 2.
अकृति पूर्ण कीजिए:
Maharashtra Board Class 10 Hindi Solutions Chapter 3 श्रम साधना 17
उत्तर:
Maharashtra Board Class 10 Hindi Solutions Chapter 3 श्रम साधना 20

कृति 2: (आकलन)

प्रश्न 1.
संजाल पूर्ण कीजिए:
Maharashtra Board Class 10 Hindi Solutions Chapter 3 श्रम साधना 21
उत्तर:
Maharashtra Board Class 10 Hindi Solutions Chapter 3 श्रम साधना 23

प्रश्न 2.
उत्तर लिखिए:
(i) जो संपत्ति का निर्माण करते हैं, वे – [ ]
(ii) धन इकट्ठा होता है इनके पास – [ ]
(iii) बौद्धिक काम से अपना भरण-पोषण करने वाले लोग – [ ]
(iv) समाज के लिए ये दोनों जरूरी हैं – [ ]
उत्तर:
(i) जो संपत्ति का निर्माण करते हैं, वे माण – [मजदूर]
(ii) धन इकट्ठा होता है इनके पास – [व्यवस्था करने वाले]
(iii) बौद्धिक काम से अपना भरण-पोषण करने वाले लोग – [मंत्री, राज्य के कर्मचारी, क्लर्क, न्यायाधीश, वकील, डॉक्टर, अध्यापक, व्यापारी]
(iv) समाज के लिए ये दोनों जरूरी है – [श्रमजीवी और बुद्धिजीवी]

Maharashtra Board Class 10 Hindi Solutions Chapter 3 श्रम साधना

प्रश्न 3.
आकृति पूर्ण कीजिए:
(i)Maharashtra Board Class 10 Hindi Solutions Chapter 3 श्रम साधना 22
उत्तर:
Maharashtra Board Class 10 Hindi Solutions Chapter 3 श्रम साधना 24

(ii) दो ऐसे प्रश्न बनाकर लिखिए, जिनके उत्तर निम्नलिखित शब्द हों:
(1) अन्न
(2) श्रम जीवियों पर
उत्तर:
(1) वर्षभर मेहनत कर किसान क्या पैदा करता है?
(2) बुद्धिजीवियों का जीवन किन लोगों पर आधारित है?

कृति 3: (शब्द संपदा)

प्रश्न 1.
गद्यांश में आए शब्द-युग्म ढूँढ़कर लिखिए।
(i) ……………………..
(ii) ……………………..
(iii) ……………………..
(iv) ……………………..
उत्तर:
(i) लेन – देन
(ii) राज – काज
(iii) ऊँचे – ऊँचे
(iv) भरण – पोषण।

प्रश्न 2.
विरुद्धार्थी शब्द लिखिए:
(i) प्रत्यक्ष × ……………………..
(ii) धनवान × ……………………..
(iii) ऊँचा × ……………………..
(iv) दुर्भाग्य × ……………………..
उत्तर:
(i) प्रत्यक्ष × परोक्ष
(ii) धनवान × निर्धन
(iii) ऊँचा × नीचा
(iv) दुर्भाग्य × सौभाग्य।

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कृति 4: (स्वमत अभिव्यक्ति)

प्रश्न.
‘शारीरिक श्रम का महत्त्व’ विषय पर अपने विचार 25 से 30 शब्दों में लिखिए।
उत्तर:
श्रम दो प्रकार का होता है। शारीरिक श्रम और बौद्धिक श्रम। पुराने जमाने में पढ़े-लिखे लोगों की संख्या कम थी, इसलिए लोगों को शारीरिक श्रम का ही सहारा था। वे जीवन-यापन के लिए छोटा-मोटा काम करके अपना गुजारा कर लेते थे। शिक्षा की समुचित व्यवस्था हो जाने के बाद पढ़े-लिखे लोगों की संख्या में अंधाधुंध वृद्धि हुई है। हर शिक्षित व्यक्ति चाहता है कि उसे ऐसी नौकरी मिले, जिसमें उसे शारीरिक श्रम न करना पड़े। शारीरिक श्रम वाला काम कोई करना नहीं चाहता। इसलिए देश में लाखों नवयुवक बेरोजगार हैं। यह लोगों के शारीरिक श्रम से परहेज रखने का परिणाम है।

लोगों को शारीरिक श्रम का महत्त्व समझना जरूरी है। बुद्धि के बल पर बड़ीबड़ी योजनाएँ बनाई जा सकती हैं, पर उनका कार्यान्वयन करने के लिए शारीरिक श्रम की ही आवश्यकता होती है। छोटी-छोटी चीजों से लेकर बड़ी-बड़ी चीजों का निर्माण केवल शारीरिक श्रम से ही हो सकता है। जो व्यक्ति इस रहस्य को समझते हैं, वे शारीरिक श्रम को महत्त्व देते हैं। अनेक पढ़े-लिखे लोग अपना व्यवसाय अथवा छोटा-मोटा काम शुरू करके अपना जीवन-यापन कर रहे हैं और बौद्धिक श्रम के साथ शारीरिक श्रम उनका साथ दे रहा है। स्वरोजगार के द्वारा वे स्वयं भी काम कर रहे हैं और दूसरों को भी रोजगार दे रहे हैं।

गद्यांश क्र. 3
प्रश्न. निम्नलिखित पठित गद्यांश पढ़कर दी गई सूचनाओं के अनुसार कृतियाँ कीजिए:

कृति 1: (आकलन)

आकृति पूर्ण कीजिए:
Maharashtra Board Class 10 Hindi Solutions Chapter 3 श्रम साधना 25
Maharashtra Board Class 10 Hindi Solutions Chapter 3 श्रम साधना 26
Maharashtra Board Class 10 Hindi Solutions Chapter 3 श्रम साधना 27
उत्तर:
Maharashtra Board Class 10 Hindi Solutions Chapter 3 श्रम साधना 28
Maharashtra Board Class 10 Hindi Solutions Chapter 3 श्रम साधना 30
Maharashtra Board Class 10 Hindi Solutions Chapter 3 श्रम साधना 31

Maharashtra Board Class 10 Hindi Solutions Chapter 3 श्रम साधना

कृति 2: (आकलन)

प्रश्न 1.
आकृति पूर्ण कीजिए:
(i)Maharashtra Board Class 10 Hindi Solutions Chapter 3 श्रम साधना 32
(ii)Maharashtra Board Class 10 Hindi Solutions Chapter 3 श्रम साधना 33
उत्तर:
Maharashtra Board Class 10 Hindi Solutions Chapter 3 श्रम साधना 34
(ii)

कृति 3: (शब्द संपदा)

प्रश्न 1.
निम्नलिखित शब्दों के समानार्थी शब्द लिखिए:
(i) आम = …………………….
(ii) श्रम = …………………….
(iii) हिस्सा = …………………….
(iv) जगत = …………………….
उत्तर:
(i) आम = सामान्य
(ii) श्रम = मेहनत
(iii) हिस्सा = भाग
(iv) जगत = संसार।

प्रश्न 2.
निम्नलिखित शब्दों में से प्रत्यय और मूल शब्द अलग करके लिखिए:
(i) योग्यता
(i) अल्पतम
(ii) बुनियादी
(iv) सामाजिक
उत्तर:
(i) योग्य + ता (ता)
(ii) अल्प + तम (तम)
(iii) बुनियाद + ई (ई)
(iv) समाज + इक (इक)।

Maharashtra Board Class 10 Hindi Solutions Chapter 3 श्रम साधना

कृति 4: (स्वमत अभिव्यक्ति)

प्रश्न.
‘समाज परोपकार वृत्ति के बल पर ही ऊँचा उठ सकता है’- इस कथन से संबंधित अपने विचार 25 से 30 शब्दों में लिखिए।

गद्यांश क्र.4
प्रश्न. निम्नलिखित पठिक अट्यार पढ़कर दी गई सूचनाओं के अनुसार कृतियाँ कीजिए:

कृति 1: (आकलन)

आकृति पूर्ण कीजिए:
Maharashtra Board Class 10 Hindi Solutions Chapter 3 श्रम साधना 36
(iii) Maharashtra Board Class 10 Hindi Solutions Chapter 3 श्रम साधना 37
उत्तर:
Maharashtra Board Class 10 Hindi Solutions Chapter 3 श्रम साधना 38

कृति 2: (आकलन)

प्रश्न 1.
आकृति पूर्ण कीजिए:
Maharashtra Board Class 10 Hindi Solutions Chapter 3 श्रम साधना 40
उत्तर:
Maharashtra Board Class 10 Hindi Solutions Chapter 3 श्रम साधना 41

Maharashtra Board Class 10 Hindi Solutions Chapter 3 श्रम साधना

प्रश्न 2.
आकृति पूर्ण कीजिए:
(i) अर्थशास्त्रियों के अनुसार उत्पादन की प्रेरणा के लिए यह करना होगा – [ ]
(ii) पूँजी के बारे में अनुभव यह बताता है – [ ]
(iii) लेखक के अनुसार स्वार्थ का अर्थ – [ ]
(iv) समाज इस वृत्ति के बल पर ऊँचा उठ सकता है – [ ]
उत्तर:
(i) अर्थशास्त्रियों के अनुसार उत्पादन की प्रेरणा के लिए यह करना होगा – [व्यक्ति को स्वार्थ के लिए अवसर देने होंगे।
(ii) पूँजी के बारे में अनुभव यह बताता है – [पूँजी गरीबी या बेकारी की समस्या हल नहीं कर सकी है]
(iii) लेखक के अनुसार स्वार्थ का अर्थ – [परार्थ की हानि]
(iv) समाज इस वृत्ति के बल पर ऊँचा उठ सकता है – [परोपकार की वृत्ति]

प्रश्न 3.
गद्यांश के वाक्यों को उचित क्रम से लिखिए:
(i) देखना है कि समाज का कल्याण किस वृत्ति से होगा।
(ii) बिना शरीर श्रम किए उस सामग्री का उपयोग करने का न्यायोचित अधिकार हमें नहीं मिलता।
(iii) आजीविका की साधन-सामग्री किसी-न-किसी के श्रम के बिना हो ही नहीं सकती।
(iv) नैतिक दृष्टि से स्वार्थवृत्ति का पोषण करना योग्य नहीं है।
उत्तर:
(i) आजीविका की साधन-सामग्री किसी-न-किसी के श्रम के बिना हो ही नहीं सकती।
(ii) बिना शरीर श्रम किए उस सामग्री का उपयोग करने का न्यायोचित अधिकार हमें नहीं मिलता।
(iii) नैतिक दृष्टि से स्वार्थवृत्ति का पोषण करना योग्य नहीं है।
(iv) देखना है कि समाज का कल्याण किस वृत्ति से होगा।

कृति 3: (शब्द संपदा)

प्रश्न 1.
निम्नलिखित शब्द समूह के लिए गद्यांश से चुनकर एक-एक शब्द लिखिए:
(i) वह दौलत, जो किसी के अधिकार में हो और जो खरीदी या बेची जा सकती हो-
(ii) दूसरों के उपकार या भलाई का काम’ –
(iii) ऐसी बात-जिसमें केवल अपना हित हो –
(iv) वह धन-जिससे कोई व्यवसाय आरंभ किया गया हो –
उत्तर:
(i) संपत्ति
(ii) परोपकार
(iii) स्वार्थ
(iv) पूँजी।

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प्रश्न 2.
विरुद्धार्थी शब्द लिखिए:
(i) थोड़ा × ……………………
(ii) दोषपूर्ण × ……………………
(iii) योग्य × ……………………
(iv) गरीबी × ……………………
उत्तर:
(i) थोड़ा × बहुत
(ii) दोषपूर्ण × निर्दोष
(iii) योग्य × अयोग्य
(iv) गरीबी × अमीरी।

कृति 4: (स्वमत अभिव्यक्ति)

प्रश्न.
‘मेवे फलते श्रम की डाल’ विषय पर 25 से 30 शब्दों में अपनी लिखित अभिव्यक्ति दीजिए।
उत्तर:
श्रम दो प्रकार का होता है। एक शारीरिक श्रम और दूसरा बौद्धिक श्रम। दोनों प्रकार के श्रम का अपना-अपना महत्त्व है। श्रम को सदा महत्त्व दिया गया है। श्रम करने वाला व्यक्ति परिश्रम करके अपना भरण-पोषण करता है और शान से रहता है। जो श्रम करता है, वह स्वयं अपने भाग्य का निर्माण करता है। वह अपना खून-पसीना एक कर मेहनत की पवित्र रोटी खाता है। मेहनत की जिंदगी ही सच्ची जिंदगी है।

श्रम करने वाला व्यक्ति काम से कभी नहीं घबराता। उसके सामने जैसा भी काम आता है, उसे वह लगन और मेहनत से पूरा करता है। विद्यार्थी श्रम द्वारा ही परीक्षा में सफलता प्राप्त करते हैं। मजदूर, किसान, इंजीनियर, वैज्ञानिक, व्यापारी, खिलाड़ी आदि सबकी प्रगति में श्रम का ही हाथ होता है। हमें याद रखना चाहिए कि श्रम कभी बेकार नहीं जाता। ईमानदारी से किए गए श्रम का तुरंत लाभ भले न मिले, पर कभी-न-कभी उसका फल मिलकर ही रहता है। श्रम करने वाले ही मेवों का स्वाद चखते हैं।

गद्यांश क्र. 5
प्रश्न. निम्नलिखित पठित गद्यांश पढ़कर दी गई सूचनाओं के अनुसार कृतियाँ कीजिए:

कृति 1: (आकलन)

प्रश्न 1.
आकृति पूर्ण कीजिए:
Maharashtra Board Class 10 Hindi Solutions Chapter 3 श्रम साधना 42
उत्तर:
Maharashtra Board Class 10 Hindi Solutions Chapter 3 श्रम साधना 43

Maharashtra Board Class 10 Hindi Solutions Chapter 3 श्रम साधना

प्रश्न 2.
निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर लिखिए:
(i) शरीर श्रम के लिए क्या जरूरी है?
(ii) श्रम की प्रतिष्ठा बढ़ाना किसके हाथ है?
उत्तर:
(i) शरीर श्रम के लिए जरूरी है दिल में प्रीति होना।
(ii) श्रम की प्रतिष्ठा बढ़ाना श्रमिक के हाथ है।

कृति 2: (आकलन)

प्रश्न 1.
आकृति पूर्ण कीजिए:
(i) गांधीजी की मान्यता के अनुसार। हर व्यक्ति को यह करना चाहिए – [ ]
(ii) अब कुछ समय से जगत के सामने दया की जगह यह विचार आया है – [ ]
(iii) महात्माजी द्वारा दी गई प्रसिद्ध विचारधारा – [ ]
(iv) अहिंसा के मार्ग से यह प्रश्न हल हो सकता है – [ ]
उत्तर;
(i) गांधीजी की मान्यता के अनुसार हर व्यक्ति को यह करना चाहिए – [उत्पादक श्रम]
(ii) अब कुछ समय से जगत के सामने दया की जगह यह विचार आया है – [समता का]
(iii) महात्माजी द्वारा दी गई गई प्रसिद्ध विचारधारा – [अहिंसा]
(iv) अहिंसा के मार्ग से यह प्रश्न हल हो सकता है – [विषमता का]

प्रश्न 2.
निम्नलिखित वाक्यों के आधार पर प्रश्न बनाइए:
(i) गांधीजी ने श्रम और श्रमिक की प्रतिष्ठा स्थापित करने के लिए ही रचनात्मक कार्यों को लोक चेतना का माध्यम बनाया।
(ii) कानून से मानवोचित गुणों का विकास नहीं हो सकता?
(iii) अहिंसा के प्रभाव का कुछ अनुभव भी हम कर सकते हैं।
(iv) आर्थिक सामाजिक समता का प्रश्न अहिंसा के मार्ग से सुलझेगा।
उत्तर:
(i) गांधीजी ने किन बातों की प्रतिष्ठा स्थापित करने के लिए रचनात्मक कार्यों को लोक चेतना का माध्यम बनाया?
(ii) कानून से किन गुणों का विकास नहीं हो सकता?
(iii) किसके प्रभाव का अनुभव हम कर सकते हैं?
(iv) आर्थिक सामाजिक समता का प्रश्न किस मार्ग से सुलझेगा?

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कृति 3: (शब्द संपदा)

प्रश्न 1.
निम्नलिखित शब्दों के वचन पहचान कर लिखिए:
(i) बच्चा – ………………….
(ii) विषमताएँ – ………………….
(iii) पैसे – ………………….
(iv) धनिक – ………………….
उत्तर:
(i) बच्चा – एकवचन
(ii) विषमताएँ – बहुवचन
(ii) पैसे – बहुवचन
(iv) धनिक – एकवचन।

प्रश्न 2.
गद्यांश में प्रयुक्त ‘इक’ प्रत्यययुक्त शब्दों को ढूँढ़कर स्वतंत्र वाक्यों में प्रयोग कीजिए:
(i) ………………….
(ii) ………………….
(iii) ………………….
(iv) ………………….
(v) ………………….
(vi) ………………….
उत्तर:
(i) आर्थिक
(ii) प्राकृतिक
(iii) श्रमिक
(iv) सामाजिक
(v) प्राथमिक
(vi) बौद्धिक

(i) आर्थिक: किसानों की आर्थिक दशा सुधारने के लिए कुछ करो।
(ii) प्राकृतिक: कश्मीर की घाटी प्राकृतिक दृश्यों से भरी पड़ी है।
(iii) श्रमिक: कारखाने में काम करने वाले श्रमिक का काम बहुत मेहनत का होता है।
(iv) सामाजिक: मनुष्य एक सामाजिक प्राणी है।
(v) प्राथमिक: घायल व्यक्ति को तुरंत प्राथमिक चिकित्सा की जरूरत होती है।
(vi) बौद्धिक: हर व्यक्ति की बौद्धिक क्षमता भिन्न-भिन्न होती है।

Maharashtra Board Class 10 Hindi Solutions Chapter 3 श्रम साधना

कृति 4: (स्वमत अभिव्यक्ति)

प्रश्न.
शारीरिक श्रम स्वास्थ के लिए अति उत्तम’ विषय पर अपने। विचार 25 से 30 शब्दों में लिखिए।
उत्तर:
शारीरिक श्रम का अर्थ है, वह मेहनत, जिसमें हाथ-पैर के सहयोग से काम संपन्न हो। किसान, मजदूर, क्ली, ठेलेवाले, शारीरिक मेहनत करते हैं। वैसे हर व्यक्ति जाने-अनजाने थोड़ी बहुत शारीरिक मेहनत करता ही है। अपने घर की सफाई करना, खाना बनाना, बरतन धोना और बाजार-हाट से सामान-सब्जी लाना भी श्रम है। कुछ शारीरिक काम करने वाले लोग धूप में खेतों में काम करते हैं।

कुछ कारखानों में पसीना बहाकर मेहनत करते हैं। कुछ अनाज के बोरे ३ गाड़ियों पर चढ़ाते-उतारते हैं। कुछ सड़कों पर हथौड़े लेकर पत्थर तोड़ते ३ या खुदाई करते हैं। ये मोटा खाते और मोटा पहनते हैं, पर शारीरिक ३ रूप से स्वस्थ होते हैं। दूसरी ओर वे लोग हैं, जो कोई शारीरिक श्रम ३ नहीं करते। वे पौष्टिक भोजन करते हैं, नर्म गद्देदार बिछौनों पर सोते B हैं, पर बीमारी के कारण उन्हें नींद नहीं आती। भोजन नहीं पचता।

डॉक्टर इन्हें कम भोजन करने और ज्यादा दवाइयाँ लेने के लिए कहते हैं। शारीरिक श्रम के अभाव में इनका जीवन कष्टप्रद बन जाता है।

डॉक्टर इन्हें हाथ-पैर चलाने और व्यायाम करने की सलाह देते हैं। ऐसे 3 लोगों को शारीरिक श्रम करने वालों से सबक लेना चाहिए, जो

अपनी मेहनत के बल पर भले-चंगे बने रहते हैं। इस प्रकार शारीरिक , श्रम अच्छे स्वाथ्य की कुंजी है।

भाषा अध्ययन (व्याकरण)

प्रश्न, सूचनाओं के अनुसार कृतियाँ कीजिए:

1. शब्द भेद:

प्रश्न.
अधोरेखांकित शब्दों के शब्दभेद पहचानकर लिखिए:
(i) गांधीजी ने यह काम श्रम और श्रमिक की प्रतिष्ठा कायम करने के लिए किया।
(ii) विषमता दूर करने के लिए प्रभावशाली उपाय करना चाहिए।
उत्तर:
(1) गांधीजी – व्यक्तिवाचक संज्ञा।
(ii) प्रभावशाली – गुणवाचक विशेषण।

2. अव्यय:

प्रश्न.
निम्नलिखित अव्ययों का अपने वाक्यों में प्रयोग कीजिए:
(i) फिर
(ii) कभी-कभी।
उत्तर:
(i) संपत्ति रूपी ये सब चीजें फिर कैसे बनती हैं?
(ii) बुद्धिजीवियों को भी कभी-कभी शरीर श्रम करना पड़ता है।

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3. संधि:

प्रश्न.
कृति पूर्ण कीजिए:

संधि शब्द संधि विच्छेद संधि भेद
…………………… स्व + अर्थ ……………………
 अथवा
 …………………… सम् + पूर्ण……………………

उत्तर:

संधि शब्द संधि विच्छेदसंधि भेद
स्वार्थ स्व + अर्थस्वर संधि
 अथवा
सपूर्ण सम् + पूर्णव्यंजन संधि

4. सहायक क्रिया:

प्रश्न.
निम्नलिखित वाक्यों में से सहायक क्रियाएँ पहचानकर उनका मूल रूप लिखिए:
(i) प्रतिदिन समय पर अपना काम किया करो।
(ii) वह अपनी जमा-पूँजी भी गंवा बैठा।
उत्तर:
सहायक क्रिया – मूल रूप
(i) करो – करना
(ii) बैठा – बैठना

5. प्रेरणार्थक क्रिया:

प्रश्न.
निम्नलिखित- क्रियाओं के प्रथम प्रेरणार्थक और द्वितीय प्रेरणार्थक रूप लिखिए:
(i) खौलना
(ii) डूबना।
उत्तर:
क्रिया – प्रथम प्रेरणार्थक रूप – दवितीय प्रेरणार्थक रूप
(i) खौलना – खौलाना – खौलवाना
(ii) डूबना – डुबाना – डुबवाना

Maharashtra Board Class 10 Hindi Solutions Chapter 3 श्रम साधना

6. मुहावरे:

प्रश्न 1.
निम्नलिखित मुहावरों का अर्थ लिखकर वाक्य में प्रयोग कीजिए:
(i) मुंह फेरना
(ii) रट लगाना।
उत्तर:
(i) मुँह फेरना।
अर्थ: उपेक्षा करना।
वाक्य: कर्मचारी अपनी माँग लेकर सेठ जी के पास जाते तो वे उनसे बात करने के बजाय मुँह फेर लेते।

(ii) रट लगाना।
अर्थ: एक ही बात बार-बार कहना।
वाक्य: मुर्गा बहुत सबेरे ‘कुकड़-फूं’ की रट लगाता है।

प्रश्न 2.
अधोरेखांकित वाक्यांश के लिए उचित मुहावरे का चयन करके वाक्य फिर से लिखिए: (फूला न समाना, भार होना, कान में डालना)
(i) मुनीम जी ने बड़े बाबू को बात पहुँचाई।
(ii) मेडिकल में प्रवेश मिल जाने पर नकुल बहुत प्रसन्न हुआ।
उत्तर:
(i) मुनीम जी ने बात बड़े बाबू के कान में डाल दी।
(ii) मेडिकल में प्रवेश मिल जाने पर नकुल फूला न समाया।

7. कारक:

प्रश्न.
निम्नलिखित वाक्यों में प्रयुक्त कारक पहचानकर उसका भेद लिखिए:
(i) गुलामी की प्रथा संसार भर में हजारों वर्षों तक चलती रही।
(ii) गांधीजी ने श्रम और श्रमिकों की प्रतिष्ठा स्थापित करने का काम किया।
उत्तर:
(i) गुलामी की-संबंध कारक
(ii) गांधीजी ने-कर्ता कारक।

8. विरामचिह्न:

प्रश्न.
निम्नलिखित वाक्यों में यथास्थान उचित विरामचिह्नों का प्रयोग करके वाक्य फिर से लिखिए:
(i) आम तौर से माना जाता है कि रुपया नोट और सोना-चाँदी का सिक्का ही संपत्ति है
(ii) अर्थशास्त्र ने यह नियम बताया है कि खरीद सस्ती से सस्ती हो और बिक्री महँगी से महँगी
उत्तर:
(i) आम तौर से माना जाता है कि रुपया, नोट और सोना-चाँदी का सिक्का ही संपत्ति है।
(ii) अर्थशास्त्र ने यह नियम बनाया है कि खरीद सस्ती-से-सस्ती हो और बिक्री महँगी से महँगी।

Maharashtra Board Class 10 Hindi Solutions Chapter 3 श्रम साधना

9. काल परिवर्तन:

प्रश्न.
निम्नलिखित वाक्यों का सूचना के अनुसार काल परिवर्तन कीजिए:
(i) बहुत से लोग अपनी आजीविका शरीर श्रम से चलाते हैं। (अपूर्ण भूतकाल)
(ii) जिनके पास संपत्ति है, वे आराम से रह रहे हैं। (सामान्य भविष्यकाल)
उत्तर:
(i) बहुत से लोग अपनी आजीविका शरीर श्रम से चला रहे थे।
(ii) जिनके पास संपत्ति है, वे आराम से रहेंगे।

10. वाक्य भेद:

प्रश्न 1.
निम्नलिखित वाक्यों का रचना के आधार पर भेद पहचानकर लिखिए:
(i) हमारी विचारधारा में बड़ा भारी दोष है।
(ii) लोग शरीर श्रम करना नहीं चाहते और इसे हीन दृष्टि से देखते हैं।
(iii) जिस श्रम में समाज को जिंदा रखने की क्षमता है, उस श्रम का सही मूल्य श्रमिक जान लेगा तो देश में आर्थिक क्रांति होने में देर नहीं लगेगी।
(iv) सामाजिक समता का प्रश्न अहिंसा के मार्ग से सुलझेगा।
उत्तर:
(i) सरल वाक्य
(ii) संयुक्त वाक्य
(iii) मिश्र वाक्य
(iv) सरल वाक्य।

प्रश्न 2.
निम्नलिखित वाक्यों का दी गई सूचना के अनुसार अर्थ के आधार पर परिवर्तन कीजिए:
(i) गरीब भूख की लाचारी से श्रम करता है। (संदेहवाचक वाक्य)
(ii) अब राजप्रथा मिट गई। (आज्ञावाचक वाक्य)
उत्तर:
(i) शायद गरीब भूख की लाचारी से श्रम करता है।
(ii) अब’राजप्रथा मिटा दो। 11. वाक्य शुद्धिकरण:

प्रश्न 3.
निम्नलिखित वाक्य शुद्ध करके वाक्य फिर से लिखिए:
(i) इस सम्बन्ध में कुछ भाई अमेरिका का उदाहरण पेस करते हैं।
(ii) वही आधार पे भारत को कल्याणकारी राज्य बनाने की बात चली है
उत्तर:
(i) इस संबंध में कुछ भाई अमेरिका का उदाहरण पेश करते हैं।
(ii) उसी आधार पर भारत को कल्याणकारी राज्य बनाने की बात चली है।

Maharashtra Board Class 10 Hindi Solutions Chapter 3 श्रम साधना

उपक्रम/कृति/परियोजना

पठनीय
महात्मा गांधी के श्रमप्रतिष्ठा और अहिंसा संबंधी विचार पढ़कर चर्चा कीजिए।

श्रवणीय
आर्थिक विषमता को दूर करने वाले उपायों के बारे में सुनकर कक्षा में सुनाइए।

संभाषणीय
‘वर्तमान युग में सभी बच्चों के लिए खेल-कूद और शिक्षा के समान अवसर प्राप्त हैं’ विषय पर चर्चा करते हुए अपना मत प्रस्तुत कीजिए।

श्रम साधना Summary in Hindi

विषय-प्रवेश : प्राचीन काल से आज तक सामाजिक और राजनैतिक व्यवस्था में अनेक परिवर्तन हुए हैं। इसके साथ ही संपत्ति तथा उसके निर्माण में लगने वाली शक्तियों के बीच तरह-तरह की असमानताएँ भी रही हैं। श्रमजीवियों तथा व्यापारियों की आर्थिक स्थिति में जमीन-आसमान का अंतर रहा है। प्रस्तुत निबंध में लेखक ने मानवीय जीवन, संपत्ति, संपत्ति के स्वामित्व, मनुष्य की प्राथमिक आवश्यकताओं तथा शारीरिक एवं बौद्धिक श्रम आदि का विस्तृत विवेचन किया है। प्रस्तुत वैचारिक निबंध में श्रम की प्रतिष्ठा स्थापित करते हुए सामाजिक एवं आर्थिक समानता पर बल दिया गया है।

Class 10 Hindi Lokbharti Textbook Solutions